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ए2जेड में पत्रकारों का बुरा हाल, पीने को पानी तक नहीं

इस वेब साइट के माध्‍यम से हम चाहेंगे कि हमारा दर्द सबके सामने आए। ए2जेड न्यूज चैनल का हालात खस्ता है। यहां पत्रकारों का जितना शोषण होता है शायद ही कहीं और होता होगा। ऑफिस की एचआर से लेकर आफिस मैनेजमेंट तक यहां कर्मचारियों का खून चूसने में लगे हुए हैं। यहां 10 से 11 घंटे की जबरन शिफ्ट करवाई जाती है। सैलरी इंनक्रीमेंट तो दूर की बात सैलरी ही टाईम पर मिल जाए तो भी बहुत है। अटकलें तो ये भी लगाई जा रही हैं कि चैनल बंद होने की कगार पर है। ऑफिस में पीने को पानी तक नहीं मिलता।

इस वेब साइट के माध्‍यम से हम चाहेंगे कि हमारा दर्द सबके सामने आए। ए2जेड न्यूज चैनल का हालात खस्ता है। यहां पत्रकारों का जितना शोषण होता है शायद ही कहीं और होता होगा। ऑफिस की एचआर से लेकर आफिस मैनेजमेंट तक यहां कर्मचारियों का खून चूसने में लगे हुए हैं। यहां 10 से 11 घंटे की जबरन शिफ्ट करवाई जाती है। सैलरी इंनक्रीमेंट तो दूर की बात सैलरी ही टाईम पर मिल जाए तो भी बहुत है। अटकलें तो ये भी लगाई जा रही हैं कि चैनल बंद होने की कगार पर है। ऑफिस में पीने को पानी तक नहीं मिलता।

हाल की ही घटना है कि पानी ना होने के कारण नाइट शिफ्ट में काम करने वाले एक कर्मी को चक्कर आ गए और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। नियम कानून के नाम पर रोज यहां पत्रकारों को बेइज्जत किया जा रहा है। ए2जेड में उच्च पदों पर बैठे लोग भी यहां काम करने वालों के लिए कुछ नहीं करते। ना तो उनके हितों के लिए कुछ सोचा जाता है और ना ही उनके भविष्य के बारे में। चैनल में एक साल बाद तो कर्मियों को आई कार्ड मिला है लेकिन उसकी भी वैलिडिटी 6 महीने की रखी गई है। आई कार्ड ना होने के कारण नाइट में काम करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन यहां की एचआर को इन चीजों की सुध तक नहीं, यहां की एचआर सिर्फ बॉस की लाबिंग करना जानती है। 

बात की जाए यहां के सीईओ वेद शर्मा की, तो वो जनाब भी किसी से कम नहीं। वो हमेशा एक ही प्रयास में लगे रहते हैं कि चैनल को बिना कर्मचारियों और बिना पैसे के मुनाफे में कैसे लाया जाए। लेकिन अगर यहां कोई अपनी प्रतिभा दिखाना चाहे तो साहब का पहला सवाल ये ही होता है कि आप किस की रेफरेंस से आए हैं। क्या टीवी चैनलों में अब पत्रकारिता की जगह रेफरेंस ने ले ली है? यहां एंकर बनने के लिए हुनर नहीं रंग रूप की मांग की जाती है। इतना छोटा चैनल होने के बाबजूद ये राजनीति का अखाड़ा बन गया है। और सही मायने में तो यहां के उच्च अधिकारी ही राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

ए2जेड चैनल के एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र. अगर किसी को इस बारे में कुछ कहना है तो वो bhadas4media@gmail का सहारा ले सकता है.

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