पिछले साल 15 अगस्त को सहारा समूह के चेयरमैन सुब्रत राय नोयडा कैंपस आए थे। वहां से जाने के बाद ही खबरें आने लगी थीं कि वह नोयडा में फैली अराजकता से काफी नाराज हैं। हालांकि इससे पहले उन्होंने समरीन जैदी को भेजकर भी इनपुट मंगाया था और नोयडा आने के बाद वह सब कुछ प्रैक्टिकल रूप में भी देख लिया था। उसके बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि नोयडा में कुछ लोगों पर गाज गिर सकती है।
ऐसा हुआ भी, और विजय राय सहित कुछ लोगों को यहां से हटाया भी गया। उसके कुछ महीनों बाद ही उपेंद्र राय के ऊपर संदीप वाधवा को बैठा दिया गया। उस वक्त भी सुब्रत राय की तरफ से जारी सर्कुलर में नोयडा कैंपस में फैली अराजकता, खास तौर से यहां फैली गुटबाजी और साजिशी माहौल पर सख्त टिप्पणी की गई थी। समझा गया था कि संदीप वाधवा इसे दुरुस्त करेंगे, लेकिन कई महीने गुजरने के बाद भी यहां के हालात नहीं बदले।
फरवरी में हुए इंडक्शन प्रोग्राम में भाषण देते हुए भी सुब्रत राय ने इस बारे में काफी सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “निकम्मे, कामचोर और साजिश करने वालों को बाहर जाना होगा। वह माहौल खराब करते हैं। अब उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने इंडक्शन प्रोग्राम में वर्कर केयर को हेड कर रहीं समरीन जैदी को सहारियन फोरम का सर्वेसर्वा बनाते हुए कहा था, “सभी कर्तव्ययोगी माहौल बेहतर करने में योगदान दें और उनके साथ अगर सीनियर कुछ भी गलत कर रहे हैं तो वह तुरंत शिकायत भेजें, उन्हें इन्साफ मिलेगा। अगर नाम जाहिर न करना चाहें तो वह गुमनाम चिट्ठी भेजें।” सुब्रत राय ने उस वक्त ये भी कहा था कि अगर शिकायत करने के बाद किसी को परेशान करते हैं तो ऐसे सीनियर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुब्रत राय ने हर चैनल हेड और यूनिट हेड से दस निकम्मे और नाकारा लोगों की सूची भी 28 फरवरी तक मांगी थी, लेकिन ऐसी सूची कइयों ने नहीं दी और दी तो उसमें विरोधियों के नाम भेज दिए गए। इसके बाद सहारा में एक आन लाइन सर्वे भी कराया गया। जिसमें 90 प्रतिशत दो ही तरह के सवाल थे कि कंपनी कैसी है और सीनियरों का व्यवहार कैसा है। इतनी प्रैक्टिस के बाद भी माहौल में कोई खास फर्क नहीं आया। खास तौर से मीडिया हाउस में कोई सुधार नहीं आया। हालांकि सहारियन फोरम में ढेरों शिकायतें की गईं, लेकिन वहां से भी न तो किसी के खिलाफ जांच हुई और ना ही कार्रवाई। तमाम लोग करने भी लगे कि सहारा में कुछ भी नहीं बदलेगा। यहां सिर्फ बातें होती हैं, कार्रवाई नहीं।
दरअसल सुब्रत राय सकारात्मक बदलाव तो चाहते हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द के लोग, जिनपर इस बदलाव के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है, वह सुब्रत राय को सहयोग नहीं करते हैं। मीडिया में संदीप वाधवा को लाने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ तो अब सुब्रत राय अपने छोटे भाई जयव्रत राय को लेकर आए हैं। इस उम्मीद के साथ कि वह मीडिया से खास तौर से नोयडा आफिस से गंदगी साफ करेंगे, लेकिन उन्हें करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि वह ज्यादा कुछ हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इससे एक दिन पहले समरीन जैदी का नोटिस भी आया है, जिसमें उन्होंने शिकायतें मांगी हैं। अलबत्ता पहले की गईं शिकायतों का क्या हुआ, इस बारें किसी को कुछ भी पता नहीं है। अहम सवाल ये है कि अगर जयव्रत राय भी मीडिया की गंदगी साफ नहीं कर सके तो क्या सुब्रत राय खुद मैदान में उतरेंगे?
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





