जयललिता ने विज्ञापन पर फूंक डाले 15 करोड़ रुपये

नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने अपनी सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर उसके महिमा मंडन में 15 करोड़ रुपये खर्च कर डाले हैं। यह राशि प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों को दिए विज्ञापनों पर खर्च की गई है। देश के करीब-करीब सभी प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों के 16 मई, 2012 के अंक में मुख्य पृष्ठ पर जयललिता ही छाई हैं। कुछ अखबारों में चार पेज के भी विज्ञापन दिए गए हैं। अंग्रेजी अखबारों के पहले पेज पर जयललिता की आदमकद फोटो के साथ 'वन ईयर ऑफ एचीवमेंट्स : हंड्रेड ईयर्स लीप फारवर्ड' की कैच लाइन भी है। सूत्रों के अनुसार इस विज्ञापन अभियान के लिए 25 करोड़ का बजट तय किया गया था।

कई समाचार पत्रों में जयललिता को उनके चुनावी वादों जैसे चावल के मुफ्त वितरण, मिक्सर ग्राइंडर्स, गायें-बकरियां और बेटी की शादी के लिए मंगलसूत्र देते हुए चित्रों को भी दर्शाया गया है। विज्ञापनों के माध्यम से जयललिता ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार गैर कांग्रेसी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। चूंकि जयललिता सरकार ने अपनी उपलब्धियों का बखान करने वाले विज्ञापन चेन्नई के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलूर के भी अंग्रेजी अखबारों में दिए हैं इसलिए यह माना जा रहा है कि वह खुद को राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभारना चाहती हैं। एक साथ इतनी बड़ी राशि विज्ञापन पर खर्च करने के मामले में जयललिता ने कई बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। 2007 में वोडाफोन ने जब भारत में कदम रखा था तो उसने एक दिन में मीडिया कवरेज पर दस करोड़ रुपये खर्च किए थे।

जयललिता के इस कदम पर द्रमुक प्रमुख करुणानिधि की बेटी कनीमोरी ने कहा है कि ऐसे विज्ञापन तो तब जारी किए जाने चाहिए जब आपने कुछ हासिल किया हो। मुझे समझ नहीं आया कि जयललिता ने एक साल में क्या हासिल किया है? भाकपा नेता गुरुदास गुप्ता के अनुसार, यह संसाधनों की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं। विज्ञापनों पर जयललिता सरकार की शाह खर्ची ने सोशल साइट्स पर भी बहस छेड़ी है। ट्विटर पर जयललिता के इस कदम को अतिरेक बताते हुए आलोक जोशी ने ट्वीट किया है, 'आज के अखबार के बॉटम को तीन दक्षिण भारतीयों ने काफी भारी कर दिया-जयललिता, ए राजा और येद्दयुरप्पा।' हर्ष शाह ने ट्वीट किया, 'तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता आज भारत के सभी राष्ट्रीय अखबारों में हैं। यह पैसों की बर्बादी है।' (साभार : जागरण)

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