यूपी के गाजीपुर जिले के पुलिस अधीक्षक डा. मनोज कुमार की मनमानी के खिलाफ हर ओर से आवाज उठनी शुरू हो गई है. लखनऊ से लेकर गाजीपुर की मीडिया और वेब से लेकर प्रिंट-टीवी तक में यह मुद्दा उठने-गरमाने लगा है. अगले चरण में इस मुद्दे को राजनीतिक दलों तक ले जाया जाएगा. निर्दोष युवकों पर गैंगस्टर लगाने के घृणित कारनामों को अंजाम देने वाला आईपीएस डा. मनोज कुमार अपनी गल्ती सुधारने की बजाय इस बात से खफा और दुखी दिख रहा है कि उसके खिलाफ खबरें मीडिया में क्यों प्रकाशित हो रही है.
वह इस मुद्दे पर बात करने वालों को कभी धमकाता है तो कभी पुचकारता है. फिलहाल लीजिए हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित खबर को पढ़िए. इस खबर में भी थानेदार का वही बयान प्रकाशित है कि हत्या के पांचों आरोपियों पर समान भाव से गैंगस्टर लगा दिया गया है, बिना यह फर्क किए कि कौन सही है और कौन गलत. दरअसल सही गलत का फर्क पुलिस तब करे जब वह उगाही और उत्पीड़न से फुर्सत पा सके. यही वजह है कि गाजीपुर में यदा-कदा जनता पुलिस के खिलाफ बगावत कर सड़कों पर आ जाया करती है और थानों पर धावा बोल दिया करती है.
कुछ महीने पहले ही एक हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी से नाराज ग्रामीणों ने थाने पर ही धावा बोल दिया था. उससे पहले भी गाजीपुर में कुछ थाने जनता के आक्रोश का निशाना बने हैं. जिस तर्ज पर गाजीपुर में पुलिस आम जन का उत्पीड़न कर रही है, उसमें वह दिन दूर नहीं कि कई लोग सिर्फ इसलिए कानून हाथ में लेने लगेंगे कि पुलिस ने उनके सामने यह करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं छोड़ा था.
हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला के संपादकों व रिपोर्टरों का मैं दिल से आभार करता हूं जिन्होंने एक निर्दोष युवक रविकांत सिंह को गैंगस्टर में फंसाए जाने के प्रकरण की संवेदनशीलता को समझा और इस मुद्दे को उठाया. लेकिन यह शुरुआत भर है. आगे गाजीपुर जिले भर के उन युवकों की सूची तैयार करनी है जिन पर नाहक गैंगस्टर लगा दिया गया है. फिलहाल हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर पढ़ें….

निर्दोष युवक रविकांत सिंह को गैंगस्टर में निरुद्ध किए जाने के प्रकरण को लेकर प्रकाशित अन्य खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, क्लिक करते ही कई शीर्षक आएंगे जिन पर एक एक कर क्लिक करते हुए सभी खबरें पढ़ सकते हैं-





