1977 में रजत शर्मा और अरुण जेटली ने हमारे ऊपर यही आरोप लगाए थे : चंचल

Chanchal Bhu : बलात्कार? सोचने दीजिए. उस वक्त मौकये वक्त पर प्रतिरोध नहीं हुआ क्योंकि जिसके साथ यह हुआ उसे होश ही नहीं था कि कुछ ऐसा भी हो रहा है जिसे बलात्कार कहा जाय. सो न किसी तरह की तकलीफ हुई न ही निषेध. बल्कि … उसे कहना गैर जरूरी है. 'काम' के इस खेल में कई ऐसे सवाल उठ रहे हैं जो फिर पुरुष प्रवृति को मौक़ा दे रही है.

संघियों ने अपना करतब दिखा दिया. 'वाम' वाम को कैसे काटता है खुर्शीद अनवर की मौत ने उसे उघार दिया. खेल खेला उस गिरोह ने जिसे औरत कत्तई नहीं पसंद है.

अब एक समाजवादी का बयान दर्ज किया जाय- मोहतारिमा मधुकिश्वर जी, जनाब रजत शर्मा जी व संघी गिरोह यह जान लो बलात्कार तुम्हारे दर्शन और जीवन पद्धति का एक हिस्सा है जिसे तुम 'शादी' के घेरे में जायज बोलते हो. उस बलात्कार पर भी तो बहस करो. 1977 में आपने (रजत शर्मा, अरुण जेटली ने) हमारे ऊपर यही आरोप लगाए थे. जवाब मिला था.

खुर्शीद अनवर को दुहराया न जाय. यह अपील है. कई लोग खुर्शीद से शिकायत कर रहे हैं कि लड़ना चाहिए था. उनसे अदब से कह रहा हूँ खुर्शीद ने छलांग लगा कर लड़ाई का लंबा फासला तय कर दिया है, बाद बाकी आप जानें. एक हिदायत दे दूं, संघियों का यह खेल ज्यादा दूर नहीं जायगा, लेकिन खुर्शीद अनवर भी तो नहीं लौट पायेंगे.

नेता, चित्रकार, साहित्यकार, चिंतक, पत्रकार चंचल के फेसबुक वॉल से.

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