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हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : उस समय सोशल मीडिया नहीं था और मैं बेहद लाचार और बेबस था

मुंगेर। वर्ष 2008। मई का महीना।‘‘ट्रिन-ट्रिन‘‘ कृष्ण प्रसाद जी बोल रहे हैं? जी हां। दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक प्रभात खबर में आपके बारे में इनदिनों लगातार खबरें छप रही हैं। क्या सच्चाई है? क्यों ऐसा हो रहा है? क्यों सारे अखबार के मालिक और संपादक आपकी जिन्दगी को बरबाद करने पर आमदा हैं? आप क्यों नहीं प्रतिवाद कर रहे हैं? मुंगेर शहर के कासिम बाजार पुलिस स्टेशन में मेरे विरूद्ध अनुसूचित जाति की एक विवाहिता महिला की ओर से प्राथमिकी दर्ज होने और वर्णित तीनों हिन्दी अखबारों में लगातार खबरें छपने के बाद मेरे शुभ चिन्तकों के फोन महीनों तक लगातार आते रहे और फोन पर ही तरह-तरह के सवाल भी वे लोग पूछते रहे और मैं निरुत्तर बना रहा। 

मुंगेर। वर्ष 2008। मई का महीना।‘‘ट्रिन-ट्रिन‘‘ कृष्ण प्रसाद जी बोल रहे हैं? जी हां। दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक प्रभात खबर में आपके बारे में इनदिनों लगातार खबरें छप रही हैं। क्या सच्चाई है? क्यों ऐसा हो रहा है? क्यों सारे अखबार के मालिक और संपादक आपकी जिन्दगी को बरबाद करने पर आमदा हैं? आप क्यों नहीं प्रतिवाद कर रहे हैं? मुंगेर शहर के कासिम बाजार पुलिस स्टेशन में मेरे विरूद्ध अनुसूचित जाति की एक विवाहिता महिला की ओर से प्राथमिकी दर्ज होने और वर्णित तीनों हिन्दी अखबारों में लगातार खबरें छपने के बाद मेरे शुभ चिन्तकों के फोन महीनों तक लगातार आते रहे और फोन पर ही तरह-तरह के सवाल भी वे लोग पूछते रहे और मैं निरुत्तर बना रहा। 

कारण यह था कि उस समय कोई सोशल मीडिया नहीं था। उस समय अपनी बात रखने का कोई प्लेटफार्म नहीं था। दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक प्रभात खबर ने मेरे और मेरे परिवार की जिन्दगी बरबाद कर दी। तीनों अखबारों के मुंगेर कार्यालय की टीम मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थीं। मैं एक पत्रकार, एक वकील और एक शिक्षाविद् होकर भी बेहद लाचार और बेबस था। अखबारों की ओर से हो रहे लगातार हमलों ने मुझे मानसिक रूप से तोड़ने का काम तो किया ही, साथ ही अखबारों ने मेरे आर्थिक स्रोतों को तहस-नहस करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। ऐसा समय भी कइयों बार आया कि आत्महत्या कर लेने की इच्छा हुई। परन्तु, परमपिता ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
 
संस्थान ने मुझे निकाल दिया : वर्ष 2001 में अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स‘ और हिन्दी दैनिक ‘दैनिक हिन्दुस्तान‘ से बेइज्जत कर निकाल दिए जाने के बाद से मैं स्कूल और कालेज के छात्र-छात्राओं को ‘स्पोकन-इंगलिश‘ पढ़ाकर अपनी जीविका किसी प्रकार चला रहा था। सुबह और शाम बच्चे-बच्चियों को मैं पढ़ाता था। साथ में दिन में बचे कुछ घंटों में समाचार संकलन और संबंधित संस्थानों में न्यूज प्रेषण का काम करता था। आय-स्रोत में वृद्धि के लिए मैंने एक संस्थान में ‘स्पोकन-इंगलिश‘ भी पढ़ाना शुरू किया। इसी बीच, तीनों अखबारों ने संस्थान से मुझे निकालने के लिए संस्थान की प्राचार्या पर लगातार दवाब बनाने का काम किया। और जब दवाब का असर नहीं हुआ, तो मेरे विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर मुझे उस संस्थान से भी बाहर का रास्ता दिखवा दिया। 
 
प्रारंभ में संस्थान की प्राचार्या जब मुझे हटाने से इन्कार कर दिया, तो अखबारों ने उस प्राचार्या के खिलाफ में मोर्चा खोल दिया और अखबार उनके विरुद्ध आग उगलने लगा। संस्थान ने मेरे पारिश्रमिक का लगभग दस हजार रुपया भी पचा लिया। तीनों अखबारों के मालिक और संपादक सुनियोजित ढंग से मेरे आय-स्रोत पर लगातार हमला करते रहे। एक बेसहारा और लाचार व्यक्ति की तरह मैं अपनी जिन्दगी की गाड़ी किसी प्रकार खींचता चला गया।
 
आखिर हिन्दुस्तान, जागरण और प्रभात खबर ने मिलकर ऐसा क्यों किया? : कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के भागीरथ प्रयास से जब से केन्द्र सरकार ने सूचना पाने का अधिकार का कानून देश में लागू किया, मैंने इस कानून के तहत दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के अवैध प्रकाशन, विज्ञापन फर्जीवाड़ा, संपादक, उप-संपादकों के आर्थिक शोषण से संबंधित मामलों में सूचना प्राप्त करने की मुहिम शुरू कर दी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मानो बेसहारा, लाचार और हर दिशाओं से टूट चुके एक व्यक्ति को एक शक्तिशाली कानूनी हथियार थमा दिया। राइट टू इनफारमेशन एक्ट के तहत जब मैंने केवल दैनिक हिन्दुस्तान के आर्थिक भ्रष्टाचार और संपादक से प्रखंड स्तर तक के संवाददाताओं के आर्थिक शोषण से जुड़े सवाल पूछने का काम करना शुरू किया, तो हिन्दुस्तान प्रबंधन अपराध के रास्ते पर उतर पड़ा।
 
एसपी, मुंगेर भी हतप्रभ रह गए : तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शालीन ने जब मेरे आवेदन पढ़े, वे मेरे मुकदमे के संबंध में वार्ता करने के पहले खुद ही शून्य में खो गए। उन्होंने मुझे न्याय देने का आश्वासन दिया और कुछ इस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया प्रकट की- ‘‘दैनिक हिन्दुस्तान अखबार बिना निबंधन का छप रहा है?‘‘
 
एसपी, मुंगेर को समर्पित आवेदन-पत्र में आखिर क्या था? : 19 मई, 2008 को एसपी को प्रेषित पत्र में मैंने लिखा– ‘‘सर, निवेदन है कि मेरे विरूद्ध मुंगेर के कासिम बाजार पुलिस थाना में सुनियोजित ढंग से षड़यंत्र के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 448/323/504/354/341 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी की संख्या- 71/08, दिनांक 16-05-2008 है। सूचनादाता श्रीमती देवी, पति कामो रावत, साकीन-बेटवन बाजार, अड़गड़ा रोड, थाना-कासिम बाजार की रहनेवाली हैं। फर्जी आरोपों के पुलिन्दों से भरी प्राथमिकी को दर्ज करने की कार्रवाई कासिम बाजार थाना के थाना -प्रभारी श्री सुबोध तिवारी ने निम्नवत वर्णित प्रभावशाली व्यक्तियों से मिलकर आपराधिक षड़यंत्र के तहत मोटी राशि लेकर निम्नवर्णित कारणों के कारण की है।
 
(1) मैंने सूचना के अधिकार के तहत बिहार सरकार के वित्त (अंकेक्षण) विभाग के मुख्य लेखानियंत्रक का वित्त अंकेक्षण प्रतिवेदन, प्रतिवेदन संख्या- 195/2005-06 तथा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बिहार, पटना के सचिव और वरिष्ठ पदाधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट की प्रतियां प्राप्त कर यथोचित कानूनी कार्रवाई हेतु मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार को अपने पिता श्री काशी प्रसाद, जो द टाइम्स आफ इंडिया के जिला संवाददाता हैं, की कलम से प्रेषित की है। जानकारी है कि बिहार सरकार ने अंकेक्षण प्रतिवेदन और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की विभागीय जांच रिपोर्ट पर काफी गंभीर रूख अपनाए हुए है। अंकेक्षण प्रतिवेदन और विभागीय जांच रिपोर्ट में दी हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, जो वर्तमान में एचटी मीडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है तथा जो बिहार में दैनिक हिन्दुस्तान और द हिन्दस्तान टाइम्स अखबार प्रकाशित और वितरित करता है, के द्वारा बिना रजिस्‍ट्रेशन (बिना लाइसेंस) के भागलपुर और मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालयों से गैरकानूनी ढंग से दैनिक हिन्दुस्तान प्रकाशित कर बिहार सरकार के केवल एक विभाग ‘सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बिहार, पटना‘ को एक करोड़ रुपया का चूना जालसाजी कर लगाने से जुड़ा मामला है। विश्वास है कि इस कांड में आगे जांच बढ़ने पर इस अखबार के द्वारा विज्ञापन मद में केन्द्र और राज्य सरकारों के राजस्व को चूना लगाने के सनसनीखेज मामले की राशि एक सौ करोड़ तक छू सकती है। 
 
(2) मैंने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, पटना से पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर तथा मुंगेर के माननीय जिला पदाधिकारियों के समक्ष सूचना पाने के अधिकार के तहत एचटी मीडिया लिमिटेड के द्वारा वर्तमान में बिना निबंधन (लाइसेंस) के बिहार के सभी जिलों से अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग रूप में दैनिक हिन्दुस्तान अखबार मात्र एक रजिस्‍ट्रेशन नम्बर पर प्रकाशित करने और अखबार के अवैध प्रकाशन के जरिए करोड़ों रुपये के सरकारी विज्ञापन वसूलने से संबंधित सूचना मांगने की कार्रवाई की है। 
 
(3) मैंने सूचना पाने का अधिकार कानून के तहत श्रम विभाग, बिहार सरकार, पटना के समक्ष बिहार के मुख्यालय सहित सभी जिलों में दैनिक हिन्दुस्तान के कार्यरत संपादकों, उप-संपादकों, संवाददाताओं, छायाकारों के अभूतपूर्व शोषण से संबंधित प्रश्न पूछने की कार्रवाई की है।
 
(4) मैंने सूचना पाने का अधिकार कानून के तहत मुंगेर के माननीय जिला पदाधिकारी के समक्ष हिन्दुस्तान के कर्मचारियों के द्वारा संवाददाता और छायाकारों के नाम से विज्ञापन वसूलने के गोरखधंधों से जुड़े प्रश्न पूछने की कार्रवाई की है। 
 
(5) साथ ही मैंने प्रबंधन के द्वारा दैनिक हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स से अपने को गैरकानूनी ढंग से हटाए जाने के विरोध में श्रम विभाग में भिन्न-भिन्न स्तर पर कानूनी कार्रवाई की है। श्रम विभाग में मेरे मामले भिन्न-भिन्न स्तर पर लंबित है।
 
एसपी को प्रेषित पत्र में मैंने आगे लिखा कि– ‘‘मेरा दावा है कि एचटी मीडिया लिमिटेड के बिहार प्रबंधन के प्रमुख श्री योगेश चन्द्र अग्रवाल, दैनिक हिन्दुस्तान, पटना के संपादक श्री सुनील दूबे, हिन्दुस्तान ,भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक श्री विजय भाष्कर के आदेश पर मुंगेर हिन्दुस्तान कार्यालय के कर्मचारीगण क्रमशः संतोष सहाय, सुजीत कुमार मिश्र, सुबोध शर्मा उर्फ सुबोध सागर एवं कुछेक अन्य मीडिया से जुड़े लोगों ने थाना-प्रभारी से मिलीभगत कर मेरे विरूद्ध कपोलकल्पित घटना से संबंधित प्राथमिकी दर्ज कराई है।
 
श्रीमान् के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मैं कहना चाहता हूं कि एचटी मीडिया लिमिटेड के वर्णित लोगों की इस कार्रवाई के पीछे का उद्देश्य है कि मेरी स्वच्छ छवि को दूरदर्शन, आकाशवाणी और यूएनआई के दिल्ली और पटना स्थित संपादकों और निदेशकों के समक्ष धूमिल कर मुझे नौकरी से हटा देना तथा मेरे द्वारा मुंगेर में स्पोकन -इंगलिश के इन्स्टीच्यूट के रोजगार को बरबाद करना। मेरे इन्स्टीच्यूट में अधिकांश महाविद्यालय की लड़किया स्पोकन -इंगलिश सीखने आती हैं। मीडिया हाउस की कोशिश यह भी है कि आवेदक मीडिया हाउस के अरबों के आर्थिक अपराध के मामले में सूचना पाने का अधिकार कानून के तहत कोई कार्रवाई करने की हिमाकत न कर सके।
 
श्रीमान् को बताना चाहता हूं कि बिहार के प्रतिष्ठित पत्रकारों में मेरी पहचान है। वर्तमान में मैं भारत सरकार के दूरदर्शन और आकाशवाणी तथा राष्‍ट्रीय न्यूज एजेंसी यूएनआई का मुंगेर स्थित अंशकालिक संवाददाता हूं। आपसे अनुरोध है कि आप अपने निर्देशन में मेरे विरूद्ध दर्ज फर्जी प्राथमिकी में उच्चस्तरीय जांच कराकर मुझे न्याय देने तथा इस षड़यंत्र में शामिल दैनिक हिन्दुस्तान के तथाकथित कर्मियों और थाना प्रभारी के विरूद्ध कठोरतम कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे न्यायप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में फिर दुबारा कोई व्यक्ति ऐसा फर्जी आपराधिक मामला तैयार कर किसी ईमानदार और चरित्रवान व्यक्ति की मर्यादा से खेलने और उसके और उसके परिवार की जिन्दगी को तबाह करने का दुस्साहस न करे।
 
इस घटना के बाद मैं और मेरा पूरा परिवार भयभीत है यह देखकर कि देश का इतना बड़ा शक्तिशाली मीडिया हाउस पुलिस के कुछेक लोगों से मिलकर जब फर्जी प्राथमिकी दर्ज करा सकता है, तो वे लोग मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों की हत्या कराकर उसे दुर्घटना का नाम भी दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में मेरे लड़के कर्ण कुमार, जो मुंगेर से सीएनएन का स्ट्रिंगर है तथा पत्नी श्रीमती मीरा प्रसाद, जो मेरे साथ फोटाग्राफी का काम करती है, की जिन्दगी पर मौत का साया छा गया है। मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की दिशा में भी कार्रवाई करने की कृपा करने का श्रीमान् से प्रार्थना करता हूं।‘‘
 
जागरण और प्रभात खबर ने हिन्दुस्तान को क्यों साथ दिया? : चूंकि दैनिक जागरण और दैनिक प्रभात खबर भी दैनिक हिन्दुस्तान की तर्ज पर पूरे बिहार में एक निबंधन संख्या पर राज्य के अनेक जिलों से अवैध संस्करणों का प्रकाशन कर रहे थे और अवैध संस्करणों में गैरकानूनी ढंग से सरकारी विज्ञापन छप रहा था, तीनों अखबारों के मालिक और संपादकों ने एक साजिश के तहत मुझे मिट्टी में मिला देने का षड़यंत्र किया। संयुक्त साजिश के तहत यदि कार्रवाई नहीं की जाती, तो प्रबंधन अपने मुंगेर कार्यालय के संबंधित कर्मियों को इतने वर्षों तक हनीमून मनाने की इजाजत नहीं देता।
 
पीटीआई की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही : दैनिक हिन्दुस्तान की अध्यक्ष श्रीमती शोभना भरतिया के इशारे पर पीटीआई न्यूज एजेंसी के दिल्ली और पटना के वरीय अधिकारियों की पहल पर पीटीआई के मुंगेर स्थित संवाददाता ने भी मेरे विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और दैनिक हिन्दुस्तान के मेरे विरूद्ध चल रहे दमनकारी अभियान में उप-कप्तान की भूमिका निभाई। पीटीआई के मुंगेर संवाददाता पेशे से अधिवक्ता हैं। इस प्रकार, दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन के खूनी-पंजा का प्रहार मुझपर लगातार होता रहा।
 
(शेष अगली किस्त में
 
यह रिपोर्ट बिहार में हिंदुस्‍तान के विज्ञापन घोटाले की पोल खोलने वाले मुंगेर के पत्रकार-एक्टिविस्‍ट श्रीकृष्‍ण प्रसाद की आपबीती है. श्रीकृष्‍ण प्रसाद लगातार कारपोरेट मीडिया और उनकी साजिशों से लड़ते-भिड़ते इस मुकाम पर पहुंचे हैं कि हिंदुस्‍तान के खिलाफ इस मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच हो रही है. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.
 
हिंदुस्‍तान के इस विज्ञापन घोटाले के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें – हिंदुस्‍तान का विज्ञापन घोटाला
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