: रिपोर्टर ने भिजवाया नोटिस : हिन्दुस्तान, मेरठ के स्थानीय सम्पादक सूर्यकान्त द्विवेदी ने मवाना तहसील के अपने ही रिपोर्टर संदीप मवाना के साढे पाँच लाख रुपये हड़प लिये हैं। संदीप ने सूर्यकांत द्विवेदी को यह पैसे उधार दिए थे, पर वे पैसे वापस नहीं कर रहे हैं। जब रिपोर्टर ने तकादा किया तो रिपोर्टर संदीप नागर को पुलिस से धमकी दिलाने का प्रयास किया गया। लेकिन रिपोर्टर सम्पादक की धमकी में आने की बजाय सूर्यकांत को अपने अधिवक्ता मो. शरीफ वजीर से नोटिस भिजवाया है।
नोटिस में कहा गया है कि मेरठ में मकान खरीदने हेतु दिनांक 13-02-2012 को अंकन साढ़े पाँच लाख रुपये 10 दिन में वापस करने के वादे से उधार लिये थे तथा भरोसा दिलाया था कि जैसे ही 10-12 दिन में बैंक से होम लोन हो जायेगा, पैसा वापिस कर दिया जायेगा। लेकिन लगातार पैसा मांगने पर, सम्पादक ने वापिस नहीं लौटाया। यही नहीं जब संदीप नागर ने 06-04-2013 को सुबह से शाम तक कई बार फोन किया तो उन्होंने फोन भी नहीं उठाया। जब दूसरे नम्बर से फोन किया गया तो, सूर्यकांत द्विवेदी ने फोन सुना, जिस पर संदीप नागर ने अपने साढे पाँच लाख रुपये मांगे तो सम्पादक उत्तेजित हो गये तथा डांट-डपट की। कहा कि जब भी बन्दोबस्त हो जायेगा, रुपया लौटा दूँगा। आइंन्दा मुझे कोई टेलीफोन मत करना और न ही तकादा।
इसके बाद दिनांक 07-04-2013 सुबह से शाम तक संदीप नागर ने सूर्यकांत को कई बार फोन किया और पैसा लौटाने की समय सीमा निर्धारित करने की बात करनी चाही, तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया तथा रात्रि करीब दस बजे थानाध्यक्ष मवाना तेजसिंह यादव सरकारी जीप एवं पुलिस फोर्स के साथा संदीप नागर के घर पहुँचे तथा कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का आदेश है कि आप सूर्यकान्त द्विवेदी के फोन पर फोन न कर के लेन-देन के मामले को कानूनी कार्रवाई से निपटायें।
हालांकि संदीप अपने संपादक के बदले रवैये और पैसे हड़पने की नीयत से हतप्रभ है। संदीप नागर का कहना है कि वह अब कानूनी कार्रवाई कर के संपादक से ब्याज सहित अपने पैसे वसूल करेगा। चाहे अब उसे सुप्रीम कोर्ट तक क्यों न जाना पड़े। इधर इस मामले में हिंदुस्तान के संपादक सूर्यकांत द्विवेदी का पक्ष लेने के लिए फोन किया और एसएमएस भी किया गया, परन्तु उन्होंने न तो फोन पिक किया और ना ही एसएमएस का कोई जवाब दिया। नीचे वकील द्वारा भेजा गया नोटिस….








