नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा समूह को 55.85 करोड़ रुपये का बिल भेजा है। साथ ही इसका भुगतान जल्द करने को कहा है। समूह द्वारा भेजे गए तीन करोड़ से ज्यादा निवेशकों से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता जांच, इसकी स्कैनिंग और रखरखाव पर यह खर्च आया है। इन निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने का सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को आदेश दिया है। इसकी जिम्मेदारी सेबी को सौंपी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का धन लौटाने से जुड़े काम में आने वाला खर्च भी सहारा समूह को उठाने का आदेश दे रखा है। सेबी द्वारा भेजा गया यह बिल शुरुआती है। अंतिम बिल इससे कहीं और ज्यादा हो सकता है। पूंजी बाजार नियामक के मुताबिक निवेशकों के दस्तावेजों के रखरखाव, डिजिटाइजेशन और स्कैनिंग पर 25.97 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इसके लिए स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की सेवाएं ली गई है। वहीं निवेशकों का धन लौटाने के लिए यूटीआइ इन्फ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर 29.88 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सर्वोच्च अदालत ने इसकी निगरानी के लिए एक रिटायर जज की भी नियुक्ति की है। उन्हें पांच लाख रुपये मासिक के अलावा यात्रा, रहने और दूसरे खर्च के लिए भी भुगतान किया जाता है। यह राशि फिलहाल सेबी दे रहा है। इसकी भी वसूली सहारा से की जानी है। (जागरण)






