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हिंदुस्तान प्रबंधन अपने रिपोर्टरों को सम्मानजनक शब्दों को पढ़ना-लिखना सिखाए

हिन्दुस्तान हिन्दी दैनिक समाचार पत्र गोरखपुर में खबरें, फीचर, लेख की प्रस्तुति में भाषा लालित्य और सार्वजनिक रूप से लोगों के प्रति सम्मानजनक भाव नहीं दिखाई देता है। इससे कई लोग अनावश्यक रूप आहत महसूस करते हैं। दिनांक 18 मई 2013 को देवरिया पृष्ठ संख्या 3 पर छपे एक फीचर शीर्षक 'इंटरनेशनल कांफ्रेन्स में शहर का एक साफ्टवेयर इंजीनियर' के फीचर प्रस्तुति में 5 कालम के फीचर में कैलफोर्निया अमेरिका के सैन फ्रान्सको में हो रही एक इंटरनेशनल कांफ्रेंस में देवरिया के प्रतिभागी की उपस्थिति को खबर बनाया गया है।

हिन्दुस्तान हिन्दी दैनिक समाचार पत्र गोरखपुर में खबरें, फीचर, लेख की प्रस्तुति में भाषा लालित्य और सार्वजनिक रूप से लोगों के प्रति सम्मानजनक भाव नहीं दिखाई देता है। इससे कई लोग अनावश्यक रूप आहत महसूस करते हैं। दिनांक 18 मई 2013 को देवरिया पृष्ठ संख्या 3 पर छपे एक फीचर शीर्षक 'इंटरनेशनल कांफ्रेन्स में शहर का एक साफ्टवेयर इंजीनियर' के फीचर प्रस्तुति में 5 कालम के फीचर में कैलफोर्निया अमेरिका के सैन फ्रान्सको में हो रही एक इंटरनेशनल कांफ्रेंस में देवरिया के प्रतिभागी की उपस्थिति को खबर बनाया गया है।

एक साफ्टवेयर इंजीनियर जिन्होंने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में शोध किया, पीएचडी की और अमेरिका के अन्तर्राष्ट्रीय कान्फ्रेन्स में अपने महत्वपूर्ण शोध को प्रस्तुत करेंगे, उनके लिए जगह जगह- उसने यह किया, उसने वह किया यह कौन सा भाषा लालित्य है और व्यक्ति को गरिमा देने का तरीका है। यह सही है कि अंग्रेजी भाषा में आम लोगों के लिए एक ही तरह का शब्द लिखा जाता है, परन्तु हिन्दी में तो अनेक शब्द हैं- उन्हें, वे, वह भाषा लालित्य बढ़ाते हैं।

दरअसल पत्रकारिता में जो दबाव रहता है लगता है उसी का शिकार है यह फीचर। किसे दोष दिया जाय कि दुनिया भर में जिनका नाम आप प्रचारित कर रहे हैं उन्हें ऐसे सम्बोधित कर रहे हैं जैसे किसी हीनता को परिभाषित कर रहे हैं। कई बार ऐसा देखने में आता है कि मीडिया ने अपनी खबरों में लोगों को ऐसे ही सम्बोधित करना शुरू कर दिया है। बीबीसी जैसे प्रसिद्ध मीडिया प्रतिष्ठान में हर व्यक्ति के प्रति सम्मानजनक भाव रहता है। मीडिया के कोड आफ कन्डेक्ट में भी इसे माना गया है। कई जगह ऐसी खबरें निकलती हैं, जिसमें लोगों के प्रति निर्मम भाव रहता है। क्या हमारे पत्रकार बन्धु इसे सकारात्मक ढंग से लेंगे। खबरों की दुनिया में भी संवेदना, भावना और शब्द लालित्य होना चाहिए। आपके इस फीचर के लिए बधाई दूं या माथा पीट लूं समझ में नहीं आता।

लेखक शमीम इकबाल स्‍वतंत्र पत्रकार हैं.

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