मुरादाबाद में अपनी पहचान बनाने तथा प्रतिद्वंद्वी अखबारों को पीछे छोड़ने के बाद ऐसा लग रहा है कि प्रबंधन अत्यधिक खुश हो गया है या उसे खबरों का अकाल पड़ गया है. इसका उदाहरण 24 मई के अंक में देखने को मिला. एक ही खबर को दो पेज पर शीर्षक बदलकर लगाया गया. इससे ना सिर्फ पाठक कन्फ्यूज हुए बल्कि अखबार में कार्य करने की शैली पर भी सवाल उठाए गए. जिस खबर को पेज नम्बर सात पर लगाया गया, उसी खबर को शीर्षक बदलकर पेज नम्बर आठ पर भी लगा दिया गया. नीचे दोनों पेजों पर प्रकाशित खबरों की कटिंग.


एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






