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हिंदुस्तान, देहरादून से वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल का इस्तीफा

लगभग दो दशक से दैनिक हिंदुस्तान में कार्यरत रहे अविकल थपलियाल ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे सभी को चौंका दिया। तेज-तर्रार रिपोर्टर में शुमार अविकल थपलियाल ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। हिंदुस्तान के लिए ये एक गंभीर झटका माना जा रहा है। अविकल थपलियाल एक दशक से देहरादून में हिंदुस्तान की रीढ़ बने हुए थे, और स्टाफ कर्मियों में भी काफी सम्मान की दृष्टि से देखे जाते रहे हैं। हिंदुस्तान के पटना, लखनऊ और देहरादून में अपनी विशिष्ट लेखन शैली के जरिए अपना एक विशेष पाठक वर्ग बना लिया था, १९९६ में लखनऊ एडीशन की लॉचिंग टीम के भी खास सहयोगी रहे। हिंदुस्तान का लखनऊ एडीशन सुनील दुबे ने लांच किया था।

लगभग दो दशक से दैनिक हिंदुस्तान में कार्यरत रहे अविकल थपलियाल ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे सभी को चौंका दिया। तेज-तर्रार रिपोर्टर में शुमार अविकल थपलियाल ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। हिंदुस्तान के लिए ये एक गंभीर झटका माना जा रहा है। अविकल थपलियाल एक दशक से देहरादून में हिंदुस्तान की रीढ़ बने हुए थे, और स्टाफ कर्मियों में भी काफी सम्मान की दृष्टि से देखे जाते रहे हैं। हिंदुस्तान के पटना, लखनऊ और देहरादून में अपनी विशिष्ट लेखन शैली के जरिए अपना एक विशेष पाठक वर्ग बना लिया था, १९९६ में लखनऊ एडीशन की लॉचिंग टीम के भी खास सहयोगी रहे। हिंदुस्तान का लखनऊ एडीशन सुनील दुबे ने लांच किया था।

वर्तमान में अविकल थपलियाल देहरादून एडीशन में ब्यूरो चीफ की पोस्ट पर थे, थपलियाल एक त्यागपत्र से हिंदुस्तान एडीटोरियल और प्रबंधन में भारी हलचल देखी जा रही है। २००८ में देहरादून एडीशन की लॉचिंग में थपलियाल ने अहम भूमिका निभायी थी। अपने हाई पॉलिटिकल और ब्यूरोक्रेटिक रिलेशन के चलते अविकल थपलियाल ने एचटी मैनेजमेंट के कई जटिल कार्य आसानी से करवा दिए थे, एचटी यूनिवर्सिटी के लिए अविकल ने तत्कालीन सीएम खंडूड़ी को मनाने में भी मुख्य रोल अदा किया था। थपलियाल की कोशिशों के बाद के बाद ही तत्कालीन सीएम खंडूड़ी और शशि शेखर की मुलाकात हो पायी थी। इसके अलावा मैनेजमेंट के ओर से दिए गए सभी बड़े और छोटे काम के लिए अविकल थपलियाल का ही सहारा लिया जाता रहा है।

२०११ में लखनऊ से आने के बाद थपलियाल ने खास खबरों के जरिए हिंदुस्तान को कम समय में ही पाठकों के बीच लोकप्रिय बना दिया था। उजाला और जागरण ने भी कई बार थपलियाल को अपने पाले में खींचने की कोशिश की थी लेकिन थपलियाल की निष्ठा हिंदुस्तान के साथ ही बनी रही।

थपलियाल के नाम दर्जनों सटीक पॉलिटिकल भविष्यवानियों का रिकार्ड है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी के १० विधायक के टिकट कटने की खबर थपलियाल ने ही ब्रेक की थी। इसके अलावा इसी साल विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री होने, पूर्व विधायक नारायण पाल राजकुमार के कांग्रेस में शामिल होने और मुन्ना और मधु चौहान के बीजेपी में शामिल होने समेत कई खबरे पहले ही प्रकाशित कर दी थी। लखनऊ में कतरन और देहरादून में राजदरबार कॉलम के मुख्य पत्र चैतू के जरिए सत्ताधारियों व ऊंचे पदों पर बैठे लोग और आम जनता को खूब झकझोरा।

अविकल थपलियाल अपनी नयी पारी कहां से शुरू करेंगे इस पर चर्चाएं चल रही है। फिलहाल अविकल थपलियाल प्रिंट मीडिया से जुड़ने के बहुत इच्छुक नहीं जताए जा रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि आजकल थपलियाल स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

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