छत्तीसगढ़ में अब अखबार बांटने वाले हॉकरों का भी बीमा करवाया जाएगा। इन्हें अपने काम में सहूलियत के लिए राज्य सरकार की ओर से नि:शुल्क साइकल भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार ने अखबार हॉकर सहित नौ अन्य व्यवसायों से जुड़े असंगठित श्रमिकों को असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के दायरे में लाते हुए इन्हें विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की है। श्रम विभाग द्वारा नट-नटनी, देवार, शिकारी अन्य घुमंतू जातियों, खैरवार, रसोइयों, हड्डी बीनने वालों, काष्ठगारों में काम करने वाले हमालों और समाचार पत्र बांटने वाले हॉकरों को असंगठित कर्मकार के रूप में अधिसूचित किया गया है।
श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के उत्थान के लिए असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा मंडल का गठन करते हुए 40 प्रकार के काम-धंधों से जुड़े असंगठित श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गयी हैं। श्री साहू ने बताया कि इनमें धोबी, दर्जी, माली, मोची, नाई, बुनकर, मछुआरे, रिक्शा चालक, हाथ ठेला चालक, घरेल कामगार, कचरा बीनने वाले, फुटपाथ व्यापारी, हमाल-कुली रेजा, फेरी वाले, सफाई कामगार, आटो चालक, सब्जी फल विक्रेता, जनरेटर लाइट उठाने वाले, मोटर साइकल मरम्मत करने वाले, गैरेज मजदूर, कैटरिंग में कार्य करने वाले, परिवहन में लगे मजदूर, ढोल बाजा बजाने वाले, वनोपज संग्रहण में लगे मजदूर, टेंट हाउस काम करने वाले, दाई का काम करने वाली महिलाएं, तांगा और बैलगाड़ी चलाने वाले, तेल पेरने वाले, अगरबत्ती-मोमबत्ती बनाने वाले और चाय-चाट ठेला लगाने वाले शामिल हैं।
असंगठित क्षेत्र के इन श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा मंडल के माध्यम से जीवन बीमा और चिकित्सा सहायता योजना के साथ ही साइकल सहायता, साइकल रिक्शा सहायता और सिलाई मशीन सहायता योजना का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नौ नये व्यवसायों से जुड़े श्रमिकों को असंगठित श्रमिक के रूप में अधिसूचित किए जाने से अब 49 प्रकार के व्यवसाय करने वाले मजदूरों को योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। श्री साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में निर्माण क्षेत्र के अलावा अन्य असंगठित क्षेत्रों में पचास लाख से अधिक मजदूर कार्यरत हैं। राज्य सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में दो लाख 15 हजार असंगठित श्रमिकों का पंजीयन कर उन्हें परिचय पत्र देने का लक्ष्य रखा गया है।
आरके गांधी की रिपोर्ट.





