महाराष्‍ट्र में साढ़े चार महीने में 33 पत्रकारों पर हुए हमले : देशमुख

: जब तक सुरक्षा कानून नहीं बनता संघर्ष करते रहेंगे पत्रकार : जब तक महाराष्ट्र में पत्रकार रक्षा कानून और पत्रकार पेन्शन योजना शुरू नहीं की जाती तब तक महाराष्ट्र के पत्रकार संघर्ष करते रहेंगे. यह बात महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष एसएम देशमुख ने बुधवार को जलगांव में एक समारोह में कही.

मराठी पत्रकार परिषद की तरफ से राज्य के पत्रकारों को पुरस्कार देकर देशमुख के हाथ सम्‍मान किया गया. जिन पत्रकारों का सम्‍मान किया गया है उनमें अनंत दीक्षित, प्राजक्ता धुलप, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश अवधूत, गजानन नाईक, देवेद्र गावंडे, नवीन सोष्टे, शशिकांत पाटील आदि शामिल हैं.

इस कार्यक्रम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए देशमुख ने महाराष्ट्र में पत्रकारों के उपर बढ़ते हमले का पूरा ब्‍योरा दिया. नये साल के पहले साढ़े चार माह में 33 पत्रकारों को राज्य में पीटा गया. यह स्थिति अन्य राज्यों से कई गुना ज्‍यादा है. एक तरफ पत्रकार पीटे जा रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार यह तमाशा खामोशी से देखती जा रही है. जब पत्रकार मुख्यमंत्री से मिलते हैं तब झूठे वायदे के अलाव उन्हें कुछ नहीं मिलता. लेकिन पत्रकार अपने हक की यह लड़ाई तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती.

देशमुख ने इस संघर्ष में राज्य के पत्रकारो से अपने व्यक्तिगत मतभेद को भूलकर एकजुटता के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की. उन्‍होंने कहा कि सरकार जब तक राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं बनाती तब तक मंत्रियों को पत्रकार के किसी भी समारोह में आमंत्रित नहीं करने का एक सुझाव है. इस बारे में पत्रकार हल्ला विरोधी कृती समिति गंभीरता से सोच रही है. इस कार्यक्रम में परिषद के कार्याध्यक्ष किरण नाईक, पूर्व अध्यक्ष विजय पाटील उपस्थित थे.

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