अनारचारसिस ने कहा है कि लिखित कानून मकड़ी के जाल के समान है। यह कानून केवल गरीब और कमजोर को पकड़ने के लिए है। अमीर और शक्तिशाली लोग कानून को रौंद देते हैं। परन्तु इस कहावत को बिहार सरकार की पुलिस ने पूरी तरह झुठला दिया है। इस राज्य में कानून का शासन है और कानून के शासन में गरीब और अमीर पर कानून का डंडा समान रूप से चलता है।
बिहार में आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध चल रहा है युद्ध : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभयानन्द की अगुआई में बिहार में आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध शुरू की गई जंग का जीता-जागता परिणाम है मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445/2011 में दी गई ‘पुलिस पर्यवेक्षण रिपोर्ट।‘ पुलिस पर्यवेक्षण रिपोर्ट ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बिहार में कानून के पालन में मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक ने राज्य के पुलिस अधीक्षकों को ईमानदारी और स्वविवेक से काम करने की पूरी आजादी दे दी है। अगर ऐसी बात नहीं होती, तो मुंगेर के पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस मेसर्स हिन्दुस्ताव मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष और संपादकों के विरूद्ध पर्यवेक्षण रिपोर्ट जारी नहीं कर पाते।
पर्यवेक्षण रिपोर्ट में सूचक मंटू शर्मा के द्वारा मुंगेर न्यायालय मे दर्ज परिवाद-पत्र में लगाए गए सभी अभियोग को सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया सत्य घोषित कर दिया है। पुलिस ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में नामजद अभियुक्तों क्रमशः मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष एवं ऐडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतीया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420/471/476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट 1867 की धारा 8(बी), 14 और 15 के तहत लगाए गए सभी अभियोग को प्रथम दृष्टया सत्य पाया है। अब पुलिस इन सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाएगी। इस मुकदमे में अभियुक्त बच नहीं सके, पुलिस ने सूचक सहित चार गवाहों की गवाही भी मुंगेर न्यायालय में अभियोग के समर्थन में धारा 164 के अधीन करा चुकी है। अब इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध से जुड़े़ कांड मे पुलिस को न्यायालय में अभियोग-पत्र जमा करना है।
नींद उड़ गई : पुलिस पर्यवेक्षण रिपोर्ट जारी होने के बाद दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन और संपादकीय विभाग के लोगों की नींद उड़ गई हैं। दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़ा हर व्यक्ति नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के फरमान का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। सब एक ही प्रश्न कर रहे हैं -अब क्या होगा बिहार में दैनिक हिन्दुस्तान का?
बधाइयां : मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभयानन्द को जितनी भी बधाइयां दी जाए, वह कम ही होगी। विश्व के इतिहास में इंग्लैंण्ड के बाद पहला राज्य होगा बिहार जहां लगभग दो सौ करोड़ के विज्ञापन घोटाले में लिप्त शक्तिशाली मीडिया हाउस के विरुद्ध पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध पर्यवेक्षण रिपोर्ट जारी करने का दुस्साहसिक कदम उठाया है। शाबासी के पात्र मुंगेर के जांबाज और ईमानदार पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन और पुलिस उपाधीक्षक अरुण कुमार पंचालर भी हैं। इन दोनों पुलिस पदाधिकारियों ने जिस ईमानदारी, बारीकियों और अदम्य साहस के साथ इस मुकदमे में पुलिस अनुसंधान पूरा किया, वह अनुसंधान सीबीआई के अनुसंधान को भी मात दे दिया है। इन दो पुलिस पदाधिकारियों की पर्यवेक्षण रिपोर्ट मीडिया जगत के लिए इतिहास का पन्ना अब बन चुकी है। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि वे बिहार में ऐसा पुलिस अनुसंधान की व्यवस्था लागू करना चाहते हैं जहां आम जनता खुद कहे कि हमें सीबीआई से नहीं, बल्कि बिहार पुलिस से कांड का जांच कराया जाए।
न्यायालय की कार्रवाई अमर कहानी बन गई : दैनिक हिन्दुस्तान के 200 करोड़ के विज्ञापन घोटाला को उजागर करने में मुंगेर न्यायालय की कार्रवाई ऐतिहासिक कार्रवाई के रूप में याद रहेगी। सूचक मंटू शर्मा के परिवाद-पत्र पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एमके सिन्हा ने ही मुंगेर की कोतवाली पुलिस को पूरे प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज करने और अनुसंधान पूरा कर रिपोर्ट न्यायालय को सौंपने करने का आदेश दिया था। न्यायालय का यह आदेश ऐतिहासिक आदेश माना जा रहा है।
डीएन गौतम की याद ताजा हो गई : मुंगेर के आरक्षी अधीक्षक पी. कन्नन की कार्रवाई नेवर्ष 1985 में मुंगेर में पदस्थापित युवातुर्क पुलिस अधीक्षक डीएन गौतम की याद को ताजा कर दी है। जांबाज और ईमानदारी के लिए चर्चित पुलिस अधीक्षक डीएन गौतम ने मुंगेर में अपने कार्यकाल में देश के चर्चित उद्योगपति के कार चालक लक्ष्मी पोद्दार की हत्या के मामले में उद्योगपति को गिरफ्तार कर जेल भेजने का दुस्साहस किया था। श्री गौतम बिहार के पुलिस महानिदेशक के पद को सुशोभित कर अवकाश ग्रहण कर चुके हैं।
दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाला का पर्दा किसने और कब उठाया? दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले को न्यायालय और पुलिस के समक्ष प्रमाणित करने में बिहार सरकार के वित्त अंकेक्षण विभाग की जिस रिपोर्ट ने अह्म भूमिका निभाई है, उस अंकेक्षण रिपोर्ट को आज से मैं हू-ब-हू रिपोर्ट के इंटरनेट पाठकों के समक्ष पेश कर रहा हूं। इस रिपोर्ट ने न केवल दैनिक हिन्दुस्तान के बिहार के विज्ञापन घोटाले को उजागर किया है, वरन इस रिपोर्ट ने देश के उन तमाम दैनिक अखबारों के विज्ञापन घोटालों की व्यापक जांच का रास्ता खोल दिया है ।
अनूसूची अ-प्रपत्र 6
वित्त/ अंकेक्षण/विभाग, बिहार,पटना
कार्यालय
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग,बिहार,पटना
विज्ञापन वर्ष 2002-03 एवं 2003-04।
अंकेक्षण आपत्ति विवरण।
(उत्तर एक सप्ताह के भीतर देना है)
हिन्दुस्तान दैनिक का अनियमित भुगतान रुपया 1,00,32,272.10 पैसा (वसूली योग्य)
विज्ञापन भुगतान संबंधी संचिका विज्ञापन। लेखा-42-7/2003 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि हिन्दुस्तान दैनिक द्वारा मुजफफरपुर एवं भागलपुर मुद्रण केन्द्रों को स्वतंत्र प्रकाशन बताकर उनको विज्ञापन के लिए वर्ष 2002-03 और 2003-04 में कुल 1,00,32,272-16 पैसा का भुगतान प्राप्त किया गया है। संचिका से स्पष्ट होता है कि मुजफफरपुर एवं भागलपुर मुद्रण केन्द्र कोई स्वतंत्र प्रकाशन/संस्करण नहीं है वरन हिन्दुस्तान दैनिक पटना संस्करण के कुल प्रकाशित ग्यारह संस्करणों (क्षेत्रवार) में से ही है तथा सबके लिए एक ही पंजीयन संख्या- 44348/1986 /पटना। है। मुजफफरपुर एवं भागलपुर के लिए अलग कोई प्रिंट लाइन नहीं है। अतः जब तक किसी मुद्रण केन्द्र का अलग पंजीयन एवं अलग प्रिंट लाइन नहीं होता तबतक उसे स्वतंत्र प्रकाशन नहीं समझा जाएगा। हिन्दुस्तान पटना के अतिरिक्त मुजफफरपुर एवं भागलपुर डेट लाइन से कोई प्रकाशन नहीं होता। इस बात की पुष्टि हिन्दुस्तान दैनिक के प्रतिनिधियों द्वारा भी किया गया जब विभाग ने स्वतंत्र प्रकाशन मानकर उन्हें अलग विज्ञापन देने को तैयार हुआ, तब उन्होंने उसे स्वतंत्र प्रकाशन न कहकर पटना संस्करण के ही पंजीयन एवं मास्ट हेड एक ही है। अतः अलग विज्ञापन उन्हें भेजना में तकनीकी कठिनाई है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं.09470400813 के जरिए किया जा सकता है.






