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पूजा पाठ करवाने के बाद ही सही हुई जागरण की मशीन!

: कानाफूसी : कहीं किसी नई जगह पर मशीनी चीज को स्‍थापित करने के लिए शायद पूजापाठ जरूरी होता है, नहीं तो मशीन ठीक से काम नहीं करती है, परेशान करने लगती हैं. हालांकि यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि दैनिक जागरण, अलीगढ़ में जो कुछ हुआ हम उसका सार संक्षेप बता रहे हैं. अब आप इसे श्रद्धा भी कह सकते हैं और अधंविश्‍वास भी यह आप पर छोड़ा जा रहा है. पर पूजा के बाद तो जागरण के कर्मी राहत महसूस कर रहे हैं.

: कानाफूसी : कहीं किसी नई जगह पर मशीनी चीज को स्‍थापित करने के लिए शायद पूजापाठ जरूरी होता है, नहीं तो मशीन ठीक से काम नहीं करती है, परेशान करने लगती हैं. हालांकि यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि दैनिक जागरण, अलीगढ़ में जो कुछ हुआ हम उसका सार संक्षेप बता रहे हैं. अब आप इसे श्रद्धा भी कह सकते हैं और अधंविश्‍वास भी यह आप पर छोड़ा जा रहा है. पर पूजा के बाद तो जागरण के कर्मी राहत महसूस कर रहे हैं.

अलीगढ़ में आज से लगभग दो सप्‍ताह पहले तक अखबार की प्रिंटिंग पुराने चंद्रा टाकिज में चल रही थी. जागरण प्रबंधन ने चंद्रा टाकिज को किराए पर लेकर यही पर प्रिंटिंग मशीन स्‍थापित करा दी थी. पिछले साल जागरण प्रबंधन ने अलीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया तालानगरी में प्‍लाट लिया था. उसी प्‍लाट पर दैनिक जागरण ने अपनी बिल्डिंग बनवाई तथा चंद्रा टाकिज में स्‍थापित मशीन को आठ-नौ दिन पहले उसी नए बिल्डिंग में लगवा दी. मशीन लगने के बाद प्रेस से छपाई भी शुरू हो गई. परन्‍तु यह क्‍या, आए दिन मशीन में कोई न कोई गड़गबड़ी तकनीकी खराबी रहने लगी. मैकेनिक तथा इंजीनियर भी इसको ठीक करते पर छोटी-मोटी गड़बड़ी आ ही जाती थी. इसी बीच किसी कर्मचारी ने कहा कि बिना पूजा पाठ के मशीन लगवाकर शुरू कर दिया गया है, इसलिए ही सारी समस्‍या आ रही है.

वैसे भी हिंदुस्‍तान के अलीगढ़ की धरती पर कदम रखने और उससे मिलने वाली चुनौतियों से परेशान दैनिक जागरण के स्‍थानीय वरिष्‍ठ लोगों ने कर्मचारी की बात पर विश्‍वास करते हुए 9 दिसम्‍बर, यानी जिस दिन हिंदुस्‍तान की लांचिंग थी, को तालानगरी वाले अपने बिल्डिंग में पूजापाठ कराया. बताया जा रहा है कि पूजा पाठ कराने के बाद से मशीन ठीक ठाक काम कर रही है. अब जागरण के कर्मचारियों की परेशानी कम हुई है. अब ये पूजा पाठ का असर है कि फिर इंजीनियरों और मैकेनिकों का, ये तो जागरण के लोग ही ठीक से बता सकते हैं, पर इससे जागरण वालों को राहत जरूर मिली है. अब वे हिंदुस्‍तान की चुनौतियों से निपटने को तैयार हैं.

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