: लारी ने की नौकरी से तौबा : कंप्यूटर लिट्रेट न होने का आरोप : वाराणसी: कर्मचारियों की कत्लगाह बनते जा रहे हिन्दुस्तान के वाराणसी कार्यालय में दो वरिष्ठ लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जबकि एक ने खुद ही नौकरी छोड़ने का फैसला करते हुए प्रबंधन को नोटिस दे दी है। बताया जाता है कि नोटिस देने वाले पत्रकार को अपने नये कार्यदायित्व रास नहीं आ रहे थे। साहित्यिक मिजाज के सियाराम यादव और अरविंद चौबे का नाम अब हिन्दुस्तान वाराणसी के इतिहास में दर्ज होने जा रहा है।
प्रबंधन ने इन दोनों को नौकरी तलाश लेने का नोटिस पकड़ाया है। प्रबंधन का तर्क है कि काफी कोशिशों के बावजूद इन दोनों को वह कम्प्यूटर सिखा नहीं पाया। ऐसे में इन लोगों को नौकरी में बनाये रखने का कोई औचित्य ही नहीं है। खासबात यह है कि यह दोनों ही लोग अपने काम में माहिर हैं। अरविंद चौबे को संपादन और पेज मेकिंग में महारत है जबकि सियाराम यादव साहित्यिक अभिरूचि के चलते अपना बनारस नाम से हर हफ्ते एक परिशिष्टि निकालते रहे हैं। इन दोनों की बीस साल से भी ज्यादा समय से प्रबंधन सेवाएं ले रहा था। हैरत की बात है कि इस बारे में जब एचआर से सम्पर्क किया गया तो श्री लोकनाथ ने ऐसी किसी भी कार्रवाई से साफ इनकार कर दिया।
उधर असद लारी ने खुद ही नौकरी छोड़ने का नोटिस प्रबंधन को दे दिया है। कहा जाता है कि प्रबंधन ने उन्हें सीट छोड़कर फील्ड पर जाने का निर्देश दिया था। कहा गया था कि वे चूंकि पिछले लम्बे समय से चीफ रिपोर्टर हैं लेकिन एक भी खबर उनके द्वारा नहीं दी गयी है, इसलिए वे अब खबरों की लिस्ट तैयार करने के बजाय खबर खोदने-खोजने में जुटें। उधर कुछ लोगों के अनुसार लारी ने अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए खुद ही नौकरी छोड़ देने का फैसला किया है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






