मध्य प्रदेश में भाजपा के मुख पत्र चरैवेति के वेबसाइट को लेकर मचा बवाल अब भी जारी है। आज के भास्कर में फिर एक खबर आई है। यह कल के ही खबर का फालोअप है। इस खबर से कई लोग कटघरे में आ गये हैं। परत दर परत झूठ उजागर होने लगा है। एक तरफ जनसंपर्क की विज्ञापन शाखा से मिली जानकारी से यह स्पष्ट हुआ है कि चरैवेति या इससे मिलती-जुलती किसी अन्य वेबसाइट को कोई भी विज्ञापन आदेश या राशि का भुगतान नहीं हुआ है।
वहीं www.charaiveti.in का पंजीयन इसके संपादक अनिल सौमित्र, चरैवेति संस्था, ई-2, दीनदयाल परिसर (भाजपा कार्यालय), भोपाल के नाम पर हुआ है। जबकि जिस वेबसाईट www.charaiveti.net को अधिकृत बताया जा रहा है उसका पंजीयन किसने किया है, किसके नाम पर और किस पते पर हुआ है इसका कोई अता-पता नहीं है। चरैवेति के सूत्रों के मुताबिक इस साइट का निर्माण लगभग 2 लाख खर्च कर करवाया गया है। भास्कर अखबार के रिपोर्टर का झूठ भी उजागर हुआ है कि जनसंपर्क विभाग ने किसी वेबसाइट को कोई विज्ञापन भुगतान किया है। अब देखना यह है कि चरैवेति के संपादक श्री अनिल सौमित्र इस पर क्या और कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं दूसरी तरफ इसे बोगस बताने वाले डा. हितेश बाजपेयी कौन सा कदम उठाते हैं।
सब मिलाकर विचारों के टकराव के बाद अनिल सौमित्र और भाजपा के मीडिया प्रभारी डा. हितेश बाजपेयी का टकराव व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गया है। अब वेबसाइट के असली और नकली की लड़ाई में कौन सच्चा साबित होता है और कौन झूठा साबित होता है यह सारी बातों के जांच के बाद ही पता चलेगा, पर इस प्रकरण से मध्य प्रदेश भाजपा की किरकिरी जरूर हो रही है। इसमें दैनिक भास्कर भी सीधा कूद पड़ा है। उसकी खबरों से स्पष्ट है कि वो निष्पक्ष और सही खबर प्रकाशित करने की बजाय डा. हितेश बाजपेयी का पक्षकार बनकर खबरों को प्रकाशित कर रहा है।






