हिंदुस्तान, बनारस से खबर है कि ज्वाइंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत अनिल मिश्रा को फोर्सलीव पर भेज दिया गया है. अनिल का पोस्ट डीएनई का है पर संपादक के चहेते होने के चलते ज्वाइन न्यूज एडिटर के रूप में काम देखते हैं. कुछ शिकायतों के बाद उन्हें फोर्स लीव पर भेज दिया गया है. खबर है कि यह कार्रवाई प्रधान संपादक शशि शेखर के निर्देश पर की गई है. इसको लेकर बनारस यूनिट में हड़कम्प है. अखबार में सबसे ताकतवर माने जाने वाले अनिल मिश्रा के साथ हुई कार्रवाई के बाद उनके चंगू-मंगू परेशान हैं.
अनिल मिश्रा को फोर्स लीव पर भेजे जाने को लेकर दो खबरें आ रही हैं. पहली खबर है कि हिंदुस्तान के एक वरिष्ठ सहयोगी ने कुछ मामलों को लेकर अनिल मिश्रा की शिकायत प्रधान संपादक शशि शेखर से की थी, जिसके बाद उन्हें फौरी तौर पर जांच कराकर उन्होंने अनिल को फोर्स लीव पर भेजे जाने का फरमान सुनाया. वहीं दूसरी खबर यह है कि अनिल मिश्रा पर आरोप लगा है कि उन्होंने पैसे लेकर माफिया डॉन की एक खबर पेड न्यूज की तरह छापी है. इसके बाद ही उनको फोर्स लीव पर भेजे जाने की कार्रवाई की गई है.
माफिया डॉन बृजेश सिंह चंदौली जिले के सैयदराजा विधानसभा सीट से प्रत्याशी हैं. उनके समर्थन में सैयदराजा विस क्षेत्र में एक जनसभा आयोजित की गई थी. बताया जा रहा है कि हिंदुस्तान के चंदौली एडिशन में यह खबर चार कॉलम एवं डीसी फोटो के साथ छापी गई है. इसमें माफिया डॉन को व्यापक कवरेज दिया गया है. इसको लेकर ही अनिल मिश्रा पर आरोप लगा है कि उन्होंने माफिया डॉन एंड कंपनी से बड़ी रकम लेकर पेड न्यूज की तरह यह खबर प्रकाशित किया है. हालांकि सूत्रों से पता करने पर इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. हालांकि उनका कहना है कि अनिल मिश्रा को फोर्स लीव पर भेजे जाने का कारण उनकी प्रबंधन को लगातार मिल रही शिकायतें हैं.
उल्लेखनीय है कि अनिल मिश्रा किसी भी संपादक के खासे चहेते रहे हैं. या कहें कि अपनी शैली से वे हर संपादक या संपादकीय प्रभारी के चहेते बन जाते हैं. चाहे शशांक शेखर रहे हों, रवि पंत रहे हों, विशेश्वर कुमार रहे हों, राजकुमार सिंह रहे हों या फिर अनिल भास्कर हों. वे सबके चहेते बने रहते हैं. कहा तो यह भी जाता है कि बनारस यूनिट के बुरे दिन आने के पीछे के असली कारण वो ही हैं. हिंदुस्तानियों की भाषा में भुअरा गैंग के सरगना कहे जाने वाले अनिल मिश्रा अखबार की लांचिंग के समय से ही जुड़े हुए हैं. संपादकों पर उनके पकड़ का ही असर है कि डीएनई पद पर होते हुए भी संपादक अनिल भास्कर ने एनई बनकर आए रजनीश त्रिपाठी जैसे सुलझे पत्रकार पर उनको वरीयता दे रखी है, इनपुट-आउटपुट में अनिल मिश्रा का ही हस्तक्षेप चलता है.






