दो गानें.. पहला गाना ''रेयर इनस्ट्रुमेंट्स आफ इंडिया'' नाम वाली सीडी से है जिसमें ''धुन इन कहरवा'' नामक एक इंस्ट्रुमेंटल सांग है. इसके कांट्रीब्यूटींग आर्टिस्ट हैं आशीष बंदोपाध्याय. किसी मनुष्य की आवाज नहीं है. सिर्फ एक इनस्ट्रुमेंट है. वो अपन लोगों के देश का है. इसे आप सुख और दुख, दोनों के मनोभाव में सुनिए और लगेगा कि आपके दोनों मनोभावों में ये शरीक है. और, उन मनोभावों से उपर जाने की बात कह-समझा रहा हो जिसे कुछ कुछ हम आप समझ रहे हों और कुछ कुछ सुबह सुनने समझने की बात कह रहे हों.
दूसरा वाला है नुसरत फतेह अली खां साहब की आवाज में. काफी लंबा गाना है. एक एक लाइन तबीयत से सुनने लायक है. कुछ लाइनें यूं हैं…
मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम, वो खुदा हो गए देखते देखते…
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जो पता पूछते थे किसी का कभी, लापता हो गए देखते देखते….
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अच्छी सूरत को संवरने की जरूरत क्या है
सादगी में भी कयामत की अदा होती है..
तुम जो आ जाती हो मस्जिद में अदा करने नमाज
तुमको मालूम है कितनो की कजा होती है…
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हमसे ये सोचकर कोई वादा करो, एक वादे पे उमरें गुजर जायेंगी…
ये है दुनिया यहाँ कितने अहले वफा, बेवफा हो गए देखते देखते
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जिन पत्थरों को हमने अता की थी धडकनें… वो बोलने लगे तो हमी पे बरस पड़े
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गैर की बात तस्लीम क्या कीजिए, अब तो खुद पर भी हमको भरोसा नहीं…
अपना साया समझते थे जिनको कभी, वो जुदा हो गए देखते-देखते….
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कयामत का दिन आ गया रफ्ता-रफ्ता, मुलाकात का दिन बदलते-बदलते
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अब तो हाथों की लकीरें भी मिटीं जातीं हैं… उसको खोकर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं…
कल बिछड़ना है तो फिर एहदे-वफ़ा सोच के बाँध, अभी आगाज़-ऐ-मुहब्बत है गया कुछ भी नहीं…
मैं तो इस वास्ते चुप हूँ के तमाशा न बने, तू समझता है, मुझे तुझसे गिला कुछ भी नहीं…
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दिन छुप गया, सूरज का कहीं नाम नहीं है… ओ वादा शिकन, अब भी तेरी शाम नहीं है…
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शब-ऐ-वादा ये रहा करतीं है बातें दिल में, देखें, यार आता है पहले या क़ज़ा आती है…
कल से बेकल हूँ मै बला ख़ाक मुझे कल आये, कल का वादा था, न वो आज आये, न वो कल आये..
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अब तो हाथों से लकीरे मिटी जाती हैं
उस को खो कर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं
कल बिछड़ना है तो फिर एहद-ए-वफ़ा सोच क बाँध
अभी आगाज़-ए-मोहब्बत है गया कुछ भी नहीं
मैं तो इस वास्ते चुप हूँ के तमाशा न बने
तू समझता है मुझे तुझसे गिला कुछ भी नहीं
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कोई हँसे तो तुझे गम लगे हंसी ना लगे
के दिल्लगी भी तेरे दिल को दिल्लगी ना लगे
तू रोज़ रोया करे उठ के चाँद रातो में
खुदा करे तेरा मेरे बगैर जी ना लगे
पहला गाना–
दूसरा गाना–
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