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हेमवती नंदन बहुगुणा के आखिरी समय का दर्द और नए सीएम

बात करीब ढाई दशक पहले की है. स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा तब लोकदल में थे. हरियाणा के दिग्गज नेता देवी लाल उन्हें दगा दे चुके थे और उन्हें दिल की बीमारी ने घेर लिया था. मैंने तब हिंदुस्तान अखबार में उप सम्पादक के रूप में ज्वाइन किया था. बहुगुणाजी का आवास लोदी कालोनी नई दिल्ली में था. जहां मेरा काफी आना-जाना था. बहुगुणा जी कभी-कभी घंटों लोगों से बातें  करते थे. डाक्टरों ने उन्हें शायद दूसरी बार दिल के आपरेशन की सलाह दे दी थी.

बात करीब ढाई दशक पहले की है. स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा तब लोकदल में थे. हरियाणा के दिग्गज नेता देवी लाल उन्हें दगा दे चुके थे और उन्हें दिल की बीमारी ने घेर लिया था. मैंने तब हिंदुस्तान अखबार में उप सम्पादक के रूप में ज्वाइन किया था. बहुगुणाजी का आवास लोदी कालोनी नई दिल्ली में था. जहां मेरा काफी आना-जाना था. बहुगुणा जी कभी-कभी घंटों लोगों से बातें  करते थे. डाक्टरों ने उन्हें शायद दूसरी बार दिल के आपरेशन की सलाह दे दी थी.

एक दिन उत्तराखंड की समस्याओं पर चर्चा के दौरान बेहद गंभीर होकर बोले – मैं ऐसे समय पहाड़ में आया जब मेरे पास ज्यादा समय नहीं है. यदि मेरे पास 20 साल का समय होता तो मैं उत्तराखंड को विकास की ऐसी दिशा दे जाता कि आने वाली पीढि़याँ याद करती. कुछ देर मौन रहे फिर बोले – आज भी मेरे सपनों में मुझे गाँव में रहने वाली मेरी बड़ी दीदी दिखाई देती है. कहीं पहाड़ी से सर पर लकड़ी व घास का बोझ लेते हुए.. अचानक मुझ से सवाल करती है…हेमू…(शायद काडू).. तू इतना बड़ा नेता बनाता है पर तू हमारे सर से ये बोझ नहीं उतार पाया, क्या तू ये बोझ कभी हमारे सर से उतार पायेगा? और यह कह कर वह पहाड़ी पगडंडी पर आगे बढ़ जाती है!!

बहुगुणा जी भावुक होकर कहने लगे कि यह सपना मैं कई बार देखा चुका हूँ. मुझे आज भी याद है… हर पल उत्साह से लबरेज बहुगुणाजी का गला तब भर आया था और वहां बैठे लोग भी भावुक हो गये थे. इस पर मैंने कहा – बहुगुणा जी अभी तो आपने देश का प्रधानमंत्री बनना है? इस पर वे बोले – बेटे, मेरे पास अगर समय होता तो मैं इंडियन पॉलिटिक्स को नई दिशा दे जाता.. पर शरीर साथ नहीं दे रहा है.

एक दिन बोले – ब्रह्मदत्त क्या कर रहे हैं? (तब पं. ब्रह्मदत्त टिहरी से सांसद और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री थे.)… उन्हें कहना कि पहाड़ के लोग गरीब होते हैं जो मांगे उसे गैस कनेक्शन जरूर दे देना. बेचारे आज भी दिल्ली में अधिकाँश लोग अंगीठी में खाना पकाने को मजबूर हैं! मैंने दूसरे दिन यह सन्देश हू-ब-हू ब्रह्मदत्त जी को दे दिया. उसके बाद ब्रह्मदत्त जी ने लोगों को खूब कनेक्शन बांटे. खुद मैंने ऐसे-ऐसे पत्रकारों को गैस कनेक्शन दिलवाए, जो आज देश के नामी गिरामी लोगों की सूची में हैं. कुल मिलाकर बहुगुणा जी हिमालय के विकास के बड़े इंजीनियर थे. बड़े से बड़े पहाड़ के विशेषज्ञ भी उनकी बात विद्यार्थियों  की तरह सुनते थे.

आज नये मुख्यमंत्री के रूप में उनके पुत्र विजय बहुगुणा के हाथ में उत्तराखंड  की कमान आ गई है. वे बड़े बाप के बेटे हैं. दूसरी बार टिहरी गढ़वाल से सांसद हैं पर लोकसभा के अन्दर आज तक उत्तराखंड की किसी भी समस्या को उन्हें प्रभावी ढंग से उठाते हुए नहीं देखा, पर अब उन पर उत्तराखंड के भविष्य की जिम्मेदारी आ गई है. हर पहाड़वासी को उम्मीद करनी चाहिए कि वे बहुगुणा के सच्चे राजनीतिक वारिस सिद्ध होंगे. और वे हमारी तमाम शंकाओं को झुठला देंगे. नये मुख्यमंत्री को हमारी शुभ कामना.

लेखक विजेंद्र रावत उत्‍तराखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

 

 
 

 
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