देश में अब आलोचनात्मक आवाज सुनने की परम्परा खतम होती जा रही है. मीडिया का दमन करने के तमाम तरीके अपनाए जा रहे हैं. राजनीति भी अब मीडिया को आईना दिखाने को माध्यम नहीं बल्कि अपना दुश्मन माना जाने लगा है. अगर किसी अखबार ने किसी राजनेता के खिलाफ खबर लिख दी तो उसका विज्ञापन और चैनल ने खिलाफ खबर दिखा दी तो उसका विज्ञापन और प्रसारण दोनों रोका जा सकता है. ऐसे ही हादसे का शिकार हुआ है 'जनता टीवी'.
चैनल के किसी कार्यक्रम में आम लोगों ने हरियाणा सरकार की कारगुजारियों पर अंगुली उठाई तो सरकार ने राज्य में चैनल का प्रसारण रुकवा दिया. पर तारीफ करनी होगी जनता टीवी के मालिक और संपादक गुरबिंदर सिंह की, जिन्होंने हरियाणा सरकार के इस कदम से हार मानकर समझौता नहीं किया बल्कि लड़ाई लड़ने का रास्ता अपनाया. गुरबिंदर सिंह शायद किसी भी न्यूज चैनल के पहले मालिक होंगे जो अपने परिवार यानी पत्नी और बच्चे के साथ सड़क पर आकर मीडिया के दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाया है.
किसी चैनल के मालिक द्वारा इस तरह का कदम उठाया जाना बहुत ही साहस की बात है. इसके लिए जनता टीवी के मालिक गुरबिंदर सिंह और उनके परिवार की तारीफ और सम्मान किया जाना चाहिए. क्योंकि अमूमन ऐसी स्थिति में देश भर में चलने वाले तमाम चैनल के मालिकान राजनीति के सामने हथियार डाल देते परन्तु गुरबिंदर सिंह ने लड़ाई का रास्ता अपनाया. वे अपने परिवार तथा एक समाजसेवी के साथ सड़क पर उतरे. पीएम तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की.


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