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हिंदुस्तान, देहरादून के संपादक की तानाशाही से परेशान हैं रिपोर्टर और स्ट्रिंगर

देहरादून : उत्तराखंड में हिन्दुस्तान अखबार के संपादक की हठधर्मिता व अड़ियल स्वभाव की वजह से अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।  संपादक की तानाशाही से परेशान होकर रिपोर्टर व स्ट्रिंगर इस्तीफे दे रहे हैं। कुछ दूसरे अखबारों में नौकरी खोजने में जी-जान से जुटे हुए हैं। वरिष्ठ लोगों के साथ संपादक का व्यवहार भी काफी खराब है। संपादक के आने के बाद से ही रिपोर्टरों का अखबार छोड़ने का सिलसिला जारी है। संपादक ने स्ट्रिंगर के लिए राज्य सरकार से मिलने वाले मान्यता फार्म में हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते स्ट्रिंगरों की मान्यता रिन्यूवल नहीं हो पाई है। संपादक के रवैये से कई स्ट्रिंगर बेहद आहत है।

देहरादून : उत्तराखंड में हिन्दुस्तान अखबार के संपादक की हठधर्मिता व अड़ियल स्वभाव की वजह से अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।  संपादक की तानाशाही से परेशान होकर रिपोर्टर व स्ट्रिंगर इस्तीफे दे रहे हैं। कुछ दूसरे अखबारों में नौकरी खोजने में जी-जान से जुटे हुए हैं। वरिष्ठ लोगों के साथ संपादक का व्यवहार भी काफी खराब है। संपादक के आने के बाद से ही रिपोर्टरों का अखबार छोड़ने का सिलसिला जारी है। संपादक ने स्ट्रिंगर के लिए राज्य सरकार से मिलने वाले मान्यता फार्म में हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते स्ट्रिंगरों की मान्यता रिन्यूवल नहीं हो पाई है। संपादक के रवैये से कई स्ट्रिंगर बेहद आहत है।

वहीं संपादक ने स्ट्रिंगरों को अनुभव संबंधी प्रमाण पत्र देने से भी इनकार कर दिया है। संपादक को डर बना हुआ कि उक्त कागज के सहारे स्ट्रिंगर दूसरी जगह नौकरी ना तलाश लें। हालांकि अपनी ताजपोशी के समय से ही संपादक गिरीश गुर्रानी बेहद चर्चित रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में नौकरी बजाकर आए संपादक की कार्यशैली से खिन्न होकर किच्छा के तेज तर्रार स्ट्रिंगर फईम तन्हा ने इस्तीफा दे दिया था। उस समय संपादक पर रिपोर्टर की बजाय विज्ञापन वालों के कहने पर निर्णय लेने का आरोप लगा था।

बाद में इस्तीफा देने वालों की कतार लग गई थी। काशीपुर, रूद्रपुर, देहरादून समेत विभिन्न हिस्सों में लोगों ने इस्तीफे दिए थे। वरिष्ठ पत्रकार व देहरादून में पत्रकारिता में कई दशक से काम कर रहे अविकल थपलियाल, अजय यादव इसी कड़ी में जुडे़ है। संपादक ने अपनी कार्यशैली के चलते जड़ें जमा रहे अखबार का नुकसान पहुचाने का काम किया है। संपादक की नीतियों से हैरान व परेशान पत्रकार अब दूसरे ठौर तलाशने में जुटे हुए है। हिन्दुस्तान हल्द्वानी व देहरादून के कई स्ट्रिंगरों ने अमर उजाला व जागरण में बायोडाटा देकर नौकरी के लिए अप्लाई किया है। वहीं कुछ न्यूज चैनलों में जुगाड़ लगा रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नही जब जड़ें जमाने से पहले ही हिन्दुस्तान का बेड़ा गर्ग हो जाएगा।

उत्तराखंड से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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