हिंदुस्तान का जॉब्स बंद हो गया. प्रबंधन द्वारा शुरू किया गया यह साप्ताहिक रोजगार समाचार पत्र युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया. जोरशोर से शुरू किया गया यह अखबार साल भर भी नहीं चल पाया. पूरी संसाधन होने के बावजूद यह रोजगार समाचार के साए से बाहर नहीं निकल पाया. शुरू से ही इस अखबार को पाठकों का बेहतर रिस्पांस नहीं मिला. न तो इसमें रोजगार समाचार से कुछ अलग या स्पेशल था और ना ही कोई ताजगी, लिहाजा पाठक भी इसे नकल समझकर अपनी अकल लगा दिए. परिणाम जॉब्स की अनचाही मौत हो गई.
जॉब्स को अपनी सेवाएं दे रही टीम को युवा अखबार में शिफ्ट कर दिया गया है. लोगों ने अभी से संभावना जतानी शुरू कर दी है कि जल्द ही युवा के भी बंद करने की घोषणा सुनने को मिल सकती है. पिछले साल मई में शुरू किया गया जॉब्स हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों में प्रकाशित हो रहा था. परन्तु पूरी ताकत लगाने के बाद भी हिंदुस्तान प्रबंधन और शशिशेखर की टीम इस अखबार को विश्वसनीय नहीं बना पाई और ना ही रोजगार समाचार की छाया से बाहर निकाल पाई.
सात रुपये मूल्य वाले इस टैबलाइड अखबार की वेबसाइट भी लांच की गई थी, इसके बाद भी यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया. 32 पेज का यह अखबार पाठकों की किसी उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया. कंपनी को इससे नुकसान हो रहा था, लिहाजा प्रबंधन जॉब्स को ज्यादा ढोने की बजाय इस पर ताला लगाना ही बेहतर समझा. गौरतलब है कि हिंदुस्तान टाइम्स शाइन ना से पहले ही अंग्रेजी में रोजगार से जुड़े समाचार प्रकाशित करता है.






