हिमाचल प्रदेश से संचालित होने वाले ‘सिटी चैनल’ के अंडरकवर रिपोर्टर संजीव शर्मा द्वारा किए गये मानव तस्करी के खुलासे से हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता संजीव रंजन औझा बोखला चुके है, कैमरे के सामने अपनी जवाबदेही तय करने की जगह उलटा स्टिंग आपरेशन को अंजाम देने वाले पत्रकार को ही धमकाया गया। दरअसल हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में लड़कियां और महिलाओं को मानव तस्कर नीलाम करते है, खरीदारी के लिए हरियाणा से आने वाले खरीदारों को ये लड़कियां नीलाम की जाती है।
करीब दस दिन के अन्दर क्राइम रिपोर्टर संजीव शर्मा ने आधा दर्जन दलाल और महिला दलालों को खुफिया कैमरे में सौदेबाजी करते हुए दिखाया है। इस आपरेशन कलयुग में रिपोर्टर ने उस दलाल को भी बेनकाब किया है, जो पुलिस के साथ मिलकर मानव तस्करी का खेल खेलता है, यही नहीं नाबालिग लड़कियों को बिकते हुए भी दिखाया है। इतना ही नहीं एक ऐसा दलाल भी खुफिया कैमरे का शिकार बना जिसके बेटे खुद हिमाचल पुलिस में कार्यरत है, यही नहीं एक दलाल ने तो महिला पुलिसकर्मी तक का सौदा करने की बात खुफिया कैमरे पर कबूली।
दरअसल ख़बर का प्रोमों चैनल पर चलने के बाद हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा घन्वेश्वरी ठाकुर ने कड़ा रूख लिया, लगे हाथ उन्होने डीजीपी हिमाचल प्रदेश संजय कुमार और जिला सिरमौर की एसपी सुमैधा द्विवेदी को फटकार लगाई, साथ ही स्टिंग आपरेशन पर भी जवाब मांगा। वहीं दूसरी तरफ ये स्टिंग आपरेशन पूरा होने के बाद सिटी चैनल के रिपोर्टर लगातार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संपर्क में थे, लेकिन कैमरे के सामने कोई भी आने को तैयार नहीं था।
तारीख 30 अक्तूवर 2013 को सीआईडी क्राइम डीआईजी ने सिटी चैनल को स्टिंग सहित अपने आफिस में बुलाया और आश्वासन दिया कि वो भी इस स्टिंग को लेकर गंभीर है, साथ ही सीआईडी की तरफ से कहा गया कि वो इस आपरेशन को सिटी चैनल के रिपोर्टर के साथ करना चाहते है ताकि दलालों को पकड़कर सलाखों के पीछे ले जाए और हिमाचल में लड़कियों को बिकने से बचाया जा सके। यही नही सीआईडी क्राइम ने आने वाले अगले महीने की 4 तारीख भी तय की।
अंडरकवर रिपोर्टर ने सीआईडी की इस दलील पर भरोसा करते हुए हामी भर दी। इसके साथ ही सीआईडी के डीआईजी ने, पुलिस प्रवक्ता को कहा कि वो रिपोर्टर के कार्य की कदर करते हुए उन्हे इंटरव्यू दे दें। पुलिस प्रवक्ता ने रिपोर्टर को 3 बजकर 15 मिनट में मिलने को कहा जिस पर तय समय सीमा पर रिपोर्टर एक कैमरापर्सन और सहयोगी, अंडरकवर रिपोर्टर के साथ मिलने पहुंचे।
कुछ भी बोलने से पहले आईपीएस आफिसर बिना स्टिंग को देख बोलने से बचते रहे, स्टिंग आपरेशन का प्रोमो देखने के बाद उन्होंने लगे हाथ डीजीपी हिमाचल प्रदेश संजय कुमार को फोन करके कहा कि मानव तस्करी पर सिटी चैनल ने बहुत बड़े खुलासे को अंजाम तक पहुंचाया है। जो लोग दलाली करते हैं उनके साथ हमारे कुछ पुलिस वाले भी शामिल हैं, डीजीपी ने फोन पर ही संजीव रंजन को तुरंत कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
अचानक कुछ देर पहले स्टिंग आपरेशन की तारीफ करने वाले आफिसर, रिपोर्टरों को ही खरी-खोटी सुनाने लगे, इन शब्दों पर जब रिपोर्टर ने विरोध किया तो, अपना आपा खोते हुए आईपीएस आफिसर ने रिपोर्टर का कैमरा ये कहकर छीन लिया कि रिपोर्टर ने उसे कैमरे में कैद किया है। यहीं नही, कैमरे के अन्दर लगी कैसेट को भी तोड़ दिया। उस केबिन के अन्दर कोई भी पुलिसकर्मी या सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था तब भी रिपोर्टर की तलाशी आईपीएस आफिसर ने ली, वर्दी और अपने पद का रोब दिखाते हुए रिपोर्टर को धमकाया भी गया और अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा गया।
इसके साथ ही भाषा आरोप लगाने की सारी मरियादा तोड़ते हुए उक्त आफिसर ने जहां पत्रकारों को गालियों से नवाजना शुरू कर दिया तो वहीं, पुलिस स्टेशन छोटा शिमला थाना को भी सूचित किया गया। दरअसल उक्त आफिसर को इस बात को लेकर शक हुआ कि रिपोर्टर ने उसे कैमरे में कैद कर लिया है। रिपोर्टर और कैमरापर्सन के साथ-साथ एक और टीम सहयोगी को भी पुलिस थाने लेकर आ गई, अधिकारी की तरफ से पुलिस पर दबाव बनाया गया कि वो रिपोर्टरों के खिलाफ मामला दर्ज करें। इस बात की ख़बर जैसे ही मीडिया को लगी तो करीब 50 मीडियाकर्मी पुलिस स्टेशन पहुंच गये।
मीडिया की दखलअंदाजी के बाद जहां हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता अपना मुंह छिपाता नजर आया तो वहीं पुलिस ने भी मामला दर्ज करने से तौबा कर दी, क्योंकि पुलिस की हकीकत बेनकाब करने के लिए स्टिंग आपरेशन काफी था। इसके साथ ही शिमला के मीडियाकर्मियों ने फैसला लिया है कि उक्त आईपीएस आफिसर के खिलाफ प्रदेश के पुलिस महानिदेश संजय कुमार से सिटी चैनल के रिपोर्टर के साथ हुए अभद्र बर्ताव की शिकायत करेंगे साथ ही उक्त आफिसर को तत्काल प्रभाव से प्रवक्ता पद से हटाने की मांग भी की जाएगी अगर पुलिस की तरफ से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जाता तो हिमाचल के मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।






