91 साल का कांग्रेसी शंकराचार्य स्वरूपानंद क्रोध पर न पा सका काबू, पत्रकार को थप्पड़ मारा

आजकल के साधु महात्माओं को जाने क्या हो गया है कि वो खुद पर संयम रख नहीं पा रहे हैं. आसाराम अपने 'काम' पर काबू नहीं रख पाया और इन दिनों जेल की हवा खा रहा है तो शंकराचार्य स्वरूपानंद अपने 'क्रोध' पर आज संयम नहीं रख पाया. मोदी से संबंधित एक सवाल पूछने पर इसने एक पत्रकार को ही थप्पड़ मार दिया. घटना मध्य प्रदेश के जबलपुर की है. यहां द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने एक टीवी जर्नलिस्ट को थप्पड़ मार दिया. इसको लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया है. कई न्यूज चैनलों ने थप्पड़ मारे जाने के दृश्य को लगातार दिखाना शुरू कर दिया है.

शंकराचार्य स्वरूपानंद के हाथों मार खाया पत्रकार मध्य प्रदेश – छत्तीसगढ़ के रीजनल न्यूज चैनल आईबीसी24 का है. स्वरूपानंद ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आईबीसी24 चैनल के टीवी पत्रकार को उस वक्त थप्पड़ मार दिया जब उसने शंकराचार्य से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सवाल किया. पत्रकार ने स्वरूपानंद से सवाल किया था कि 'अगर मोदी देश के प्रधानंत्री बने तो?' इस सवाल पर शंकरचार्य भड़क गए और उन्होंने पत्रकार को थप्पड़ जड दिया. शंकराचार्य ने पत्रकार को थप्पड़ मारते हुए कहा- 'भाग जा, राजनीति पर बात नहीं करनी हमें…'

देखें… रिपोर्टर का चेहरा… न्यूज चैनल का लोगो… शंकराचार्य का थप्पड़…

थप्पड़ मारता हुआ शंकराचार्य


इस घटना के बाद धर्मगुरू प्रमोद कृष्णन ने कहा कि "संतों के गुस्से को भी आशीर्वाद मानना चाहिए." वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह का कहना है कि शंकराचार्य का कृत्य घृणित और आपराधिक है. 91 साल के शंकराचार्य अब भी अपने क्रोध पर काबू नहीं पा सके, यह शर्मनाक है. प्रमोद कृष्णन के बयान पर एनके सिंह का कहना है कि अगर थप्पड़ मारे जाने को आशीर्वाद के रूप में लेना चाहिए तो फिर दूसरे बाबाओं-संतों के दुष्कृत्य को भी आशीर्वाद के रूप में लेना चाहिए. अगर यही चलन शुरू हो गया तो फिर बाबाओं-सााधुओं के हर बुरे काम को जायज माना जाने लगेगा. यह निंदनीय है.

उधर, शंकराचार्य स्वरूपानंद के शिष्य ने कहा कि मीडियाकर्मी शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज के मुंह के बहुत करीब आ गया था, तब शंकराचार्य ने उसे दूर कर दिया. शिष्य का कहना है कि डॉक्टरों ने 91 साल के शंकराचार्य को लोगों से दूर रहने को कहा है.

ज्ञात हो कि यह स्वामी स्वरूपानंद कांग्रेसी शंकराचार्य माना जाता है और अक्सर राजनीतिक विषयों पर बेखौफ बयान देता है. आज जाने क्या इसे सूझा कि रिपोर्टर को थप्पड़ मार दिया. देश भर के लोग शंकराचार्य स्वरूपानंद के इस कुकृत्य की निंदा कर रहे हैं. साधुओं को क्रोध, मोह, लोभ, काम, माया आदि से दूर रहना चाहिए, मुक्त रहना चाहिए पर ये शंकराचार्य तो मृत्य शय्या पर पड़े होने के बावजूद क्रोध से दूर नहीं रह पाया. आखिर पत्रकार की क्या गलती थी. उसने तो अपना कर्तव्य निभाया. उसने कांग्रेसी खेमे के शंकराचार्य से एक राजनीतिक सवाल पूछ लिया. अगर स्वरूपानंद कभी राजनीतिक विषयों पर बात नहीं किए होते तो समझ में आता कि इसे यह सवाल बुरा लग गया. स्वरूपानंद के इस कुकृत्य के खिलाफ जबलपुर के पत्रकारों ने मीटिंग कर कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *