डिजास्टर मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जानी वाली सेना को यदि यही बात सिखाई जाए तो कैसा लगेगा। शायद उल्टा बांस बरेली को। मगर कुछ ऐसा ही किया हिंदुस्तान आगरा संस्करण ने। हुआ यूं कि आगरा में सेना की भर्ती रैली के दौरान भगदड़ में एक युवक की मौत हो गई। मुद्दा था। राष्ट्रीय स्तर पर उठा। अतः हिंदुस्तान के स्थानीय संपादक पुष्पेंद्र शर्मा ने इस पर इतवारी टिप्पणी कर डाली। उन्होंने सेना और स्थानीय प्रशासन को इस बात के लिए कोसा कि आखिर डिजास्टर मैनेजमेंट के उपाय क्यों नहीं अपनाए।
असल में इस पूरी टिप्पणी में इस बात का भी ख्याल नहीं रखा गया कि आखिर डिजास्टर मैनेजमेंट क्या होता है। यह बात अब स्कूली बच्चों तक को पता है कि जो बड़े इलाके पर विपदा आती है उसे डिजास्टर मैनेजमेंट के अंतर्गत रखा जाता है। इसमें प्राकृतिक आपदा या परमाणु बम का हमला जैसे गंभीर विषय शामिल होते हैं। पुष्पेंद्र जी ने एक स्टेडियम में जुटी 14-15 हजार की भीड़ को कंट्रोल में करने के लिए ही डिजास्टर मैनेजमेंट अपनाने का सुझाव दे डाला। जबकि आगरा में इससे बड़े-बड़े आयोजन चुनावों के वक्त और रामलीला के समय होते हैं। जिसमें 50 हजार से एक लाख तक लोगों की भीड़ जुट जाती है। इस दुर्घटना को रोकने के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट की बजाय क्राउड मैनेजमेंट की ज्यादा जरूरत थी। मगर हिंदुस्तान ने चर्चा कुछ और ही छेड़ दी।
असल में पुष्पेंद्र शर्मा पर संपादकीय लिखने का दबाव था। अपनी लेखन शैली के लिए कम और मैनेजर शैली के लिए ज्यादा मशहूर पुष्पेंद्र ने जब हिंदुस्तान के कुछ नौसिखिए पत्रकारों से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने भी हां में हां मिला दी। किसी ने उनकी बात को काटने की हिम्मत नहीं दिखाई। लिखने में भी नवोदित पत्रकार की मदद ली गई। इसी वजह से पूरी खबर कभी कुछ कहती हुई लगती है, कभी कुछ। इस खबर को पढ़कर सेना और प्रशासन भी खूब हंस रहा है कि अब एक दुर्घटना के लिए भी डिजास्टर मैनेजमेंट वाली एक्सरसाइज करनी पड़ेगी।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






