सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड देने तथा केंद्र सरकार की अधिसूचना के खिलाफ दायर अखबार मालिकों की याचिका 31 जुलाई 2012 तक के लिए टाल दी है. अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा. सात नवम्बर को इस मामले की सुनवाई करते हुए तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि राजस्थान पत्रिका ने भी इस मामले में याचिका दायर की है, इसके चलते इसकी सुनवाई अब 31 जुलाई तक स्थगित की जाती है.
अखबार मैनेजमेंट की तरफ से लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने जस्टिस दलवीर भंडारी, जस्टिस टीएस ठाकुर एवं जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच से कहा कि इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की जाए. वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में अक्टूबर में आर्डर पास करके 7 दिसम्बर को फाइनल सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी, जिसे अब 31 जुलाई 2012 तक के लिए टाल दिया गया है, जिससे अखबार मालिक असमंजस की स्थिति में हैं.
इस पर जस्टिस दलबीर भंडारी ने कहा कि अक्टूबर वाले आदेश के बाद राजस्थान पत्रिका ने भी रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसके चलते याचिका आज लिस्टेड नहीं हो पाई है. इस वजह से इस सुनवाई को अगली तारीख तक स्थगित किया जा रहा है. इस मुद्दे पर राजस्थान पत्रिका से पहले आनंद बाजार पत्रिका के मालिकान ने वेज बोर्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद टेलीग्राफ की प्रकाशक कंपनी एबीपी लिमिटेड, टाइम्स आफ इंडिया की प्रकाशक कंपनी बेनेट एंड कोलमैन ने भी नवम्बर में इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी है.
याचिकाकर्ताओं ने अपने आवेदनों में कहा कि केंद्र सरकार ने अधिसूचना लागू करने से पहले अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया. उनका कहना है कि केंद्र ने उनकी देयक्षमता का भी आकलन नहीं किया और मजीठिया वेज बोर्ड की अधिसूचना जारी कर दिया. उल्लेखनीय है कि अपने कर्मचारियों को कम पैसा देने वाले मीडिया संस्थान अधिसूचना के बाद से ही बौखलाए हुए हैं. दैनिक जागरण ग्रुप ने तो मजीठिया वेज बोर्ड अपने यहां लागू न करने के लिए हस्ताक्षर अभियान ही चला दिया है.






