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हिंदुस्‍तान, बरेली में सिटी इंचार्जी को लेकर तनाव

: बृजेंद्र निर्मल ने खड़े किए हाथ, पद अब भी खाली : हिंदुस्‍तान, बरेली में तनाव का माहौल बना हुआ है. अखबार में जमकर गुटबाजी हो रही है. मलाईदार पद को हथियाने के लिए शह-मात और एक दूसरे को पटकनी देने का खेल शुरू हो चुका है. यहां पर सीनियर और जूनियर को लेकर अंदर ही अंदर उबाल है. बताया जा रहा है कि पर अमर उजाला आए तथा गैर अमर उजाला वालों के बीच एक दूसरे को अड़ंगी मारने की कोशिश चल रही हैं, जिसका असर अखबार के सर्कुलेशन पर भी पड़ रहा है.

: बृजेंद्र निर्मल ने खड़े किए हाथ, पद अब भी खाली : हिंदुस्‍तान, बरेली में तनाव का माहौल बना हुआ है. अखबार में जमकर गुटबाजी हो रही है. मलाईदार पद को हथियाने के लिए शह-मात और एक दूसरे को पटकनी देने का खेल शुरू हो चुका है. यहां पर सीनियर और जूनियर को लेकर अंदर ही अंदर उबाल है. बताया जा रहा है कि पर अमर उजाला आए तथा गैर अमर उजाला वालों के बीच एक दूसरे को अड़ंगी मारने की कोशिश चल रही हैं, जिसका असर अखबार के सर्कुलेशन पर भी पड़ रहा है.

यहां पर फिलहाल सबसे बड़ा विवाद सिटी इंचार्ज की कुर्सी को लेकर है. सिटी इंचार्ज पद पर तैनात संजीव द्विवेदी के इस्‍तीफा देने के बाद काफी समय तक यह पद खाली पड़ा हुआ था. चुनावों के दौरान परसाखेड़ा कार्यालय में बैठने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार बृजेंद्र निर्मल को सिटी इंचार्ज बना दिया गया. चुनाव के सकुशल निपटने के बाद इस पद को लेकर बवाल को देखते हुए बृजेंद्र निर्मल ने प्रबंधन के सामने हाथ खड़ा कर दिया तथा परसाखेड़ा वापस जाने की गुजारिश प्रबंधन से कर डाली.

बृजेंद्र के जाने के बाद सेकेंड इंचार्ज पंकज मिश्रा ने जिम्‍मेदारी संभालनी शुरू की, पर यहीं से मामले में ट्विस्‍ट आ गया. एनई योगेंद्र रावत ने धीरे-धीरे सिटी का कमान खुद संभालना शुरू कर दिया. अमर उजाला से आए पंकज मिश्रा को धीरे-धीरे किनारे करते हुए पंकज सिंह को प्रमोट करना शुरू कर दिया गया. अमर उजाला से आए तथा आगरा के संपादक केके उपाध्‍याय के खास माने जाने वाले लोगों को स्‍थानीय संपादक आशीष व्‍यास और योगेंद्र रावत ने महत्‍वहीन कर दिया है. बस यहीं से यह तनाव बढ़ा हुआ है.

खासकर सिटी के मामलों में पंकज सिंह को लगातार प्रमोट किए जाने से अमर उजाला से उनसे वरिष्‍ठ पदों पर आए लोग नाराज हैं. सुरेश पाण्‍डेय, आशीष दीक्षित, पंकज मिश्रा, संजीव शर्मा, आसिफ, संजीव गंभीर जैसे लोग, जो अमर उजाला से हिंदुस्‍तान में सीनियर पदों पर आए थे, महत्‍व नहीं दिए जाने से कुपित हैं. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने इस बारे में अपने खास केके उपाध्‍याय को भी अवगत करा दिया है, जिसके बाद से मामला और सरगर्म है.

हिंदुस्‍तान, बरेली के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कभी केके उपाध्‍याय के खास रहे आशीष व्‍यास अब उनके चुभने लगे हैं. आशीष अखबार का माहौल ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन अपेक्षानुरूप बदलाव नहीं हो पा रहा है. दोनों गुट चुनाव के दौरान एक दूसरे पर जमकर उगाही करने का आरोप भी जड़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि केके उपाध्‍याय और आशीष वशिष्‍ठ के बीच संजीव द्विवेदी के जाने के बाद से ही शीत युद्ध चल रहा है, क्‍योंकि संजीव को केके उपाध्‍याय का आदमी माना जाता था, जो उनके लिए तमाम चीजें उपलब्‍ध कराते थे.

 

 
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