: पत्रकार को हवालात में डालने वाले कोतवाल व दरोगा के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई : पीड़ित पत्रकार हिंदुस्तान के संपादक और पुलिस के दबाव में भूमिगत : एटा में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के प्रमुख सचिव नेतराम और प्रदेश के एडीजी सुरक्षा रजनी कान्त मिश्र का 9 नवम्बर को दौरा था. इस दौरे में जब ये दोनों अधिकारी एटा तहसील सदर का निरिक्षण कर रहे थे उसी समय एटा कोतवाली सिटी का प्रभारी डालचंद्र और पटियाली चौकी प्रभारी आरके सिंह ने एटा के हिंदुस्तान समाचार पत्र के रिपोर्टर अरुण कुमार शर्मा को प्रमुख सचिव और एडीजी के निरीक्षण की कवरेज करने से रोका.
जब अरुण कुमार ने विरोध किया तो डाल चन्द्र और आरके सिंह ने अपने हमराह सिपाहियों की मदद से न केवल अरुण कुमार से मारपीट की बल्कि उन्हें पुलिस जीप में डाल कर हवालात में बंद कर दिया. इस घटना की खबर जैसे ही अन्य पत्रकारों को लगी, पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया और सभी पत्रकार एकत्रित होकर प्रमुख सचिव नेतराम और एडीजी रजनीकांत से मिले और घटना की जानकारी दी. इस पर प्रमुख सचिव और एडीजी ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए एटा के एसएसपी अजय मोहन शर्मा को तुरंत पत्रकार को छोड़ने और अपने सामने लाने को कहा.
इस घटना से एटा पुलिस के हाथपाँव फूल गए और आनन-फानन में पुलिस वालों ने पत्रकार अरुण कुमार को हवालात से निकालकर प्रमुख सचिव के सामने हाजिर किया. प्रमुख सचिव के हस्तक्षेप के बाद पत्रकार को छोड़ दिया गया. घटना के शिकार हुए पत्रकार अरुण कुमार शर्मा ने एक तहरीर प्रमुख सचिव को इंस्पेक्टर डालचन्द्र और एसआई आरके सिंह के खिलाफ दी. उस पर प्रमुख सचिव ने एटा के एसएसपी अजय मोहन शर्मा को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा. परन्तु जब एसएसपी एटा ने कोई कार्यवाही नहीं की तो एटा के सभी पत्रकारों ने 10 नवम्बर को एटा हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ अनुज कुमार शर्मा के आह्वाहन पर दोपहर 12 बजे फरुखाबाद वाली धरमशाला में एक आपात बैठक की और सर्वसम्मति से निर्णय लिया की यदि तीन दिन के अन्दर दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई तो पत्रकार लोकतान्त्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन करेगे.
इस आशय का डीएम एटा को संबोधित एक ज्ञापन भी एसडीएम सदर उदयराज सिंह को दिया गया. इस घटना की सूचना हिंदुस्तान के अरुण शर्मा द्वारा तार द्वारा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और प्रदेश के डीजीपी ब्रजलाल को भी भेज दी गई. इसी बीच हिन्दुस्तान के पीड़ित पत्रकार अरुण कुमार व अनुज कुमार शर्मा पर जनपद के पुलिस अधिकारियों द्वारा समझौते का दबाव डाला जाने लगा. इसके चलते पीड़ित पत्रकार अरुण कुमार भूमिगत हो गया. कल से अब तक उसका कोई पता नहीं है. इस बीच हिन्दुस्तान के सम्पादक के दबाव में एटा हिंदुस्तान के प्रभारी अनुज शर्मा एटा एसएसपी अजय मोहन शर्मा से अकेले उनके ऑफिस में मिलने दोपहर के वक्त पहुंचे. ये खबर जब अन्य आंदोलित पत्रकारों को लगी तो वे भी एसएसपी आफिस पर पहुंच गए. बाहर निकल कर अनुज शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि उन पर उनके ही अखबार के संपादक का जबरदस्त दबाव है कि एसएसपी से जाकर मिलो और समझौता करो.
आखिर अनुज शर्मा भी क्यों न दबाव में आते, उनकी रोजी रोटी का जो सवाल था. कुल मिलाकर हिन्दुस्तान के संपादक ने अपने ही अखबार के पत्रकार को पुलिस द्वारा पीटने पर पुलिस पर कार्यवाही करवाने के बजाय एसएसपी एटा से अपनी दोस्ती निभाई और पूरी पत्रकार जमात को शर्मसार कर दिया. एटा के सभी पत्रकारों ने आगरा हिन्दुस्तान के संपादक के इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है. वहीं पुलिस और हिन्दुस्तान के सम्पादक के दबाव में अबतक भूमिगत पत्रकार अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि भले ही उसे हिन्दुस्तान अखबार क्यों न छोड़ना पड़े, वह अपने अपमान और पुलिसिया उत्पीडन के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





