हिमाचल प्रदेश के मध्य में बसे बिलासपुर को हिमाचल का दिल तो कहा ही जाता है लेकिन इसे संघर्षों की धरती भी कहा गया है. विस्थापन के बाद कई ऐसे संघर्ष यहां पर हुए हैं जिनसे लोगों को लाभ कम और हानि अधिक हुई है. राजनीति हो या कोई भी क्षेत्र, गुटबाजी ने बिलासपुर को हमेशा मात दी है. अब पत्रकारिता में भी तीन गुट हो गए हैं. लोग इस फूट का लाभ उठा रहे हैं.
एक गुट का नेतृत्व 1994 से लगातार बिना चुनाव करवाए पत्रकार महासंघ के राज्य अध्यक्ष पद पर बिराजमान पंडित जय कुमार कर रहे हैं तो दूसरे गुट का नेतृत्व हिमाचल पत्रकार फेडेरेशन के राज्य महासचिव कुलदीप चंदेल कर रहे हैं. तीसरा गुट जर्नलिस्ट फैडेरेशन भी बन चुका है और उसका नेतृत्व हिमाचल के प्रदेश महासचिव प्रविंद्र शर्मा के पास है.
जिला मुख्यालय पर प्रेस क्लब चल रहा है, यह अलग बात है कि क्लब के लिए किराए पर लिए गए भवन का ताला कभी नहीं खुलता. प्रेस क्लब के प्रधान संजय शर्मा हैं. बिलासपुर पत्रकार परिषद का भी गठन हो चुका है जिसके प्रधान अजय कुमार उपाध्याय हैं. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि सकारात्मक पत्रकारिता होने के स्थान पर गुटबाजी हो रही है और एक दूसरे की टांग खिचाई अधिक हो रही है.
आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग परेशान है कि पत्रकारिता के माध्यम से जहां बिलासपुर की तरक्की होनी चाहिए पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा. पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन बिलासपुर में यह स्तंभ बैसाखियों के सहारे खड़ा है. समस्याओं के अलावा स्वामी भक्ति अधिक हो रही है और कई बार तो पत्रकारिता को छोड़ने को ही मन करता है. न जाने कब सुधरेंगे हम.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





