दुर्घटना में मृत जागरण के पत्रकार के आश्रितों को करीब 16 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश

बस्ती : उत्तराखंड के हल्द्वानी में पत्रकार अमिताभ द्विवेदी की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु के मामले में उनकी पत्‍‌नी सहित 6 आश्रितों को न्यायाधीश रामप्रीत द्विवेदी ने 1589736 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। निर्णीत धनराशि पर दावा दाखिला के दिन से वास्तविक अदायगी के दिन तक 6 प्रतिशत साधारण ब्याज देना होगा। सम्पूर्ण धनराशि न्यू इंडिया इंश्योरेंश कंपनी द्वारा दी जाएगी।

नैनीताल जनपद के हल्द्वानी शहर से किसी काम से स्थानीय जनपद के कटरा निवासी अमिताभ द्विवेदी अपनी मोटर साइकिल से आठ सितंबर 2008 को सांय पांच बजे जा रहे थे तभी मारूति वैन यूपी 01/2365 का चालक लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए ठोकर मार दिया जिससे अस्पताल ले जाते समय पत्रकार की मौत हो गई। नैनीताल के हल्द्वानी कोतवाली में परिजनों द्वारा मुकदमा पंजीकृत कराया गया था 24 दिसंबर 2008 को पत्रकार की पत्‍‌नी सुनीता देवी पुत्री अपूर्वा पुत्र अक्षत, पुत्री अन्नया, पिता पारसनाथ व माता कमला देवी निवासी गण निकट मोहनी राइसमिल कटरा थाना कोतवाली बस्ती की ओर से क्षतिपूर्ति का मुकदमा जनपद न्यायालय में दाखिल किया गया। जिसमें त्रिलोचन, बिनवाल गांव फूलचौड़ थाना कोतवाली हल्द्वानी जिला नैनीताल तारादत्त निवासी ग्राम ककनई थाना रीठासाहिब जिला चंपावत व न्यू इंडिया बीमा कंपनी नैनीताल शाखा को विपक्षी बनाया गया।

दोनों पक्षों ने न्यायालय में अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया। मृतक के आश्रितों द्वारा अमिताभ द्विवेदी को जागरण प्रकाशन लि में उप संपादक व 15 हजार मासिक वेतन भोगी बताया जबकि विपक्षी ने अपने वाहन से दुर्घटना न होना कहा। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम श्री द्विवेदी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पत्रकार की मृत्यु के लिए मारुति वैन के चालक की लापरवाही को कारण माना। और इस कंपनी के बीमा कर्ता को उत्तरदायी ठहराया। न्यायाधीश ने कुमारी अपूर्वा, अक्षत व अन्नया प्रत्येक को तीन लाख रुपए माता-पिता प्रत्येक को डेढ़ लाख व शेष तीन लाख नवासी हजार सात सौ छत्तीस रुपये उनकी पत्‍‌नी को दिए जाने का आदेश दिया है। पत्‍‌नी को एक लाख तथा माता पिता को पचास हजार रुपए प्रत्येक नगद ले सकते हैं शेष धनराशि प्रत्येक को मय ब्याज राष्ट्रीय कृत बैंक में पांच साल के लिए जमा करना होगा। मृतक के तीनों नाबालिग संतानों को मिलने वाली धनराशि उनके बालिग होने तक राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराई जाएगी। किसी भी आश्रित द्वारा इस धनराशि पर किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया जाएगा। साभार : जागरण

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