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हिंदुस्‍तान, मुरादाबाद का धमाका : भीषण गर्मी में भी प्रदर्शकारियों को पहनवाया सर्दी के कपड़े!

समाचार पत्रों में काम करना जिम्‍मेदारी का कार्य होता है लेकिन कुछ समाचार पत्रों का प्रबंधन सस्‍ते के चक्‍कर में कम पढ़े-लिखे पत्रकार को रख लेते हैं, जिसके कारण प्रबंधन को कई बार अपनी ही मजाक बनवाना पड़ जाता है. अब मुरादाबाद से प्रकाशित हिंदी समाचार पत्र हिंदुस्‍तान को ही देखिए, 7 मई को इस अखबार के अमरोहा संस्‍करण के पेज नम्‍बर पांच पर बिजली की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए कुछ लोगों का फोटो प्रकाशित हुआ है.

समाचार पत्रों में काम करना जिम्‍मेदारी का कार्य होता है लेकिन कुछ समाचार पत्रों का प्रबंधन सस्‍ते के चक्‍कर में कम पढ़े-लिखे पत्रकार को रख लेते हैं, जिसके कारण प्रबंधन को कई बार अपनी ही मजाक बनवाना पड़ जाता है. अब मुरादाबाद से प्रकाशित हिंदी समाचार पत्र हिंदुस्‍तान को ही देखिए, 7 मई को इस अखबार के अमरोहा संस्‍करण के पेज नम्‍बर पांच पर बिजली की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए कुछ लोगों का फोटो प्रकाशित हुआ है.

इस फोटो में दिखने वाले लोग कहीं से भी प्रदर्शनकारी नहीं लगते हैं. बल्कि यह पूर्ण रूप से प्रायोजित फोटो मालूम पड़ती है. खैर, यह तो रही दूसरी बात. असली बात यह है कि इस फोटो में दिख रहे सभी प्रदर्शनकारियों ने जैकेट और स्‍वेटर पहन रखे हैं, जबकि प्रदर्शन के दिन यानी 6 मई को अमरोहा का तापमान लगभग 42 डिग्री के आसपास था. अब आप ही बताइए कि क्‍या इतनी गर्मी में इस तरह के कपड़े पहने जा सकते हैं. इससे साफ प्रतीत होता है कि प्रदर्शन का फोटो फर्जी है. इस फर्जी फोटो के चलते हिंदुस्‍तान का हर जगह मजाक बन रहा है.

गलत फोटो छापने वाले पत्रकार भी हर जगह मुंह छुपाए घूम रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें जो मिल रहा है मजाक बना रहा है. पर सवाल यह है कि जिले से यह फोटो अगर भेजी गई तो क्‍या मुरादाबाद में इस खबर को देखने के लिए और पेज पर लगाने के लिए बैठे लोगों के दिमाग में भी कोई ख्‍याल नहीं आया. क्‍या उनके पास अपना कोई कॉमन सेंस नहीं है कि वे गर्मी और जाड़े में पहने जाने वाले कपड़ों में अंतर कर सकें. इस खबर के छपने के 24 घंटे बाद भी इस गलती के लिए जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ कोर्ठ कार्रवाई नहीं हुई है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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