'विष्णु खरे की कविताओं की जिज्ञासा सत्य का अन्वेषण करती हैं। ये आम आदमी की कविताएं हैं। पर खरे जी की कविताएं यातनाओं और पीड़ाओं को सहना मात्र ही नहीं है, ये आम आदमी को अमूर्त नहीं करती, ये कविताएं उसे जीवंत करती हैं। 'महाभारत' जैसे रूपक उनकी रचनाओं को कालजयी साहित्य की श्रेणी तक ले जाती हैं,' ये भावनाएं हैं मराठी के वरिष्ठ कवि डॉ. चंद्रकांत पाटील की। इस वर्ष हिंदी के विख्यात कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री विष्णु खरे को प्रसिद्ध साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'परिवार' का 'परिवार पुरस्कार समारोह के अध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत पाटील के हाथों प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप श्री खरे को 1 लाख रुपये की धनराशि दी गई।
सम्मान के प्रति अपनी विशिष्ट शैली में भावनाएं व्यक्त करते हुए श्री विष्णु खरे ने कहा कि मैं हर साल एक बार महाभारत जरूर पढ़ता हूं और कृष्ण को सबसे बड़ा चरित्र मानता हूं। उन्होंने कहा कि मैं आज की कविता लिखने पर भरोसा करता हूं। जो कविता आज की नहीं है वह कभी की नहीं है। श्री खरे ने अपने खास अंदाज में कविताएं सुनाई, जिन्हें श्रोताओं की बहुत दाद मिली। उन्होंने 'गंग महल', 'आखिर वे मरने के लिए कहां जाती हैं', इमरजेंसी पर आधारित 'डरो', 'वृंदावन की विधाएं' और 'बेटी' कविताएं सुनाईं।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कार्याध्यक्ष नन्दकिशोर नौटियाल ने स्वागतभाषण में 'परिवार' की गतिविधियों से परिचित कराया। निर्णायक मंडल के प्रतिनिधि के रूप में श्री नन्दलाल पाठक ने कहा कि विष्णु खरे की कविता से गुजरना एक श्रेष्ठ अनुभव होता है। इस अवसर पर श्री सुरेशचंद्र शर्मा के संपादन में प्रकाशित 'परिवार काव्य स्मारिका' का विमोचन भी हुआ। वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव ने श्री खरे की रचनाओं को बेहद असरदार और अर्थ से भरा बताया। 'परिवार' के संस्थापक अध्यक्ष श्री रामस्वरूप गाडिया ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सोमा बनर्जी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि-पत्रकार हरिमृदुल ने विष्णु खरे के कवि व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विष्णु खरे अपनी खास तरह के शिल्प के कवि हैं, जिसे कोई दूसरा नहीं साध सकता। कार्यक्रम का संचालन देवमणि पांडेय ने किया। साभार : एनबीटी






