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हिन्दी अखबारों में अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से क्षुब्ध हैं सुदर्शन

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रमुख के एस सुदर्शन ने मध्यप्रदेश जैसे हिन्दीभाषी इलाकों से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों के बढ़ते उपयोग पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि इससे भावी पीढ़ी की भाषा भ्रष्ट होने का खतरा है।  सुदर्शन ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में कहा, ‘‘हिन्दीभाषी क्षेत्रों, जिसमें मध्यप्रदेश भी शामिल है, से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों के बढ़ते उपयोग से वह बेहद चिंतित हैं’’। 

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रमुख के एस सुदर्शन ने मध्यप्रदेश जैसे हिन्दीभाषी इलाकों से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों के बढ़ते उपयोग पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि इससे भावी पीढ़ी की भाषा भ्रष्ट होने का खतरा है।  सुदर्शन ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में कहा, ‘‘हिन्दीभाषी क्षेत्रों, जिसमें मध्यप्रदेश भी शामिल है, से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों के बढ़ते उपयोग से वह बेहद चिंतित हैं’’। 

उन्होने कहा कि हिन्दी की सामान्य बोलचाल में अंग्रेजी के जिन शब्दों को स्वीकार कर लिया गया है, समाचार लेखन में उनके उपयोग तक तो वह सहमत हैं, लेकिन ऐसे अंग्रेजी शब्द जिनका हिन्दी में बेहतर और सुलभ पर्यायवाची उपलब्ध हंै, उन्हें पाठकों को परोसना वह उचित नहीं मानते हैं। इससे भावी पीढ़ी की भाषा भ्रष्ट हो रही है और यह स्थिति खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। 
 
टेलीविजन धारावाहिक ‘बालिका वधू’ एवं ‘उतरन’ के नियमित दर्शक आरएसएस के पूर्व प्रमुख ने कहा कि इनमें प्रयुक्त हिन्दी का स्तर ठीक है, लेकिन धारावाहिकों के अंतराल में दिखाए जाने वाले विज्ञापनों में हिन्दी तो लचर होती ही है, साथ ही इन्हें परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता।  उन्होंने कहा कि देश में अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर हर देशवासी को अपनी मातृभाषा के अलावा एक भारतीय भाषा भी अवश्य सीखनी चाहिए। उन्होंने देशवासियों से यह भी अपील की कि वे हिन्दी का उपयोग करते समय अंग्रेजी का प्रयोग नहीं करें, तो बेहतर होगा। सुदर्शन ने हिन्दी को सबसे समृद्ध भाषा बताते हुए कहा कि अंग्रेजी में जहां मात्र दो से ढाई लाख शब्दों का भंडार है, हिन्दी में पचास लाख से अधिक शब्द हैं। 
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