: कानाफूसी : हिंदुस्तान, अलीगढ़ इन दिनों नई समस्या से जूझ रहा है। समस्या वहां महिला रिपोर्टरों के अधिक दिनों तक न रुक पाने की है। किसी की समझ में नहीं आ पा रहा है कि माजरा क्या है। वहीं कुछ महिला रिपोर्टरों का कहना है कि माहौल खराब होने के चलते उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। कुछ समय पूर्व यहां महिला रिपोर्टरों की संख्या पांच तक थी। इसके बाद संपादकीय में परिवर्तन हुआ और उसका असर इन महिला रिपोर्टरों की संख्या पर दिखने लगा। एक-एक कर सभी छोड़ती चली गई।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर को मानकों पर खरा न उतरने की बात कहकर मना कर दिया गया। यह मानक क्या थे, यह बात अभी खुलकर नहीं बताई जा रही है। हाल ही में एकमात्र रिपोर्टर ने हिंदुस्तान को बाय कह दिया। इसकी कई बाइलाइन फ्रंट पेज पर प्रकाशित हुई थी, मगर उसे किस वजह से छोड़ना पड़ा यह भी नहीं बताया जा रहा। एक महिला रिपोर्टर ने इतना जरूर कहा कि मीटिंग में जिस प्रकार से बातें की जाती हैं वह उसे पसंद नहीं था। मर्यादा और संसदीय भाषा को ताक पर रखकर वरिष्ठ बातें करते हैं।
जिस अखबार की चेयरपर्सन महिला हो उसमें यह सब हो रहा है, लोगों को यह काफी अचरज की बात लग रही है। खुद हिंदुस्तान ने हाल ही में महिलाओं के लिए अभियान शुरू किया है, जिसमें कहा जाता है कि असली मर्द सताते नहीं बचाते हैं…. मगर खुद हिंदुस्तान में महिलाओं को सताने का काम चल रहा है। ऐसे में काम करना बहुत मुश्किल है। हालांकि इस समस्या से जूझ रहे हिंदुस्तान ने अन्य महिला रिपोर्टरों को खोजने का जिम्मा हाल ही में आए एक अन्य नौसिखए पत्रकार को दे रखा है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





