हिंदुस्तान, आगरा की कहानी भी अजब हो चली है। कई बार अखबार में बड़ी खबरें नहीं होती हैं तो कईं बार एक ही खबर दो बार छापकर खुद की फजीहत कर ली जाती है। ताजा वाकया मथुरा में हुई एक रेल दुर्घटना का है, जिसकी एक ही दिन, एक ही एडिशन में दो खबरें छापकर हिंदुस्तान ने अपनी खूब हंसी उड़वाई। खबर भी खासा कनफ्यूज करने वाला रहा।
मामला एक नवंबर, 2011 को नई दिल्ली-मुंबई रेल रुट पर भरतपुर क्षेत्र के धौरमुई-जघीना के बीच हुई रेल दुर्घटना का है। इसकी एक खबर दो नंबर को हिंदुस्तान के आगरा संस्करण में पेज नंबर तीन पर डबल लाइन हेडिंग ‘मालगाड़ी ने ट्रैक्टर-ट्राली के परखच्चे उड़ाए, तीन की मौत’ के साथ प्रकाशित हुई, इसमें तीन के मरने की खबर दी गई है। इसी संस्करण में पेज नंबर 10 पर यही खबर मथुरा में ‘मालगाड़ी ट्रैक्टर से टकराई, दो की मौत’ डबल लाइन हेडिंग से तीन कालम में प्रकाशित हुई, इसमें दो की मौत की खबर है।
पाठकों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कौन सी खबर सही है। खुद को नंबर दो का अखबार बताने वाले हिंदुस्तान के मथुरा में संजीव गौतम, आगरा में केके उपाध्याय और दिल्ली में शशि शेखर जैसे स्वनामधन्य वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी बैठे हैं फिर भी किसी का ध्यान इस गलती की तरफ नहीं गया। खुद शशि शेखर आगरा यूनिट पर सीधे नजर रखते हैं, एक-एक कर अपने चहेतों को उन्होंने इस यूनिट में नियुक्त भी कर दिया फिर भी इस तरह की चूक का मतलब समझ नहीं आ रहा है। इससे अच्छा अखबार तो पूर्व में कम अनुभव वाले संपादकीय कर्मचारी ही निकाल रहे थे। वैसे पाठक मान चुके हैं कि हिंदुस्तान अभी नए चुलबुले बालक की तरह से पैदा हुआ है जो उछलता ज्यादा है मगर हकीकत कुछ और ही होती है।


हरिदत्त तिवारी
आगरा






