दैनिक जागरण के विज्ञापन फर्जीवाड़े पर फैसला सुरक्षित, 3 अप्रैल को आएगा आदेश

मुजफ्फरपुर। दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़़े मुकदमे (परिवाद-पत्र संख्या-2638/2012) में मुजफ्फरपुर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने 19 मार्च को लंबी सुनवाई के बाद संज्ञान के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायालय ने विश्वस्तरीय इस मुकदमे में फैसला की तारीख आगामी तीन अप्रैल तय कर दी है। दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला के बाद यह दूसरा बड़ा विज्ञापन घोटाले से जुड़ा मुकदमा है। अब पूरी दुनिया की निगाहें दैनिक जागरण विज्ञापन फर्जीवाड़ा मुकदमे में न्यायिक फैसले की तारीख पर टिक गई है।

प्रिंट, ब्राडकास्टऔर इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में भी इस मुकदमे के फैसले का इंतजार बेसब्री से होने लगा है। दैनिक जागरण विज्ञापन फर्जीवाड़ा मुकदमा को न्यायालय में लाने की हिम्मत दिलेर दैनिक जागरण के बर्खास्त कर्मी रमण कुमार यादव ने की है। रमण कुमार अपने साथ हुए अन्‍याय को लेकर कोर्ट तक गए। मुंगेर व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने 19 मार्च को मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में रमण कुमार यादव के परिवाद-पत्र में अभियोजन के समर्थन में लगभग डेढ़ घंटों तक बहस की। बहस में सहयोग मुंगेर के वरीय अधिवक्ता बिपिन कुमार मंडल ने दी।

वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने न्यायालय को बताया कि दैनिक जागरण अखबार के प्रबंधन और संपादकीय टीम के सदस्यों ने किस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकारों से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए जालसाजी और धोखाधड़ी की। अखबार ने दैनिक जागरण के पटना संस्करण की निबंधन संख्या को किस प्रकार दैनिक जागरण के मुजफ्फरपुर संस्करण की प्रिंट लाइन में वर्षों-वर्ष तक छापकार गैर-निबंधित अखबार को निबंधित अखबार घोषित कर सरकार के समक्ष पेश कर करोड़ों-करोड़ रुपया का सरकारी विज्ञापन प्रकाशित किया और सरकारी खजाने को डंके की चोट पर लूटने का काम किया।

अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने न्यायालय को बताया कि दैनिक जागरण ने किस प्रकार जालसाजी की? मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बहस में न्यायालय को बताया कि प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5 (2) के अन्तर्गत प्रत्येक दैनिक अखबार को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष ‘घोषणा-पत्र‘ समर्पित करना कानूनी बाध्यता है। दैनिक जागरण के प्रबंधन ने वर्ष 2005 में 18 अप्रैल से बिहार के मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय में स्थापित नए प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक जागरण अखबार के मुजफ्फरपुर संस्करण का मुद्रण और प्रकाशन शुरू कर दिया। प्रबंधन ने विधिवत जिलाधिकारी के समक्ष ‘घोषणा-पत्र‘ दाखिल भी कर दिया। परन्तु अखबार के प्रबंधन ने प्रेस एण्ड

श्रीकृष्‍ण प्रसाद
रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 2 (सी) का पालन नहीं किया और बिना जिला मजिस्ट्रेट के प्रमाणीकरण के बिना ही दैनिक जागरण के मुजफ्फरपुर संस्करण का मुद्रण और प्रकाशन नए प्रिंटिंग प्रेस से शुरू कर दिया।

न्यायालय को वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने सूचित किया कि ‘घोषण-पत्र‘ एक प्रकार का निबंधन प्राप्त करने के लिए ‘आवेदन-पत्र‘ मात्र है, जिसमें नए प्रिंटिंग प्रेस से मुद्रित और प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबार के प्रकाशक, मुद्रक और संपादक का ब्योरा और नए प्रेस के स्थल की पूरी सूचना लिखी रहती है। न्यायालय को सूचित किया गया कि घोषणा-पत्र को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष समर्पित कर देने का यह अर्थ नहीं है कि अखबार को नए प्रिंटिंग प्रेस से अखबार के मुद्रण और प्रकाशन की अनुमति मिल गई और वह अखबार अपने को निबंधित नहीं घोषित कर सकता है।

न्यायालय को अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने आगे बताया कि प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 06 के तहत ‘घोषणा-पत्र‘ के समर्पण के बाद प्रबंधन के समक्ष कानूनी बाध्यता है कि प्रबंधन जिला मजिस्ट्रेट से घोषणा-पत्र प्रमाणीकरण प्राप्त कर ले, जो इस मामले में नहीं किया गया और इस प्रकार प्रबंधन ने प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 06 का घोर उल्लंघन किया।

घोषणा-पत्र पर जिला मजिस्ट्रेट का दस्तखत और कार्यालय का मुहर होना अनिवार्य है और यह भी लिखा होना जरूरी है कि अखबार ने जो घोषणा-पत्र में सूचना दी है कि वह सूचना सत्य है। न्यायालय को श्रीकृष्ण प्रसाद ने आगे सूचित किया कि तीसरी कानूनी प्रक्रिया प्रबंधन के समक्ष यह है कि प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 19 (सी) के तहत नई दिल्ली स्थित प्रेस रजिस्‍ट्रार जिला मजिस्ट्रेट से धारा 06 के अन्तर्गत प्रमाणीकृत घोषणा-पत्र को अपने कार्यालय में प्राप्त करने के उपरांत अखबार को अखबार के निबंधन से जुड़ा प्रमाण-पत्र जारी करेगा। प्रेस -रजिस्ट्रार से ‘सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्रेशन‘ के जारी होने के बाद अखबार निबंधित हो जायेगा। साथ ही, दी रजिस्ट्रेशन आफ न्यूजपेपर्स (सेंट्रल) रूल, 1956 की धारा 10 (2) के अन्तर्गत प्रेस रजिस्‍ट्रार (नई दिल्ली) संबंधित अखबार को रजिस्ट्रेशन-नम्बर जारी करेगा।

न्यायालय को अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने सूचित किया कि दैनिक जागरण के प्रबंधन ने दैनिक जागरण के मुजफ्फरपुर संस्करण के मुद्रण और प्रकाशन के मामले में नई दिल्ली स्थित प्रेस रजिस्ट्रार से किसी प्रकार का ‘सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्रेशन‘ और ‘रजिस्ट्रेशन नम्बर‘ नहीं प्राप्त किया। इस प्रकार मुजफ्फरपुर के नए छापाखाना से मुद्रित और प्रकाशित दैनिक जागरण अखबार 18 अप्रैल, 2005 से  28 जून, 2012 तक पूरी तरह अवैध और गैरकानूनी था।

न्यायालय को बताया गया कि दैनिक जागरण ने किस प्रकार सरकार के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की? न्यायालय को वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बताया कि जब दैनिक जागरण का मुजफ्फरपुर संस्करण 18 अप्रैल, 2005 से 28 जून, 2012 तक अवैध था, फिर भी दैनिक जागरण के प्रबंधन ने मुजफ्फपुर के दैनिक जागरण संस्करण की प्रिंट लाइन में दैनिक जागरण के पटना संस्करण की निबंधन संख्या- बीआईएचएचआई/2000/3097 को जालसाजी और धोखाधड़ी की नीयत से प्रकाशित किया और इस अवधि में अखबार के प्रबंधन ने केन्द्र और राज्य सरकारों से करोड़ों-करोड़ रूपया का सरकारी विज्ञापन प्रकाशित किया और सरकारी खजाने की जमकर लूट की।

सरकारी खजाने की लूट के पीछे और क्या-क्या कारण थे? : न्यायालय को वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बताया कि केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन डीएवीपी कार्यालय नई दिल्ली में कार्य करता है। इस विभाग का काम है कि यह विभाग निबंधित और 36 माह तक नियमित प्रकाशित दैनिक अखबार को ‘विज्ञापन-दर‘ और केन्द्र सरकार के सभी विभागों का सरकारी विज्ञापन जारी करता है।

दैनिक जागरण ने मुजफ्फरपुर के अपने बिना-निबंधित संस्करण को ‘निबंधित संस्करण‘ के रूप में पेश कर डीएवीपी कार्यालय से जालसाजी और धोखाधड़ी कर ‘विज्ञापन-दर‘ और ‘केन्द्र सरकार का विज्ञापन‘ भी प्राप्त करता रहा। इस प्रकार ने अखबार ने करोड़ों-करोड़ रुपया सरकारी खजाने से विज्ञापन मद में अवैध ढंग से प्राप्त कर लिया। श्री प्रसाद ने विद्वान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष डीएवीपी, नई दिल्ली की विज्ञापन नीति की वेब प्रतियां भी पेश कीं।

दैनिक जागरण ने बिहार में किस प्रकार सरकारी विज्ञापन की लूट मचाई? : न्यायालय को वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बताया कि बिहार सरकार के सरकारी विभागों से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग (पटना) ने वर्ष 1981 और वर्ष 2008 में विज्ञापन नीति की अधिसूचना जारी कीं। दोनों अधिसूचनाओं में स्पष्ट है कि प्रेस रजिस्ट्रार से निबंधन प्रमाण पत्र प्राप्त दैनिक अखबार ही सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने का हकदार हैं। साथ ही बिहार सरकार की विज्ञापन नीति‘ 1981 में सरकारी विज्ञापन पाने वाले हिन्दी अखबार की प्रसार संख्या 20 हजार से अधिक होना कानूनी बाध्यता है। साथ ही, बिहार सरकार की विज्ञापन नीति- 2008 में सरकारी विज्ञापन पाने वाले दैनिक हिन्दी अखबार के पास प्रसार संख्या कम से कम 45 हजार होना जरूरी है। न्यायालय को बताया गया कि मुजफ्फरपुर जिला से मुद्रित और प्रकाशित दैनिक जागरण की प्रसार संख्या केवल मुजफ्फरपुर जिला में किसी भी कीमत में 20 हजार के उपर जा ही नहीं सकती है और इस परिस्थिति में दैनिक जागरण को किसी भी कीमत में सरकारी विज्ञापन नहीं मिलेगा। वर्षों-वर्ष तक जिलावार संस्करण के मुद्रण और प्रकाशन की स्थिति में विज्ञापन नीति के तहत सरकारी विज्ञापन मिलना नहीं है, प्रबंधन ने पटना संस्करण की निबंधन संख्या और प्रसार संख्या का इस्तेमाल कर केन्द्र और राज्य सरकारों से सरकारी विज्ञापन प्राप्त किया और सरकारी राजस्व की लूट मचा दी।

श्री प्रसाद ने बिहार सरकार की विज्ञापन नीति -1981 और विज्ञापन नीति- 2008 के संबंधित नियमन से विद्वान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को रू-ब-रू करा दिया। विश्वस्तरीय दैनिक जागरण विज्ञापन फर्जीवाड़ा मुकदमे में कुल 17 व्यक्तियों को द्वितीय पक्ष बनाया गया है। परिवादी रमण कुमार यादव ने प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की  धारा 8 (बी), 12, 13, 14 और 15 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी), 420, 471 और 476 के तहत मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड, जागरण बिल्डिंग, 2, सर्वोदय नगर, कानपुर-2085 के (1) चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक सह प्रबंध संपादक महेन्द्र मोहन गुप्ता, (2) सीईओ सह पूर्णकालिक निदेशक सह संपादक संजय गुप्ता, (3) पूर्णकालीक निदेशक धीरेन्द्र मोहन गुप्ता, (4) पूर्णकालिक निदेशक सह स्थानीय संपादक सुनील गुप्ता, (5) पूर्णकालीक निदेशक शैलेश गुप्ता, (6) स्वतंत्र निदेशक भारतजी अग्रवाल, (7) स्वतंत्र निदेशक किशोर वियानी, (8) स्वतंत्र निदेशक नरेश मोहन, (9) स्वतंत्र निदेशक आरके झुनझुनवाला, (10) स्वतंत्र निदेशक रशिद मिर्जा, (11) स्वतंत्र निदेशक शशिधर नारायण सिन्हा, (12) स्वतंत्र निदेशक विजय टंडन, (13) स्वतंत्र निदेशक विक्रम बख्शी, (14) कंपनी सचिव अमित जयसवाल, (15) महाप्रबंधक और मुद्रक आनन्द त्रिपाठी, (16) स्थानीय संपादक, मुजफ्फरपुर देवेन्द्र राय और (17) स्थानीय संपादक शैलेन्द्र दीक्षित, पटना को द्वितीय पक्ष बनाया है।

न्यायालय से द्वितीय पक्ष के सभी व्यक्तियों के विरूद्ध वर्णित धाराओं में संज्ञान लेने की प्रार्थना : वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बहस के अंत में न्यायालय से द्वितीयपक्ष के सभी व्यक्तियों के विरूद्ध वर्णित धाराओं के अन्तर्गत संज्ञान लेने की प्रार्थना की।

मुजफ्फरपुर से काशी प्रसाद की रिपोर्ट.

जागरण प्रबंधन शैलेंद्र पांडेय के साथ ऐसा क्‍यों कर रहा है?

जागरण प्रबंधन अपने कर्मचारियों का केवल शोषण ही नहीं करता है बल्कि उन्‍हें फंसाने तथा उन पर फर्जी मुकदमा लिखवाने में भी इसका कोई सानी नहीं है. जागरण समूह हर वो हथकंडा अपनाता है, जो वो अपने कर्मचारी को परेशान करने के लिए अपना सकता है. मामला आई नेक्‍स्‍ट, रांची से जुड़ा हुआ है. प्रबंधन ने यहां समूह के छोटे अखबार आई नेक्‍स्‍ट के मैनेजर रहे शैलेंद्र पांडेय के पीएफ को अब तक क्‍लीयर नहीं किया है, जिसके बाद शैलेंद्र ने सीधे पीएफ ऑफिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई है.

मामला 18 मई 2011 का है. शैलेंद्र पांडेय आई नेक्‍स्‍ट, रांची में मैनेजर के पद पर पिछले तीन सालों से काम कर रहे थे. इस तिथि पर उन्‍होंने आई नेक्‍स्‍ट से इस्‍तीफा देकर हिंदुस्‍तान ज्‍वाइन कर लिया. बताया जा रहा है कि उस समय यहां पर शैलेंद्र के बॉस रोहित मल्‍होत्रा थे, जो अभी हिुदुस्‍तान, चंडीगढ़ से जुड़े हुए हैं, उन्‍होंने कहा कि तुमने छोड़ा तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. पर शैलेंद्र ने कहना था हर कोई अपना बेहतर सोचता है तो इसमें बुराई क्‍या है.

खैर, शैलेंद्र ने आगरा में हिंदुस्‍तान ज्‍वाइन कर लिया. पर इधर जागरण प्रबंधन ने उनके पीएफ समेत कई बकायों को क्‍लीयर नहीं किया. प्रबंधन ने आरोप लगाया कि शैलेंद्र ने गबन किया है. इस मामले में पुलिस को दबाव में लेते हुए जागरण ने शैलेंद्र पर मुकदमा दर्ज करा दिया. साथ ही धमकी दी गई कि तुम्‍हें कहीं नौकरी नहीं करने दिया जाएगा. शैलेंद्र ने किसी तरह बेल लेकर अपनी नौकरी जारी रखी. बाद में उन्‍होंने हिंदुस्‍तान से भी इस्‍तीफा दे दिया.

इस बीच शैलेंद्र ने अपने पीएफ एवं अन्‍य बकायों के लिए कई बार आई नेक्‍स्‍ट और जागरण के लोगों से संपर्क किया परन्‍तु वे लोग कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. शैलेंद्र पांडेय का कहना है कि मैनेजर कोआर्डिनेशन पुरुषोत्‍तम मिश्रा एवं मैनेजर पर्सनल चंद्र प्रकाश मिश्रा मेरा पीएफ क्‍लीयर न करने देने में अपनी पूरी भूमिका निभा रहे हैं. शैलेंद्र ने जागरण प्रबंधन के बदनीयती को देखते हुए पीएफ आफिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई है. संभावना है जल्‍द ही पीएफ कार्यालय इस मामले को संज्ञान में लेकर शैलेंद्र का बकाया क्‍लीयर करवाएगा.

गौरतलब है कि अपने कर्मचारियों के शोषण के लिए कुख्‍यात जागरण प्रबंधन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बिल्‍कुल विश्‍वास नहीं करता है. इनके सिस्‍टम में आंतरिक लोकतंत्र के लिए कोई जगह नहीं है, जबकि अन्‍य अखबार किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर आंतरिक जांच करवाते हैं, उसके बाद किसी कर्मचारी को रखने या निकालने का फैसला लिया जाता है. लेकिन जागरण में तानाशाही है, जिसे मन किया रख लिया, जिसे मन किया निकाल दिया. मजीठिया वेज बोर्ड मामले को लेकर भी जागरण प्रबंधन काफी समय से यही करता आ रहा है. अपने पुराने कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्‍ता दिखाता आ रहा है.

दैनिक जागरण ने झारखंड-बिहार के कई मैनेजरों को इधर-उधर किया

झारखंड में दैनिक जागरण के मैनेजमेंट विभाग में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. हालांकि इन बदलावों से उसे झटका भी लगा है. रांची से खबर है कि सीनियर सर्कुलेशन मैनेजर विनय वर्मा का तबादला पटना के लिए कर दिया गया, जिसके बाद विनय वर्मा ने जागरण से इस्‍तीफा दे दिया. उन्‍होंने अपनी नई पारी रांची में ही पायनियर के साथ शुरू की है. उन्‍हें चंदन मित्रा के इस अखबार में जीएम बनाया गया है. विनय वर्मा का इस्‍तीफा बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है.

पटना से राजाराम तिवारी को रांची भेजा गया है. उन्‍हें यहां पर एजीएम बनाया गया है. राजाराम तिवारी रामाज्ञा तिवारी के समधी हैं. पटना से ही प्रभाकर तिवारी को रांची भेजा गया है. उन्‍हें यहां पर सिटी सेल्‍स हेड बनाया गया है. रांची में एजीएम के पद पर तैनात विनोद कुमार दुबे को मुजफ्फरपुर भेज दिया गया है. उन्‍हें मुजफ्फरपुर का यूनिट हेड बनाया गया है. मुजफ्फरपुर के यूनिट हेड एसएन पाठक को पटना भेज दिया गया है. वे यहां एजीएम के पद पर लाए गए हैं.

पटना में सर्कुलेशन मैनेजर के पद पर तैनात डीडी यादव को भागलपुर भेज दिया गया है. डीडी यादव को वहां किस पद पर भेजा गया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है, परन्‍तु सूत्रों का कहना है कि उन्‍हें यहां भी सर्कुलेशन मैनेजर बनाया गया है. रांची से एकाउंटेंट मैनेजर मनोज पांडेय का तबादला पटना के लिए कर दिया गया है. माना जा रहा है कि अभी और फेरबदल किए जाएंगे. संपादकीय में भी बदलाव होने की चर्चा हो रही है.

जागरण में राजेश यादव का गोरखपुर एवं निर्भय सिंह का बनारस तबादला

दैनिक जागरण, बनारस से खबर है कि सर्कुलेशन मैनेजर राजेश यादव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है. राजेश यादव लगभग डेढ़ दशक से दैनिक जागरण से जुड़े हुए हैं. अभी उन्‍होंने गोरखपुर ज्‍वाइन नहीं किया है. उनकी जगह गोरखपुर में तैनात सर्कुलेशन मैनेजर निर्भय सिंह का तबादला बनारस के लिए कर दिया गया है. खबर है कि निर्भय सिंह ने अपनी जिम्‍मेदारी संभाल ली है. राजेश यादव के गोरखपुर ज्‍वाइन करने की संभावनाओं को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.

उल्‍लेखनीय है कि बनारस मंडल में दैनिक जागरण को जमाने का श्रेय राजेश और उनके पिता भानू शंकर यादव को जाता है. ये दोनों पिता-पुत्र दैनिक जागरण के बनारस में लांच होने के समय से जुड़े हुए हैं. पहले जागरण के सर्कुलेशन का चार्ज भानू शंकर यादव के जिम्‍मे था. उनकी मंडल के हॉकरों पर जबरदस्‍त पकड़ थी, जिसका फायदा जागरण को मिला. उनके निधन के बाद राजेश यादव ने जागरण के सर्कुलेशन को नई ऊंचाई दी. पर प्रबंधन ने उनके कार्यों को नजरअंदाज करते हुए उनका तबादला कर दिया है. संभावना जताई जा रही है कि प्रबंधन के फैसले से नाराज राजेश यादव इस्‍तीफा भी दे सकते हैं. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है. 

आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ में हलचल : एनई पर खबर बेचने के आरोप में संपादक को भेजा गया मेल

जागरण समूह के आई नेक्‍स्‍ट अखबार में सब कुछ सही नहीं चल रहा है. जागरण समूह के मालिकों तथा आई नेक्‍स्‍ट के संपादकों को भेजे गए एक मेल में आरोप लगाया गया है कि आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ के न्‍यूज एडिटर राधाकृष्‍ण त्रिपाठी संस्‍थान के एक्‍सक्‍लूसिव खबरों को प्रतिद्वंद्वी समूह दैनिक भास्‍कर के पत्रकार अज्‍येंद्र राजन शुक्‍ला को बेच रहे हैं. यह मेल आई नेक्‍स्‍ट के एडिटर आलोक सांवल समेत शैलेश गुप्‍ता, सुनील गुप्‍ता, संजय गुप्‍ता, संदीप गुप्‍ता को भी भेजा गया है.

अब इन आरोपों में कितनी सच्‍चाई है यह तो जागरण प्रबंधन अपने जांच के बाद ही तय करेगा. परन्‍तु लखनऊ से मिल रही खबरों में बताया जा रहा है कि आई नेक्‍स्‍ट के अंदर तनाव की स्थिति है. कुछ लोगों ने इस्‍तीफा भी दे दिया है. नीचे संपादकों को भेजा गया मेल और खबरों के लिंक.


To: "alok.sanwal@inext.co.in" <alok.sanwal@inext.co.in>; "editor@inext.co.in" <editor@inext.co.in>
Cc: "shailesh@jagran.com" <shailesh@jagran.com>; "sunilgupta@jagran.com" <sunilgupta@jagran.com>; "sanjay@jagran.com" <sanjay@jagran.com>; "sandeep@jagran.com" <sandeep@jagran.com>
Sent: Thursday, February 14, 2013 10:59 AM
Subject: Priye Sampadak Mahoday

Priye Sir,
            Aapko ye suchit karte hue bada dukh ho raha hai ki, aap hi ek employee aapke jagran grup ki news and photographs ke sath andar ki sari information..aapke rival BHASKAR group ko bech rahe hain. Aap niche die hue links pe ja ke dekh sakte hain aur kisi bhi expert se Milan karwa ke dekh sakte hain ki photographs same hain, aur news bhi.

Aapke Lucknow ke News Editor, Radha Krishna ji apne param dost aur inext ke poorv employee Ajayendra Rajan Shukla koi next ki sari exclusive news aur pictures bech dete hain, aur wo bhi bina kisi darr ke. Unhe is bat ka bhi dar nai hai ki ye ek jurm hai aur unpe kanooni karyawahi bhi ho sakti hai. Yahi nahi,,,wo apne mitr Ajayendra Rajan ko aksar office parisar me bula kar baithalte hain aur yaha ki sari information pen drive aur mail ke zariye de dete hain.

Yahi nahi..kharab past rakhne wale ye mahan news editor aksar sharab ke nashe me bhi office aa jate hain. Kripya is case me gambhirta se koi action jald le warna, ye bhi suna gaya hai ki ye Radha Krishna Tripathi ji ko khaas kar ek doosre media group ne bheja hai taki wo akhbar ko ek strategy ke tehat barbad kar sake…wo jald hi apne purine guru Naveen Joshi ji ke akhbar me jane wale hain. Aise me sawal ye uthta hai ki agar unko jana hi tha to wo aaye hi kyu, kya aapko isme kisi sazish ki bu nahi aati?

Khair, kripya nimn die gaye links ka Milan, pics n news ka inext me chapi khabro se zarur kare, sach aapke samne khud aa jaega. Yaha tak jo inext ki exclusive khabren bhi hoti hain, agle din wohi khabren dainikbhaskar ki website pe..pics ke sath aa jati hain. Sochne ke bat ye hai ki agar wo inext ki exclusive story n pics hoti hain to wo Radha Krishna ke dost Ajayendra Rajan Shukla ke pas kaise pahuch jaati hain?

Link 1
http://inextepaper.jagran.com/87621/INEXT-LUCKNOW/06.02.13#page/2/1

Is Link pe aap ja kar dekhe ki ek vidhayak ki gadi se uske kuch sathio ne takkar mari… ye khabar 6 Feb ki hai…

http://www.bhaskar.com/article/UP-LUCK-officers-car-hit-by-drunk-people-related-with-sp-mla-4171692-PHO.html?seq=2

Ab zara is link pe ja ke dekhie ki bhaskar.com pe bhi same khabar, aur same pictures.surprisingly ye bhi 6th Feb ko publish hui hain apne doubts clear karne ke lie aap kisi bhi expert se iski janch karwa sakte hain.
 
Link 2
Inext me exclusive story chapi..jiski pics sirf sur sirf inext ke pas thi…

http://inextepaper.jagran.com/84061/INEXT-LUCKNOW/22.01.13

http://www.bhaskar.com/article/UP-OTH-nd-tiwari-was-conducting-wedding-band-4157288-PHO.html

Aur agle hi din wohi pic plus baaki ki kuch pics bhaskar ki website pea a jati hain…aapko jaan ke hairat hogi ki dainikbhaskar ki website pe jitni bhi pics hain is story ki wo inext ke stringer shubham tripathi ne khichi thi. Lekin fir hamesha ki tarah Radha Krishna ne Ajayendra Rajan se dosti nibhate hue na sirf unhe wo pic di jo inext me chapi thi balki baaki ki sari pics bhi de di.
 
Link 3

http://inextepaper.jagran.com/86086/INEXT-LUCKNOW/31.01.13#page/8/1

Up ke Cm ne prisners dwara banai gai painting ki exhibition ko saraha…iski do pics inext me chapi///

http://www.bhaskar.com/article/UP-OTH-cm-akhilesh-praise-criminales-in-lucknow-4164694-PHO.html

Surprisingly.. badhi hi chalaki se ek bar fir..same pic bhaskar.com pe nazar aai.. Mai request karunga ek bar fir se ki aap kisi expert se in dono pics ka milaan karwa sakte hain.

‘जागरण पंजाबी’ को हरियाणा तथा दिल्‍ली में लांच करने की तैयारी

जागरण प्रकाशन समूह अपने पंजाबी भाषा के अखबार 'जागरण पंजाबी' का विस्‍तार करने जा रहा है. अब यह अखबार पंजाब के बाहर के राज्‍यों में मौजूद पंजाबी भाषियों को लक्ष्‍य करके हरियाणा और दिल्‍ली में अखबार को लांच करने की योजना पर काम कर रहा है. फिलहाल इस अखबार का प्रकाशन लुधियाना और जालंधर यूनिट से किया जा रहा है. दोनों यूनिटों से 15 एडिशनों का प्रकाशन हो रहा है. फिलहाल प्रबंधन इसे हरिणाया में पहले लांच करने की तैयारी कर रहा है.

सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन हरियाणा के बाद अखबार को दिल्ली से लॉन्च करेगा. ताकि दिल्ली और एनसीआर के पंजाबी पाठकों तक अखबार की पहुंच बनाई जा सके. जागरण समूह ने इस अखबार की लांचिंग पंजाब में वर्ष 2011 के जून माह में की थी. अखबार प्रबंधन बड़े पंजाबी मार्केट को ध्‍यान में रखकर जागरण पंजाबी के विस्‍तार की योजना को मूर्त रूप देने में जुटे हुए हैं. संभावना है कि जल्‍द ही यह अखबार हरियाणा से लांच हो जाएगा क्‍योंकि हरियाणा में समूह के प्रिंटिंग यूनिट चल रहे हैं, जिसके चलते अतिरिक्‍त प्रयास करने की जरूरत नहीं है.

प्रबंधन का मानना है कि हरियाणा में दैनिक जागरण का मजबूत नेटवर्क है, लिहाजा इस नेटवर्क के सहारे ही वे पंजाबी अखबार को लांच करने के बाद जल्‍द से जल्‍द पंजाबी भाषियों पर अपनी पकड़ बना सकेंगे. नेटवर्क मजबूत होने के चलते उन्‍हें कंटेंट लेबल पर भी ज्‍यादा दिक्‍कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. वे हरियाणा की बड़ी खबरों को पंजाबी के रिपोर्टरों के साथ हिंदी के रिपोर्टरों से कोआर्डिनेट कर बेहतर प्रजेंटेशन दे सकते हैं.

दैनिक जागरण के प्रिंट लाइन में बदलाव के बाद भी नहीं चेता उत्‍तराखंड सूचना विभाग

दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी से जागरण का अवैध प्रकाशन लंबे समय से कर रहा था. वो देहरादून के रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर पर ही हल्‍द्वानी से अखबार का प्रकाशन कर रहा था. इस तरह वो हल्‍द्वानी को अलग संस्‍करण घोषित करते हुए इसके लिए अलग रेट पर विज्ञापन भी प्राप्‍त कर रहा था. यानी पूरी तरह गलत तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगा रहा था. इस बात की जानकारी होते हुए भी राज्‍य का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग इस मामले में अंधा और बहरा बना हुआ था.

इस मामले को जब उत्‍तराखंड के पत्रकार एवं एक्टिविस्‍ट अयोध्‍या प्रसाद भारती ने कई मंचों से उठाना शुरू किया तो दैनिक जागरण प्रबंधन घबरा गया तथा उसने अपने प्रिंट लाइन में पुराने रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर को हटाकर आवेदित किए जाने की सूचना प्रकाशित करने लगा. पर इतना होने के बाद भी उत्‍तराखंड का सूचना विभाग अयोध्‍या प्रसाद द्वारा मांगी गई सूचना का सही उत्‍तर देने की बजाय गोल मोल तरीके से जवाब देकर मामले को निपटा दिया.

हालांकि जागरण ने अपने प्रिंट लाइन में चेंज करके खुद मान लिया कि वो हल्‍द्वानी में गलत तरीके से अखबार का प्रकाशन कर रहा था, इसके बाद भी उत्‍तराखंड सूचना विभाग ने उसको दिए जाने वाले विज्ञापन पर किसी प्रकार का रोक नहीं लगाया है, बल्कि अभी भी सरकारी विज्ञापन गलत तरीके से दैनिक जागरण को दिए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इसमें सूचना विभाग के वरिष्‍ठों की भी पूरी मिली भगत है. ऐसे ही मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट ने हिंदुस्‍तान के खिलाफ जांच का आदेश दिया है.


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जागरण, हल्‍द्वानी के अवैध प्रकाशन का मामला : अयोध्‍या प्रसाद ने अपर निदेशक को लिखा पत्र

बिना रजिस्‍ट्रेशन के हल्‍द्वानी से अखबार निकाल रहा था दैनिक जागरण

दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी में अखबार का अवैध प्रकाशन कर रहा है. बिना रजिस्‍ट्रेशन के यह अखबार देहरादून के रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर पर अखबार को प्रकाशित कर रहा है, जो पीआरबी एक्‍ट के तहत अवैध तथा गैरकानूनी है. इस बात का खुलासा पत्रकार एवं एक्टिविस्‍ट अयोध्‍या प्रसाद भारती द्वारा आरएनआई से मांगे एक सूचना से हुआ है. आरएनआई ने जानकारी दी है कि जागरण का उत्‍तराखंड में केवल देहरादून से रजिस्‍ट्रेशन है, जबकि हल्‍द्वानी में केवल प्रिंटिंग यूनिट है.

आरएनआई द्वारा दी गई सूचना से खुलासा हुआ है कि दैनिक जागरण उत्‍तराखंड में अवैध तरीके से स्‍वतंत्र तरीके से अखबार का प्रकाशन कर रहा है. इसी तरह के प्रकाशन के मामले में बिहार में हिंदुस्‍तान अखबार पर मामला चल रहा है. पटना हाई कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए मुंगेर के एसपी तथा डीएम को तीन महीने में जांच पूरा करने का निर्देश दिया है. माना जा रहा है कि जागरण के इस फर्जीवाड़े पर जल्‍द कानूनी कार्रवाई हो सकती है. 

बीटीवी से रवींद्र कैलासिया का इस्‍तीफा, नवदुनिया जाएंगे

दैनिक भास्‍कर के चैनल बीटीवी से खबर है कि रवींद्र कैलासिया ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे इस चैनल के संपादक थे. रवींद्र अपनी नई पारी दैनिक जागरण समूह के अखबार नवदुनिया के साथ करने जा रहे हैं. नईदुनिया का भोपाल में नवदुनिया के नाम से प्रकाशन होता है. रवींद्र को यहां पर न्‍यूज एडिटर बनाया जा रहा है. संभावना है कि वे 1 मार्च को अपनी जिम्‍मेदारी संभाल लेंगे.

रवींद्र कैलासिया मध्‍य प्रदेश के तेजतर्रार तथा जानेमाने पत्रकार हैं. बीटीवी से इनका जाना भास्‍कर समूह के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. रवींद्र कैलासिया लगभग तीन दशकों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत 84 में नईदुनिया के साथ की थी. नवदुनिया के साथ ये घर वापसी कर रहे हैं. इसके अलावा इन्‍होंने चौथा संसार, नवभारत, दैनिक भास्‍कर, पत्रिका को भी लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं. उल्‍लेखनीय है कि पिछले दिनों भास्‍कर समूह ने हैथवे से अपना टाइअप खतम कर लिया था, जिसके बाद से ही बीटीवी का संचालन बंद होने के कगार पर था. 

जागरण में छपी बच्‍चे को बेचने की खबर ने पकड़ा तूल, मामला पुलिस के पास पहुंचा

रायबरेली में दैनिक जागरण द्वारा बच्‍चे को बेचे जाने को लेकर प्रकाशित की गई खबर के मामले ने तूल पकड़ लिया है. ऑल इंडियन मेडिकल ए‍सोसिएशन के विरोध के बाद अब इस मामला पुलिस तक पहुंच गया है, जिसके बाद एसपी राजेश पाण्‍डेय ने इसकी जांच सीओ सिटी को सौंपी है. खबर है कि दैनिक जागरण ने रायबरेली के डाक्‍टर संजय रस्‍तोगी, जो कृष्‍णा नर्सिंग होम का संचालन करते हैं, के बारे में लिखा कि इनके अस्‍पताल में पैदा हुआ बच्‍चा किसी थर्ड आदमी के पास पहुंच गया. 

बताया जा रहा है कि किसी कुंवारी लड़की को बच्‍चा पैदा हुआ था, जिसके बाद ये बच्‍चा उस परिवार की जगह किसी दूसरे के पास चला गया. इस जाने को लेकर जागरण ने खबर प्रकाशित की तथा बच्‍चा को बेचे जाने की बात कही गई. बस यही सं मामले ने तूल पकड़ लिया. डा. संजय रस्‍तोगी ने आरोप लगाया कि दैनिक जागरण के ब्‍यूरोचीफ आशुतोष अग्निहोत्री ने उनसे पांच लाख रुपये देने की मांग की. पैसे नहीं देने पर उन्‍होंने यह खबर प्रकाशित कर दी. इस खबर के बाद उनके साथ ऑल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के लोग भी खड़े हो गए हैं. 
 
मेडिकल ऐसोसिएशन के लोग एसपी के पास पहुंचकर पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं. इस संदर्भ में डा. संजय रस्‍तोगी का कहना है कि उनके यहां बच्‍चे का जन्‍म हुआ. सारी लिखा-पढ़ी होने के बाद हमने कार्रवाई की. अब हास्‍पीटल से जाने के बाद बच्‍चे का परिवार क्‍या करता है उससे चिकित्‍सालय या डाक्‍टर को क्‍या मतलब हो सकता है? दैनिक जागरण के लोग अति कर दिए हैं. ये लोग जबरदस्‍ती न्‍यूज बनाकर मुझे ब्‍लैकमेल करना चाहते थे. इसलिए इस तरह की  घटिया आरोप भी लगाया. डाक्‍टरों ने दैनिक जागरण का बायकाट कर दिया है. हम इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे. 
  
दूसरी तरफ इन आरोपों के संदर्भ में दैनिक जागरण के ब्‍यूरोचीफ आशुतोष अग्निहोत्री का कहना है कि ब्‍लैकमेलिंग का आरोप लगाना बहुत ही आसान है. हमने पूरे खबर को डीएम-एसपी तथा अपने वरिष्‍ठों को जानकारी देने के बाद कवर किया. अगर कोई बच्‍चा पैदा होता है तथा फर्स्‍ट पार्टी से होते हुए सेकेंड और थर्ड पार्टी के हाथों में पहुंच जाता है तो यह किसी भी पत्रकार के लिए खबर है. जिस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं वो सरासर गलत हैं, मैंने डाक्‍टर का पक्ष लेने के लिए फोन किया लेकिन उन्‍होंने फोन काट दिया. आप तीस सेकेंड की बातचीत में किसे ब्‍लैकमेल कर सकते हैं. अगर मैंने ब्‍लैकमेल करने की कोशिश की है तो इसकी लिखित शिकायत पुलिस को क्‍यों नहीं दे रहे हैं? 

डाक्‍टरों का आरोप – अवैध उगाही के लिए जागरण ने छापी गलत खबर

दैनिक जागरण की पत्रकारिता हमेशा से संदिग्‍ध रही है. जागरण में ऐसे लोग ही लम्‍बे समय तक टिके रह सकते हैं जिन्‍हें दो का पांच करना आता हो. जो कैसे भी करके अपना तथा अपनी कंपनी का जेब भर सकते हों, चाहे इसके लिए उन्‍हें कितना भी गलत सही करना पड़े, नीचे गिरना पड़े. ताजा मामला उत्‍तर प्रदेश के रायबरेली जिले का है. यहां डाक्‍टरों ने दैनिक जागरण द्वारा पैसे के लिए गलत खबर प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए विरोध किया है.

ऑल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रायबरेली के बैनर तले बैठक करके डाक्‍टरों ने दैनिक जागरण के बहिष्‍कार का फैसला लिया है. डाक्‍टरों का आरोप है कि अखबार के ब्‍यूरोचीफ पैसा के लिए गलत खबर प्रकाशित की, पैसा नहीं मिलने पर उसने कई डाक्‍टरों की गरिमा हनन करने वाली खबरें छाप डाली. डाक्‍टरों ने तय किया है कि वे न तो दैनिक जागरण अखबार पढ़ेंगे और ना ही इसे किसी प्रकार का विज्ञापन देंगे. वे लोग अपने परिचितों को इस अखबार से दूर रहने की अपील करेंगे.

पेड न्‍यूज में माहिर इस अखबार पर गलत खबरें प्रकाशित करके वसूली करने के आरोप तमाम जगहों पर पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन इस बार तो रायबरेली के डाक्‍टर बाकायदा इसके खिलाफ अपना मोर्चा खोल दिया है. धीरे धीरे ही सही दैनिक जागरण अब लोगों के नजरों से उतरता जा रहा है. अपने कर्मचारियों का खून चूसने वाला यह संस्‍थान पत्रकारों को कम पैसा देता है और मानकर चलता है कि वे लोग दलाली करके अपना खर्च निकाल लेंगे. डाक्‍टरों के विरोध का असर जागरण के प्रबंधन पर कितना पड़ेगा देखने वाली बात होगी.

जागरण ने इलाहाबाद से भेजा हिसार तो ज्ञानेश्‍वर ने भेजा नोटिस

दैनिक जागरण में फिर एक बार छंटनी जैसा माहौल बनाया जाने लगा है. पिछले दिनों कई यूनिट में एक-एक करके कर्मचारियों से इस्‍तीफे मांगे गए या उनका तबादला दूरदराज इलाकों में कर दिया गया. अब खबर इलाहाबाद से है. यहां पर मोडम यानी कम्‍युनिकेशन में कार्यरत ज्ञानेश्‍वर श्रीवास्‍तव का तबादला हिसार के लिए कर दिया गया. ज्ञानेश्‍वर एक दशक से भी ज्‍यादा समय से अखबार के साथ जुड़े हुए थे. माना जा रहा है कि उनको परेशान करने के लिए प्रबंधन ने ये तबादला किया है.

इसके बाद ज्ञानेश्‍वर ने हिसार ज्‍वाइन करने की बजाय लेबर कोर्ट में मुकदमा करते हुए प्रबंधन को नोटिस भिजवाया है. इसके बाद प्रबंधन में थोड़ी घबराहट है, परन्‍तु मामले को सलटाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके पहले भी बनारस में मजीठिया एवं कई मामलों को लेकर लेबर कोर्ट में मामला चल रहा है. इसमें भी प्रबंधन ने मामले को लेबर कोर्ट में लेकर जाने वाले काशी पत्रकार संघ से अखबार के पत्रकारों का इस्‍तीफा दिलवा दिया था.

दूसरी तरफ इलाहाबाद में कर्मचारियों का शोषण भी लगातार जारी है. कुंभ के नाम पर संपादकीय के लोगों का साप्‍ताहिक अवकाश समाप्‍त कर दिया गया है. अगर कोई किसी आवश्‍यक कार्य से छुट्टी पर जा रहा है तो उसके अवकाश को समायोजित किए जाने की बजाय उनका पैसा काटा जा रहा है. इसके चलते कर्मचारी काफी हत्‍तोसाहित एवं नाराज हैं. माना जा रहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड लागू होने की संभावनाओं को देखते हुए जागरण प्रबंधन अपने कर्मचारियों से इस तरह का व्‍यवहार कर रहा है ताकि वे लोग खुद इस्‍तीफा देकर यहां से चले जाएं.

जागरण, हल्‍द्वानी के अवैध प्रकाशन का मामला : अयोध्‍या प्रसाद ने अपर निदेशक को लिखा पत्र

उत्‍तराखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार अयोध्‍या प्रसाद भारती ने उत्‍तराखंड के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के अपर निदेशक डा. अनिल चंदोला को पत्र भेज कर गलत तरीके से सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को निस्‍तारित करने की जानकारी दी है. श्री भारती ने हल्‍द्वानी में दैनिक जागरण के अवैध प्रकाशन के संदर्भ में सूचना विभाग से कुछ जानकारियां मांगी थी, परन्‍तु विभाग द्वारा दी गई जानकारी से वे संतुष्‍ट नहीं थे.

श्री भारती ने सूचना विभाग के अपर निदेशक को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है. साथ ही इसकी प्रति महानिदेशक, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, देहरादून, सचिव, उत्तराखण्ड सूचना आयोग देहरादून एवं भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू समेत कई जगहों पर भेजी है. नीचे श्री भारती द्वारा डा. अनिल चंदोला को दी गई सूचना की प्रति.


सेवा में,
डॉ0 अनिल चंदोला जी,
अपर निदेशक/अपीलीय अधिकारी
सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, उत्तराखण्ड
12, ईसी रोड, देहरादून

विषय : सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के गलत तरीके से अपील निस्तारित करने के संबंध में सूचना।

महोदय,

कृपया अपने कार्यालय पत्रांक 59/सू.एवंलो.सं.वि./(प्रशा) 395/2012 (सूआ) दिनांक 25 जनवरी 2013 का संदर्भ ग्रहण करें। इस संदर्भ में मुझे कहना है कि विभागीय अधिकारी बहुत चतुर आदमी हैं और अपनी चतुराई के कारण ही इस विभाग में लंबे समय से बने हुए हैं। साथ ही विभाग में अनियमितताओं की परंपरा लगातार बनी हुई है। इसका अनुभव और जानकारी मुझे लंबे समय से है। विभाग में हो रही अनियमितताओं को अपने शब्द कौशल से, अर्थात कुतर्कों का सहारा लेकर विभाग के अधिकारी अब तक ‘जस्टिफाई’ करते आए हैं। दैनिक जागरण, हल्द्वानी से संबंधित प्रकरण को आपने उपरोक्त पत्र के माध्यम से इस तरह निस्तारित करने का प्रयास किया है जैसे यह सिर्फ सूचना न देने या गलत सूचना देने का मामला हो, और मैंने आयोग से विभागीय अधिकारियों की गलत शिकायत करते हुए सूचनाएं दिलाए जाने का अनुरोध किया हो। और बाद में अपीलीय अधिकारी ने नियमानुसार सब ठीक कर दिया हो। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि-

1. मैं जानता था कि दैनिक जागरण, हल्द्वानी को सूचना विभाग अपने विभागीय नियमों को धता बताते हुए विगत 8-9 वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन के सुविधाएं दे रहा है, अर्थात प्रकाशन अवैधानिक था। मैंने यह जानने के लिए कि किस प्रावधान के अंतर्गत ऐसा किया जा रहा है, यह बताते हुए आरटीआई आवेदन भेजा था कि दैनिक जागरण, हल्द्वानी संस्करण अपंजीकृत है।

2. मुझे लोक सूचना अधिकारी ने 03.09.2012 को पत्र प्रेषित कर जानकारी दी कि दैनिक जागरण, हल्द्वानी पंजीकृत है, उन्होंने पंजीकरण नंबर भी अंकित किया।

3. लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी कि दैनिक जागरण, हल्द्वानी पंजीकृत है, असत्य थी (यह अखबार आज भी पंजीकृत नहीं है, और नियमों की धज्जियां अवैधानिक रूप से उड़ाकर सूचना विभाग इसे सुविधाएं जारी रखे हुए है, दैनिक जागरण प्रबंधन ने करीब साढ़े आठ साल बिना पंजीकरण के सुविधाएं विभाग से प्राप्त की और ऐसे ही मामलों में जब बिहार में उस पर शिकंजा कसने
लगा तो जुलाई 2012 में उसने दैनिक जागरण, हल्द्वानी को वर्ष, अंक, और बदली हुई प्रिंट लाइन तथा पंजीकरण संख्या के साथ छापना प्रारंभ कर दिया। इसकी शिकायत भी दिनांक 27.09.2012 को महानिदेशक, सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग एवं मा0 उत्तराखण्ड सूचना आयोग से की थी, और सूचनाएं नहीं मांगी थीं, मैंने आयोग को भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक का कार्यालय से प्राप्त यह जानकारी कि दैनिक जागरण, हल्द्वानी पंजीकृत नहीं है, के पत्र की प्रति भी भेजी थी। इस मामले में मा0 सूचना आयोग ने सुनवाई के लिए 13.12.2012 को भेजे पत्र सं0 15390/उसूआ./अपील/2012-13 में 28.12.2012 को आयोग में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। मैं व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित न हो सका लेकिन मैंने अपना पक्ष फैक्स और ईमेल के माध्यम से भेज दिया था, अब आयोग में फैक्स और ईमेल से प्राप्त आवेदक के पक्ष को महत्व दिया जाता है अथवा नहीं यह तो मुझे मालूम नहीं।

4. दिनांक 21 जनवरी 2013 को मेरे परिचित पत्रकारों के समक्ष मैंने दैनिक जागरण, हल्द्वानी के प्रबंधक के अनुरोध पर महानिदेशक सूचना को संबोधित पत्र में यह लिखकर दे दिया कि प्राप्त सूचनाओं से मैं संतुष्ट हूं और मुझे कोई और सूचना नहीं चाहिए।

5. मुझे यह लिखकर देने में कोई दिक्कत नहीं थी, कि प्राप्त सूचनाओं से मैं संतुष्ट हूं क्योंकि मुझे वास्तव में सूचना विभाग से जैसी सूचना मिलने की आशा थी, वैसी मिल गई थी। मेरा अनुभव है कि अनियमितताओं के मामले में यह विभाग गलत सूचना देता है। और वैसा ही इस प्रकरण में हुआ।

6. इसकी जानकारी मैंने माननीय सूचना आयोग और महानिदेशक को दी थी और यह उन्हीं पर छोड़ दिया था कि इसमें वे क्या वैधानिक कार्रवाई करते हैं। कोई अपील कहीं नहीं की थी।

7. प्रकरण सूचना देने या नहीं देने का फिर रह ही नहीं गया, बल्कि प्रकरण नियमों की अनदेखी कर किसी को लाभ पहुंचाने और ऊपर से झूठ बोलने और कुतर्कों के जरिये अपनी बात को ‘जस्टिफाई’ करने का है। प्रकरण सिर्फ दैनिक जागरण का नहीं है, ऐसे प्रकरणों का विभाग में अनवरत सिलसिला जारी है।

8. मेरी नीयत पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया है साथ ही प्रकरण को अपीलीय अधिकारी ने गलत तरीके से निस्तारित किया है, इसलिए मैं वस्तुस्थिति संबंधितों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं। मैं अच्छे-बुरे परिणाम की चिंता करने की मानसिकता से बहुत पहले ऊपर उठ चुका हूं।

भवदीय
अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ (पत्रकार)
महतोष, गदरपुर-263152 (ऊधम सिंह नगर) मो0 9897791822

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषित: 1. मा0 महानिदेशक, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, देहरादून,
2. सचिव, उत्तराखण्ड सूचना आयोग देहरादून,
3. मा0 अध्यक्ष-भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली,
4.संपादक- भड़ास4मीडिया, नई दिल्ली,
5.संपादक-भड़ास4इंडिया देहरादून एवं अन्य

दिनांक 16.02.2013

नामधारी के समर्थकों ने जागरण के पत्रकार संजय को दी धमकी

मुरादाबाद में दैनिक जागरण के पत्रकार को धमकी मिली है. पोंटी चढ्डा बंधु हत्याकांड में पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बनाए गए सुखदेव सिंह नामधारी का नाम लेकर कुछ लोग पत्रकार संजय रुस्तगी को को धमकी दे रहे हैं. संजय जागरण से जुड़े हुए हैं. फोन करने वाले खुद को सुखदेव सिंह नामधारी का बेटा, भाई और करीबी बता रहे हैं. धमकी मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित में शिकायत दे दी गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

संजय के पास यह फोन 16 फरवरी से आने शुरू हुए हैं. दिल्ली पुलिस ने 15 फरवरी को पोंटी चढ्डा और उनके भाई हरदीप सिंह चढ्डा की हत्या की जांच के बाद जो चार्जशीट अदालत में दाखिल की है उसमें सुखदेव सिंह नामधारी को हत्या की साजिश का मुख्य अभियुक्त बनाया गया है. संजय ने इससे संबंधित खबर प्रकाशित की थी, इन्‍हीं कुछ खबरों को लेकर रविवार को जागरण के प्रबंधक अनिल अग्रवाल और मुख्य संवाददाता संजय रुस्तगी को दोपहर दो बजे के बाद मोबाइल फोन के जरिए दो बार धमकी दी गई. फोन करने वाले वाले ने खुद को सुखदेव सिंह नामधारी का बेटा बताते हुए जान से मारने की धमकी दी. 

इसके बाद दूसरे नंबर से आए फोन पर उधर से नामधारी का करीबी बताते हुए संक्षिप्त बात की गई और फोन काट दिया गया. सोमवार को पूर्वाह्न सवा ग्यारह बजे दूसरे नंबर से फिर कॉल आई और नाम पूछकर धमकाना शुरू कर दिया. यहा भी कई तरह की धमकी दी गई. फिर मंगलवार को दिन में लगभग दो बजे एक अन्य मोबाइल नंबर से संजय के फोन पर कॉल आई. दूसरी तरफ से बात करने वाले ने खुद को रंधावा बताते हुए धमकी दी. इस दौरान यूनिट प्रबंधक के पास भी कई फोन आते रहे. धमकी की घटना से परेशान एसएसपी नीलाब्ज चौधरी को पूरे मामले से अवगत करवाते हुए लिखित में शिकायत दी गई है. गौरतलब है कि पोंटी तथा हरदीप दोनों भाई मूल रूप से मुरादाबाद के ही रहने वाले थे.

जागरण, बनारस से अमित श्रीवास्‍तव एवं सुरेश कुमार का तबादला

मजीठिया वेज बोर्ड के लागू होने की संभावनाओं को देखते हुए जागरण में एक बार फिर हलचल है. खबर है कि दैनिक जागरण, वाराणसी आईटी इंजीनियर अमित श्रीवास्‍तव का तबादला इलाहाबाद के लिए कर दिया गया है. वे पिछले बारह सालों से दैनिक जागरण को अपनी सेवा दे रहे थे. उन्‍हें प्रमोट करके इलाहाबाद में आईटी इंचार्ज बना दिया गया है, परन्‍तु माना जा रहा है कि यह कार्रवाई उन्‍हें परेशान करने के लिए की गई है.

उनके अलावा पेजीनेटर सुरेश कुमार स्‍थानांतरण हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के लिए कर दिया गया है. वे भी लंबे समय से यहां पर कार्यरत थे. बताया जा रहा है कि यहां से कुछ और लोगों का तबादला किए जाने की लिस्‍ट तैयार कर लिया गया है. उल्‍लेखनीय है कि पिछले साल भी यहां से कई पुराने लोगों का तबादला दूर दराज इलाकों में किया गया था तथा कुछ लोगों से इस्‍तीफा मांग लिया गया था. मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश न लागू करना पड़े इसके लिए जागरण ने अपने कर्मचारियों से हस्‍ताक्षर भी कराए थे. 

दैनिक जागरण, पानीपत से संतोष श्रीवास्‍तव का इस्‍तीफा

दैनिक जागरण, पानीपत से खबर है कि संतोष श्रीवास्‍तव से प्रबंधन ने इस्‍तीफा मांग लिया है. वे यहां पर विज्ञापन मैनेजर के पद पर कार्यरत थे. सूत्रों का कहना है कि उनपर विज्ञापन में कुछ गड़बड़ी के आरोप लगे थे. जांच के बाद प्रबंधन ने उनसे इस्‍तीफा ले लिया. संतोष काफी समय से जागरण से जुड़े हए थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू कर रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. वे कई और संस्‍थानों को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 

विज्ञापन में गड़बड़ी के आरोप में जागरण के मैनेजर की नौकरी गई

विज्ञापन में मोटी रकम का खेल करने के आरोप में दैनिक जागरण के एक विज्ञापन मैनेजर को अपनी नौकरी से हाथ धोना पडा है. सोनीपत कार्यालय में तैनात अवंति कुमार को भ्रष्टाचार के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया है. भवानी पिगमेंट खरखौदा, आरके इंस्टीटयूट पैरा मेडिकल कालेज गन्नौर एवं हरियाणा प्लेसमेंट सोनीपत के प्रबंधन ने विज्ञापन में घोटाले की शिकायत की थी, जिस पर कानपुर से सीधी कार्रवाई की गई.

बताया जा रहा है कि अवंति का व्यवहार भी अपने सहयोगियों के प्रति ठीक नहीं था. यही कारण था कि बेस्ट पर्फामर राहुल शर्मा ने जागरण का दामन छोडकर दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया तो उमेश भी बाय बाय कह गए.

जागरण में फिर छंटनी शुरू, नोएडा में दो लोगों से मांगे गए इस्‍तीफे

दैनिक जागरण में एक बार फिर छंटनी की तलवार चलनी शुरू हो गई है. इधर, कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई हो रही है तो दूसरी तरफ जागरण में एक बार फिर कत्‍लेआम करने की तैयारी चल रही है. पिछले दिनों बरेली में दो लोगों को निकाले जाने का फरमान सुनाया गया था तो अबकी दो लोग नोएडा में शिकार बनने वाले हैं. बताया जा रहा है कि टीपी कम्‍युनिकेशन में दो दशक से कार्यरत गिरीश मिश्रा एवं विजय कोहली को प्रबंधन ने इस्‍तीफा देने का फरमान सुनाया है. 

हालांकि अभी किसी ने इस्‍तीफा नहीं दिया है. गिरीश मिश्र ने इस्‍तीफा देने से मना कर दिया है तो विजय कोहली मेडिकल पर चल रहे हैं. बीस सालों से ज्‍यादा की सेवा देने के बाद निकाले जाने के फरमान से दोनों लोग हतप्रभ हैं. विरोध के बाद इस मामले को प्रबंधन ने कुछ दिन के लिए टाल दिया है, पर सूत्रों का कहना है कि इन लोगों का हिसाब फाइनल कर दिया गया है. प्रबंधन इनसे किसी भी कीमत पर इस्‍तीफा लेगा. 
 
इन लोगों को बताया गया है कि अब इनका विभाग बंद किया जा रहा है, इसलिए इनकी जरूरत अब संस्‍थान को नहीं है. खबर है कि यह सब कुछ मजीठिया वेज बोर्ड के लागू होने के अंदेशे को देखते हुए किया जा रहा है. गौरतलब है कि इसके पहले भी दैनिक जागरण पिछले साल अपने पूरे संस्‍थान में सैकड़ों लोगों की छंटनी कर चुका है, जबरिया नौकरी से निकाल चुका है. कई लोग इसके खिलाफ लेबर कोर्ट एवं अन्‍य सक्षम अदालतों में मुकदमा दायर कर रखा है. 

आईपीसी और सीआरपीसी को लेकर दैनिक जागरण, बनारस में बवाल

दैनिक जागरण, वाराणसी में एक खबर को लेकर बवाल मचा हुआ है. बकायदे संपादकीय प्रभारी और खबर लिखने वाले रिपोर्टर के बीच एसएमएस युद्ध छिड़ा हुआ है. जो खबर लिखी गई है उसमें सीआरपीसी और आईपीसी के बीच अंतर रिपोर्टर को न समझ में आने के चलते अर्थ का अनर्थ हो गया है. सीआरपीसी यानी अपराध प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक 2010 को 23 दिसम्‍बर 2010 को लोकसभा में पारित किया गया था. हालांकि इस धारा में संशोधन करने की बात 2006 से ही चल रही थी. 

1973 में बने सीआरपीसी में यह दसवां संशोधन था. इस संशोधन में गवाहों का मुकर जाना, महिलाओं को अधिक संरक्षण समेत कई मुद्दे शामिल थे. पर इसमें सबसे अहम मुद्दा था सीआरपीसी की धारा 41 में संशोधन. सीआरपीसी की धारा 41 के अंतर्गत पुलिस को गिरफ्तारी के अधिकार दिए गए हैं. जिसमें 41 (1) में (ए) से लेकर (आई) तथा (2) यानी दस स्थितियों में पुलिस किसी को भी बिना मजिस्‍ट्रेट के आदेश के गिरफ्तार कर सकती थी. इस धारा का काफी दुरुपयोग होने की भी शिकायतें थी. इसी आधार पर संसद ने लगभग साल भर पहले सीआरपीसी की धारा 41 (1)(b) में परिवर्तन क‍र सात साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी.

इसी संशोधन को आधार बनाकर एलएन त्रिपाठी ने एक खबर 'कुछ शब्‍दों के हेरफेर से खाली हो गए हवालात' लिखी, यह खबर बाइलाइन लगी. पर एलएन सीआरपीसी की जगह आईपीसी लिख दिया. हालांकि यह खबर लिखे जाने के बाद कई जगह जांच भी हुई होगी, पर जागरण के तथाकथित विद्वानों को यह अंतर समझ नहीं आया. सुबह भी खबर को लेकर कोई दिक्‍कत नहीं थी, पर मामला तब बिगड़ा जब किसी वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता ने जागरण के संपादकीय प्रभारी राघवेंद्र चड्ढा को इसकी जानकारी दी. इसके बाद संपादकीय प्रभारी ने ग्रुप एसएमएस कर सभी लोगों को बताया कि यह खबर गलत है तथा सीआरपीसी की जगह आईपीसी हो गया है (हालांकि भड़ास के पास जो एसएमएस मौजूद है उसमें संपादकीय प्रभारी ने खुद प्रोसिजर की अंग्रेजी गलत लिखी हुई है), इसलिए इस खबर अनर्थ हो गया है.

इसके बाद एलएन ने भी गुडमार्निंग करते हुए संपादकीय प्रभारी को मैसेज भेजा और लिखा कि आपसे इस तरह एकतरफा प्रतिक्रिया की उम्‍मीद मुझ जैसे रिपोर्टर को नहीं होती. इसके बाद भी कुछ एसएसएम युद्ध हुआ. अब खबर है कि अखबार में मामला पूरा गरम है. अखबार की तो छीछालेदर हुई ही कार्यालय के अंदर भी माहौल गरम है. ये वही एलएन त्रिपाठी हैं, जिन्‍होंने जागरण की आंतरिक परीक्षा में टॉप किया था. इस संदर्भ में जब सिटी प्रभारी जय प्रकाश पांडेय से जानने की कोशिश की गई तो उन्‍होंने अपने परिवार के साथ होने की बात कहकर आईपीसी या सीआरपीसी से संबंधित किसी खबर की जानकारी से इनकार कर दिया.

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कुछ शब्दों के हेरफेर से खाली हो गये हवालात

एल. एन. त्रिपाठी, वाराणसी :  कभी शिकायत के बिना ही हवालात की सैर करा दी जाती थी। किस जुर्म में पकड़ा गया है, कई-कई दिन तक यही पता नहीं चलता था। अब तो एफआईआर और बार बार की गुहार के बाद भी धरपकड़ नहीं हो रही। आईपीसी की एक धारा की शब्दावली में जरा से परिवर्तन ने गजब का असर दिखाया है। इसमें पुलिस से गिरफ्तार करने या न करने की वजह भर पूछी गई है। छोटे से सवाल ने अधिकांश थानों के हवालात खाली करा दिए हैं। करीब एक माह से यही हालात हैं। गिरफ्तारी के आंकड़े दस प्रतिशत से भी कम हो गए हैं। जनता हैरान है तो बात बात पर हवालात की सैर कराने वाली पुलिस खुद भी खासी परेशान है। आईपीसी की धारा-41 पुलिस को बिना वारंट किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार देती रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों पुलिस के इस अधिकार में आंशिक परिवर्तन के निर्देश दिए। इस निर्देश के क्रम में डीजीपी बृजलाल ने एक नवंबर 2011 को आदेश जारी कर सात वर्ष या सात वर्ष से कम की सजा वाले अपराधों के मामले में किसी व्यक्ति को क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है, इसका कारण बताने को कहा। इसमें अगर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है तो उसका भी स्पष्ट कारण बताने को कहा गया है। साथ ही गिरफ्तार करने की एक प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। इस परिवर्तन ने पुलिस की व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है। पुलिस अब गिरफ्तार करने से बच रही है। खास कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के उल्लंघन के मामले में डीजीपी को तलब करने व दरोगा को दंड देने के बाद तो पुलिस ने गिरफ्तारी लगभग बंद ही कर दी है। अब तो जरूरी मामलों में भी गिरफ्तारी नहीं की जा रही। एक माह में गिरफ्तारी का आंकड़ा पूर्व के मुकाबले दस प्रतिशत तक सिमट गया है।

पुलिस के अधिकार में कोई कटौती नहीं :

हालांकि डीआईजी रामकुमार का कहना है कि अपराध नियंत्रण के मामले में पुलिस के अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पुलिस को ज्यादा उत्तरदायी बनाया गया है। आरोपी द्वारा कोई अन्य अपराध करने की संभावना होने, विवेचना के लिए जरूरी होने, साक्ष्य नष्ट करने की संभावना होने, गवाहों को धमकाने या प्रलोभन देने की संभावना होने, न्यायालय में उपस्थित न होने या फरार होने आदि का कारण होने पर पुलिस किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है। पुलिस इस परिवर्तन के सहारे किसी पेशेवर अपराधी को यूं ही छोड़ नहीं सकती। विवेचक अगर किसी को गिरफ्तार नहीं करता तो उसे इसका भी कारण बताना पड़ेगा। इस परिवर्तन से पुलिस के कामकाज में सुधार होगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपी को नोटिस देने का प्रावधान किया गया है।

क्‍या मतलब है ‘उस नूतन ठाकुर’ का?

: जागरण के विधि संवाददाता ने लिखी खबर : लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट पेटिशन संख्या 11842/2011 दायर किया गया था. इस रिट पेटिशन के जरिये फेसबुक के खिलाफ पंजीकृत दो मुकदमे एसटीएफ या किसी विशेषज्ञ संस्था को दिये जाने की प्रार्थना की थी.

कल हाई कोर्ट इलाहबाद की लखनऊ बेंच में जस्टिस एस.एन. शुक्ला व जस्टिस सुरेन्द्र विक्रम सिंह राठौर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते समय प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश एवं डीजीपी यूपी को आदेश दिया कि वे राज्य सरकार द्वारा लखनऊ और आगरा में खोले गए दोनों साइबर पुलिस स्टेशन के लिए तत्काल पर्याप्त संख्या में स्टाफ उपलब्ध कराएं ताकि साइबर मामलों में तीव्रता से विवेचना की जा सके.

इस सम्बन्ध में कुछ अन्य समाचार पत्रों के साथ दैनिक जागरण के लखनऊ नगर संस्करण के आज दिनांक 14 दिसंबर 2011 के अखबार में पृष्ठ सात पर भी “प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को दिये निर्देश- जांच के लिए पर्यात स्टाफ दें” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई. लेकिन अन्य समाचार पत्रों की तुलना में दैनिक जागरण में यह खबर कुछ इस तरह प्रकाशित हुई कि कई जगह अर्थ का अनर्थ हो गया. खबर में लिखा था- “यह आदेश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला व न्यायमूर्ति एसवीएस राठौड की खंडपीठ ने उस नूतन ठाकुर की ओर से दायर याचिका पर दिये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस मामले में प्रतिशपथ पत्र दायर कर पीठ से बताया गया कि साइबर क्राइम की विवेचना के लिए विशेष जांच दल बनाया गया है, जो लखनऊ और आगरा में है. यह भी कहा गया कि इन दलों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है ऐसे में जांच शीघ्रता से नहीं हो पाती.”

मुख्य सवाल यह है कि यहाँ “उस नूतन ठाकुर” का क्या अर्थ हुआ जब इस शब्द के आगे उसे किसी अन्य तथ्य से जोड़ने वाली कोई अन्य बात नहीं लिखी हुई है. इससे तो कुछ ऐसा ही मालूम पड़ता है  जैसे संवाददाता द्वारा कोई बात कही जा रही थी और अचानक किसी भी कारण से उन्होंने अपनी बात नहीं कहीं. स्थिति जो भी हो पर इतना तय है कि यहाँ अनावश्यक रूप से नाम के आगे “उस” शब्द के प्रयोग से जिस व्यक्ति के नाम के आगे यह शब्द लगाया गया उनको और पाठकों को जरूर एक अजीब दुविधा में डाल दिया गया. वैसे इसके आगे वाली पंक्ति में भी गड़बड़ी है क्योंकि “राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं” वाक्य का भी कोई स्पष्ट अर्थ नहीं समझ में आ रहा है. अब यह तो इस समाचार के लेखक ही जानते होंगे कि “उस नूतन ठाकुर” और “राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं” जैसे पदों से उनका क्या आशय था.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

रामेश्‍वर पांडेय ने हिस्‍ट्रीशीटर को बना दिया पत्रकार

: कई मुकदमें दर्ज हैं इस पत्रकार के खिलाफ : जी हां, यह सौ फीसदी सच है। इस हिस्‍ट्रीशीटर पर हत्‍या तक का आरोप है। बताते हैं कि पुलिस इतनी आजिज हो गई थी कि इसके इनकाउंटर तक के आदेश हो गए थे। प्रहलाद सिंह नाम के एक सहकारिता माफिया के सौजन्‍य से दैनिक जागरण में बतौर स्ट्रिंगर इसका प्रवेश हुआ। मालिकान तक लगातार इसकी शिकायतें जाती रही। अखबार की नौकरी का लाभ लेकर इस शख्‍स ने सिंचाई विभाग, लोनिवि के कई इंजीनियरों से लाखों दुहा। कई तो इतने त्रस्‍त हुए कि गोरखपुर और महराजगंज से अपना स्‍थानांतरण करा लिया।

जागरण में एक साल पूर्व जब शैलेन्‍द्र मणि हटाओ अभियान शुरू हुआ तो इस शख्‍स ने स्‍टेट हेड रामेश्‍वर पांडेय को पकड़ लिया। बडहलगंज स्थित उनके गांव पर पंखे से लेकर कुर्सी का इंतजाम करने तक का काम संभाल लिया। यहां गोरखपुर में इसे जिम्‍मेदारी मिली कि पांडेय जी द्वारा बिहार से लाए गए केके शुक्‍ला को मजबूत करें। उनके अंगरक्षक के बतौर रहे। इस चक्‍कर में इस शख्‍स ने गोरखपुर कार्यालय के अंदर कई वरिष्‍ठों को बेइज्‍जत किया। आतंक बनाया। यह शख्‍स कार्यालय में रिवाल्‍वर लगाकर आता है।

एक बार किसी बात पर तत्‍कालीन सर्कुलेशन मैनेजर श्रीपाल पांडेय को खुलेआम कालर पकड़कर बेइज्‍जत किया। जिसकी शिकायत हुई। मगर पांडेय जी ने बचा लिया। इसे इसी साल केके शुक्‍ला के रिकमेंडेशन पर पांडेय जी ने परमानेंट करा दिया। अभी एक महीने पहले इसका प्रमोशन जूनियर रिपोर्टर से रिपोर्टर पद पर कर दिया गया। आइए इनकी हिस्‍ट्रीशीट देखें-

नाम- अरुण राय, हिस्‍ट्रीसीट नंबर 134 ए

मुकदमा तफसील

1- मुकदमा संख्‍या- 63, 1990, थाना कैंट, गोरखपुर, धारा 302
2-मुकदमा संख्‍या-273, 1991, थाना बेलीपार, धारा 392
3-मुकदमा संख्‍या-301, 1991, थाना बडहलगंज, धारा 392
4-मुकदमा संख्‍या-563, 2001 थाना बड़हलगंज, धारा 323, 504, 506
5-मुकदमा संख्‍या-385, 2003 थाना बड़हलगंज, धारा 419, 420, 467, 468, 471

वर्ष 2003 में जिस समय मुकदमा हुआ उस समय यह शख्‍स जागरण से जुड़ चुका था। बाद में अखबार के प्रभाव के चलते मुकदमे कायम नहीं हो पाए। हालांकि इसकी रंगदारी, वसूली और बंधक बनाकर संपत्ति लिखवाने, मकान खाली कराने, कब्‍जा कराने की गतिविधियां जारी रहीं। इस समय यह रामेश्‍वर पांडेय का एक नंबर लेफि्टनेंट है। उनके लिए भय बनाने से लेकर वसूली तक का काम करता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

पूजा पाठ करवाने के बाद ही सही हुई जागरण की मशीन!

: कानाफूसी : कहीं किसी नई जगह पर मशीनी चीज को स्‍थापित करने के लिए शायद पूजापाठ जरूरी होता है, नहीं तो मशीन ठीक से काम नहीं करती है, परेशान करने लगती हैं. हालांकि यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि दैनिक जागरण, अलीगढ़ में जो कुछ हुआ हम उसका सार संक्षेप बता रहे हैं. अब आप इसे श्रद्धा भी कह सकते हैं और अधंविश्‍वास भी यह आप पर छोड़ा जा रहा है. पर पूजा के बाद तो जागरण के कर्मी राहत महसूस कर रहे हैं.

अलीगढ़ में आज से लगभग दो सप्‍ताह पहले तक अखबार की प्रिंटिंग पुराने चंद्रा टाकिज में चल रही थी. जागरण प्रबंधन ने चंद्रा टाकिज को किराए पर लेकर यही पर प्रिंटिंग मशीन स्‍थापित करा दी थी. पिछले साल जागरण प्रबंधन ने अलीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया तालानगरी में प्‍लाट लिया था. उसी प्‍लाट पर दैनिक जागरण ने अपनी बिल्डिंग बनवाई तथा चंद्रा टाकिज में स्‍थापित मशीन को आठ-नौ दिन पहले उसी नए बिल्डिंग में लगवा दी. मशीन लगने के बाद प्रेस से छपाई भी शुरू हो गई. परन्‍तु यह क्‍या, आए दिन मशीन में कोई न कोई गड़गबड़ी तकनीकी खराबी रहने लगी. मैकेनिक तथा इंजीनियर भी इसको ठीक करते पर छोटी-मोटी गड़बड़ी आ ही जाती थी. इसी बीच किसी कर्मचारी ने कहा कि बिना पूजा पाठ के मशीन लगवाकर शुरू कर दिया गया है, इसलिए ही सारी समस्‍या आ रही है.

वैसे भी हिंदुस्‍तान के अलीगढ़ की धरती पर कदम रखने और उससे मिलने वाली चुनौतियों से परेशान दैनिक जागरण के स्‍थानीय वरिष्‍ठ लोगों ने कर्मचारी की बात पर विश्‍वास करते हुए 9 दिसम्‍बर, यानी जिस दिन हिंदुस्‍तान की लांचिंग थी, को तालानगरी वाले अपने बिल्डिंग में पूजापाठ कराया. बताया जा रहा है कि पूजा पाठ कराने के बाद से मशीन ठीक ठाक काम कर रही है. अब जागरण के कर्मचारियों की परेशानी कम हुई है. अब ये पूजा पाठ का असर है कि फिर इंजीनियरों और मैकेनिकों का, ये तो जागरण के लोग ही ठीक से बता सकते हैं, पर इससे जागरण वालों को राहत जरूर मिली है. अब वे हिंदुस्‍तान की चुनौतियों से निपटने को तैयार हैं.

मिड डे ने अपना दिल्‍ली एवं बंगलुरू एडिशन बंद किया

दिल्‍ली, बंगलुरू बेस्‍ड मिड डे के पत्रकारों के लिए बुरी खबर है. सूचना है कि मिड डे अपना दिल्‍ली एवं बंगलुरू एडिशन बंद कर दिया है. इस अखबार को बंद करने का कारण इसके लगातार घाटे में चलने को बताया गया है. इस सूचना के बाद से ही इसमें काम करने वाले कई दर्जन पत्रकार एवं गैर पत्रकारों में खलबली है. सभी को संस्‍थान की तरफ से शार्ट नोटिस दे दिया गया है. गौरतलब है कि इस समूह को कुछ साल पहले जागरण ग्रुप ने टेक ओवर किया था.

मिड डे के दोनों एडिशनों के बंद होने की जानकारी एक मेल के जरिए पत्रकारों को भेज दी गई है. कंपनी के सीईओ मंजीत घोषाल द्वारा भेजे गए इस मेल में अखबार के दोनों एडिशनों के बंद होने की सूचना दी गई है. हालांकि मिड डे का मुंबई एडिशन एवं इसके सेटेलाइट पुणे एडिशन को जारी रखने की बात कही गई है. वैसे इस बात को लेकर भी चर्चा है कि जागरण ग्रुप मजीठिया वेज बोर्ड के लागू होने की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया है.

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही जागरण ग्रुप ने मुंबई मिड डे में कार्यरत पत्रकारों से मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित कागज पर हस्‍ताक्षर करवाया था. पांच दिसम्‍बर को दिल्‍ली एवं बंगलुरू में प्रकाशित मिड डे का अंक इसका आखिरी अंक था. इस संदर्भ में नीचे सीईओ द्वारा भेजा गया ईमेल.  

Dear colleagues

It's with a heavy heart that I have to announce the closure of Mid-Day Delhi and Mid-Day Bangalore editions. Tomorrow's issue will be the last issue for both the editions. This has been necessitated by the prolonged losses we had to incur on these editions.

The idea behind starting these editions was to establish these brands in these cities and make a difference in the lives of the citizens there. We had begun well and were appreciated for the quality of product we put out. However, in a corporate scenario the books need to be balanced.

Due to the ever increasing competition in the print media space, the funds required for breakeven in these cities kept escalating. Finally, we had to take this call. We will however, continue to maintain a news bureau in Delhi and our sales offices in Bangalore and Delhi.

But, every dark cloud has a silver lining. The silver lining in this is that Mumbai Mid-Day now will have the strength to soar to greater heights. By cutting our losses in Delhi and Bangalore editions, we will be able to bolster our circulation in Mumbai.

Apart from the plan to channel these investments, Jagran group (our parent company) will invest a large sum in boosting Mid-Day's circulation in Mumbai. This will give our sales guys across the country to pitch Mumbai Mid-Day to clients and agencies in a new light.

We need to now concentrate on building brand Mid-Day in Mumbai and monetizing Mumbai Mid-Day's large increase in circulation and in this our sales colleagues in Delhi, Bangalore and Pune will have to play a significant part.

Gujrati Mid-Day and Inquilab continue to go from strength to strength. We are increasing the circulation of GMD at a brisk pace and will continue to do so. Inquilab has flourished in the north and we now have 14 editions in all and are far ahead of any competition in the Urdu space.

Mid-Day Pune is an extension of Mid-Day Mumbai just as the Pune city is an extension of Mumbai. Mid-Day Pune will continue to run at an ever increasing pace and we will be monitoring the Pune media market keenly to spot opportunities to improve the circulation of Midday Pune.

We will continue to invest aggressively in our digital properties as we believe that this is a medium whose time has come.

5th December, 2011 is an important day in the history of Mid-Day. Today, we will have to halt and think. Think about many of our colleagues who will have to move on.

It's a testing time for them as it is for us. Right now it might look dark but I am sure both of us will come out of this with flying colours. We wish them all the best in their future endeavors. We also need to think about the added responsibilities for all of us who remain in this great organization and who have to carry its legacy forward. Let's begin this phase of our journey with renewed vigour and conviction.

In conclusion, I can only say that all dreams may not fructify but that will only encourage us to try harder and bring us closer, marching forward with a vision which only we can realise. We strive for continuity and absolutes but are reminded time and again that change is the only constant.

In this time of great pain and heavy responsibility, I am sure God will give us the tenacity to walk on—and then to break into a run—and once again soar to live our destiny.

Cheers

Manajit Ghoshal

दैनिक जागरण ने गोरखपुर और बनारस में नहीं छापी अन्‍ना के रैली की खबर

दैनिक जागरण, भले ही अपने नम्‍बर एक अखबार कहे पर खबरों के मामले में यह अखबार अब नम्‍बर एक नहीं रह गया है. देश-विदेश की मीडिया में लगातार फोकस रहे अन्‍ना हजारे को इस अखबार ने गोरखपुर और बनारस एडिशन अपने पन्‍ने पर जगह नहीं दिया है. अन्‍य किन एडिशनों में जगह नहीं दिया है इसकी जानकारी तो नहीं है, पर ऐसा लग रहा है कि यह अखबार या तो अन्‍ना से बचना चाह रहा है या फिर इसके पास खबरों को लेकर कोई स्‍पष्‍ट विजन नहीं है.

दिल्‍ली में अन्‍ना समर्थकों कल एक रैली निकाली, जिसका कवरेज गोरखपुर तथा बनारस के अन्‍य अखबारों ने अपने-अपने हिसाब से किया है, पर दैनिक जागरण, गोरखपुर ने एक लाइन भी खबर नहीं छापा है, पर बनारस में अन्‍ना के रैली वाली एक फोटो के साथ किरण बेदी से बातचीत वाली खबर है, लेकिन रैली की खबर गायब है. बनारस से जुड़े अन्‍य जिलों के एडिशन से यह पूरी खबर ही गायब है. इसे लेकर अन्‍ना समर्थक काफी नाराज हैं तथा अखबार प्रबंधन पर भी तमाम तरह के आरोप और तोहमत मढ़ रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर में आंतरिक बदलाव के बाद असंतोष

: वरिष्‍ठ पत्रकार कमल किशोर सक्‍सेना की जगह मोहम्‍मद एखलाक बने आउटपुट हेड : दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर में आतंरिक घमासान मचा हुआ है. संपादकीय प्रभारी उमेश शुक्‍ल के रवैये से सीनियर पत्रकार काफी खफा है. खबर है कि अब तक आउटपुट हेड की जिम्‍मेदारी संभाल रहे डीएनई कमल किशोर सक्‍सेना से जिम्‍मेदारी ले ली गई है. उनकी जगह सीनियर सब एडिटर मोहम्‍मद एखलाक को आउटपुट हेड बना दिया गया है. बताया जा रहा है कि हाल ही में जागरण द्वारा आयोजित विभागीय परीक्षा में एखलाक फेल हो चुके हैं. इसके चलते यहां के पत्रकार और भी ज्‍यादा नाराज हैं कि काबिल पत्रकार की जगह एक फेल पत्रकार को आउटपुट हेड बना दिया गया है.

खबर है कि रात में मीटिंग करके पत्रकारों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है. इधर, नाराज कमल किशोर सक्‍सेना छुट्टी पर चले गए हैं. इनसे संपर्क करने की कोशिश की गई परन्‍तु उनका मोबाइल स्‍वीच ऑफ मिला. अब तक जनरल डेस्‍क की इंचार्जी संभाल रहे वरिष्‍ठ पत्रकार सुनील झा भी अब एखलाक के अंडर में काम करेंगे. दूसरी तरफ लोकल ब्‍यूरो चीफ को लेकर भी पत्रकारों में आक्रोश है. एक प्राइववेट कॉलेज में पढ़ाने वाले शिशिर कुमार को प्रबंधन ने ब्‍यूरोचीफ बना दिया है, जबकि उनसे सीनियर कई लोग इस पद के काबिल थे, उन सभी की अनदेखी कर दी गई है.

इस संदर्भ में जब जागरण के संपादकीय प्रभारी उमेश शुक्‍ल से बात की गई तो उन्‍होंने ऐसा किसी बदलाव से इनकार किया तथा कहा कि अगर आंतरिक बदलाव होते भी हैं तो वो रुटीन के मामले होते हैं और व्‍यवस्‍था को ठीक करने के लिए किए जाते हैं.

जागरण, बनारस : चीफ सब एडिटर करेंगे जिले में नौकरी, राजाराम का हस्‍ताक्षर से इनकार

दैनिक जागरण, वाराणसी से दो खबरें हैं. शुरुआत करते हैं चीफ सब एडिटर श्‍याम बिहारी श्‍यामल के तबादले की खबर से. श्‍यामल को बनारस से सोनभद्र भेज दिया गया है. यह सजा दी गई है वेबसाइट पर हुई एक गलती के चलते. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह गलती से ज्‍यादा आंतरिक राजनीति का परिणाम है. इसी कारण चीफ सब एडिटर श्‍यामल को सोनभद्र भेजा गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्‍हें प्रभारी बनाकर नहीं बल्कि सोनभद्र के ब्‍यूरोचीफ राकेश पाण्‍डेय का सहयोगी बनाकर भेजा गया है, जो पद में उनसे जूनियर हैं. लिखने-पढ़ने में माहिर श्‍यामल यहां की लॉबी को काफी समय से खटक रहे थे. पहले उन्‍हें सिटी चीफ से डाक पर लाया गया. अब सजा का बहाना बनाकर जंगल-पहाड़ पर लिखा-पढ़ी करने के लिए भेज दिया गया है. गलती तो एक बहाना है.

दूसरी खबर है जागरण के हस्‍ताक्षर अभियान की. यहां पर मशीन विभाग में कार्यरत हेल्‍पर राजाराम ने मजीठिया वेज बोर्ड के चलते चलाए जा रहे प्रबंधन के हस्‍ताक्षर अभियान पर साइन करने से इनकार कर दिया है. यह घटना शनिवार की है. राजाराम इसके पहले भी दैनिक जागरण प्रबंधन को नाको चने चबवा चुके हैं. वे पिछले बीस सालों से जागरण से जुड़े हुए हैं. वे इसके पहले भी लेबर कोर्ट में केस कर चुके हैं. बाद में प्रबंधन ने इस मामले में समझौता कर लिया था. तब से प्रबंधन की मजबूरी बने हुए हैं राजाराम. कुछ समय पहले उन्‍होंने बनारस के मैनेजर अंकुर चड्ढा तथा मशीन इंचार्ज साहू के गाली ग्‍लौज करने के बाद मुकदमा दर्ज करा दिया था, जिसमें काफी बवाल हुआ था. इस बार भी राजाराम ने हस्‍ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है. उन्‍होंने इसके खिलाफ अपर श्रमायुक्‍त कार्यालय एवं डीआईजी के पास शिकायत भी की है. अब देखना है कि प्रबंधन राजाराम से निपटता है या राजाराम प्रबंधन से निपटते हैं.

वैसे भी दैनिक जागरण के डरपोक-नपुंसक पत्रकारों के बीच में राजाराम के हिम्‍मत की जबर्दस्‍त चर्चा है. बड़े तथा पढ़े-लिखे पत्रकारों ने चुपचाप हस्‍ताक्षर कर दिया वहीं राजाराम ने प्रबंधन से सीधा पंगा ले लिया है. इसके पहले भी जागरण के पत्रकार तीस प्रतिशत अं‍तरिम वाले मामले में चुपचाप साइन कर चुके हैं. इस मामले में तो जागरण के वरिष्‍ठों से लेकर कनिष्‍ठों तक ने प्रबंधन के दबाव में प्रेस क्‍लब की सदस्‍यता से भी इस्‍तीफा दे दिया था, जबकि प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष योगेश कुमार गुप्‍ता पप्‍पू एवं कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी दादा इन पत्रकारों की लड़ाई लड़ रहे थे. बनारस के डरपोक पत्रकारों के बीच एक सकून देने वाली बात यह है कि पिछले ढाई साल से नौकरी विहीन रहते हुए योगेश गुप्‍ता पप्‍पू एवं मुखर्जी दादा इन लोगों की हर लड़ाई लड़ रहे हैं. बिना अपने वर्तमान एवं भविष्‍य की परवाह किए. फिर भी यहां के पत्रकार न तो खुलकर न ही अंदर से इनके सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं.   

दैनिक जागरण की गलती वाली खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें – यह जागरण का विज्ञापन दाता है, इसकी खबर लगनी चाहिए

सुनील एवं अभिषेक ने हिंदुस्‍तान के साथ नई पारी शुरू की

दैनिक जागरण, इलाहाबाद से खबर है कि सुनील गिरी ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी इलाहाबाद में ही हिंदुस्‍तान के साथ शुरू की है. वे काफी समय से दैनिक जागरण को अपनी सेवाएं दे रहे थे. बताया जा रहा है कि संपादकीय प्रभारी से परेशान सुनील ने मौका मिलते ही जागरण को अलविदा कह दिया.

अभिषेक पाठक ने अपनी नई पारी इलाहाबाद में हिंदुस्‍तान के साथ शुरू की है. उन्‍हें फोटोग्राफर बनाया गया है. इसके पहले वे अमर उजाला तथा राष्‍ट्रीय सहारा को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

गोरखपुर में शर्मिष्‍ठा शर्मा ने ली आई-नेक्‍स्‍ट वालों की क्‍लास

: दैनिक जागरण, बरेली में साइन करने को लेकर मामला गरम, कई ने किया इनकार : आई-नेक्स्ट, लखनऊ की एडिटर व अन्य यूनिटों की कोआर्डिनेटर शर्मिष्‍ठा शर्मा ने अपने 26 एवं 27 नवम्‍बर के गोरखपुर दौरे के दौरान आई-नेक्स्ट अखबार की कार्यप्रणाली को देखा. जागरण में मजीठिया वेज बोर्ड लागू ना करने की कवायद के तहत पहले ही आई नेक्‍स्‍ट के कर्मचारियों से साइन कराया जा चुका है. कर्मचारियों के असंतोष को देखते हुए उन्‍हें समझाने या पुचकारने की बजाय शर्मिष्‍ठा ने जमकर हड़काया. काम ठीक से करने की नसीहत भी दी. और कहा कि अब किसी का इंक्रीमेंट नहीं होगा. सभी का इंक्रीमेंट और प्रमोशन अप्रैल माह में किया जाएगा.

खबर है कि उन्‍होंने कई लोगों का इंटरव्‍यू भी लिया. इसमें दो लोगों को फाइनल किया गया है. एक ले आउट में तथा एक संपादकीय में. संपादकीय में आने वाला बंदा अभी अमर उजाला काम्‍पैक्‍ट को सेवाएं दे रहा है. हालांकि अभी तक किसी ने ज्‍वाइन नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कम से कम ये दो लोग तो आई नेक्‍स्‍ट ज्‍वाइन कर ही लेंगे. अन्‍य लोगों के बारे में आगे सोचा जाएगा.

इधर, बरेली से सूचना है कि जागरण के हस्‍ताक्षर अभियान पर कुछ पत्रकारों ने साइन करने से मना कर दिया है. हालांकि कितने पत्रकार इस प्रोफार्मा पर साइन से इनकार किया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. पर बताया जा रहा है कि यहां पर माहौल काफी गरम है. कुछ कर्मचारी बगावत के मूड में बताए जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि विरोध भी बच बचाकर किया जा रहा है. कुछ लोग पीछे के रास्‍ते से कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की कोशिश में भी लगे हुए हैं.

इन्हीं कागजातों पर जागरणकर्मियों से कराया जा रहा है हस्ताक्षर

ये उस कागज़ की मोबाइल से ली गई तस्वीरें हैं, जिस पर दैनिक जागरण वाले मजीठिया बोर्ड के खिलाफ ज़बरन हस्ताक्षर करवा रहे हैं. हस्ताक्षर न करने वाले कर्मचारियों को धमकाया जा रहा है. धमकी के ऑडियो को भी इकट्ठा कराया जा रहा है. शायद जल्द आ जाए. फिलहाल तो हस्ताक्षर कराए जाने वाले कागजों की फोटो देखें. इन कागजों पर साइन न करने वालों के लिए भी अलग से कागज़ बनाया गया है, जिस पर साइन कर देने को इस्तीफा माना जाएगा।

इस मुद्दे पर तो बैंड बज जानी चाहिए दैनिक जागरण की। लेकिन अपन लोगों के देश में नियम-कानून गरीबों व देहातियों के लिए होते हैं। लोकतंत्र का मतलब अब अमीरतंत्र होने लगा है। है किसी माई के लाल में दम जो जागरण प्रबंधन को इस कुकृत्य के लिए जेल की सजा खिलवाए!

कई पत्रकारों ने अपने-अपने दर बदले

नवभारत टाइम्‍स से खबर है कि अनुराग अन्‍वेषी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे समाचार संपादक बनकर अमर उजाला से जुड़ने जा रहे हैं. अनुराग नोएडा स्थित कारपोरेट आफिस में अपनी सेवाएं देंगे. अमर उजाला, नोएडा से दूसरी खबर यह है कि रवि राव ने यहां से इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी नोएडा में ही दैनिक जागरण के साथ शुरू कर रहे हैं. दैनिक जागरण, नोएडा से खबर है कि यहां से विप्‍लव चतुर्वेदी ने विदाई ले ली है. वे सब एडिटर के रूप में अमर उजाला, नोएडा से जुड़ रहे हैं.

हिंदुस्‍तान, दिल्‍ली से खबर है कि मिथिलेश कुमार यहां से इस्‍तीफा देकर इंदौर में दैनिक भास्‍कर के साथ जुड़ने जा रहे हैं. इसके पहले भी वे भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वे स्‍पोर्टस डेस्‍क पर काम करेंगे. इंदौर से दूसरी खबर है कि दैनिक भास्‍कर में ललित उपाध्‍याय को फिर से सिटी चीफ बना दिया गया है. पहले भी ललित भास्‍कर में सिटी चीफ थे परन्‍तु वे जागरण के साथ जुड़ गए थे, जिसके बाद रुमनी घोष को सिटी चीफ बना दिया गया था. अब दुबारा उन्‍होंने वापसी कर ली है.

अमर उजाला, उन्‍नाव से खबर है कि अंकित मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. खबर है कि वे अपनी नई पारी राष्‍ट्रीय सहारा के साथ शुरू करने जा रहे हैं. नए लांच होने जा रहे खबर इंडिया न्‍यूज चैनल से खबर है कि अजय कुमार ने यहां सीनियर कैमरामैन के रूप में ज्‍वाइन कर लिया है. वे इसके पहले जीएनएन से जुड़े हुए थे.

बनारस में हस्‍ताक्षर का मामला अपर श्रमायुक्‍त के पास पहुंचा, हड़कम्‍प

: पत्रकार नेता योगेश गुप्‍ता पप्‍पू एवं अजय मुखर्जी दादा ने की शिकायत : दैनिक जागरण, बनारस में म‍जीठिया वेज बोर्ड मामले में पत्रकारों की अनिच्‍छा के बावजूद जबरिया हस्‍ताक्षर करा रहे प्रबंधन के विरुद्ध समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है. दैनिक जागरण की चिरकुटई से भलीभांति अवगत काशी पत्रकार संघ के अध्‍यक्ष योगेश गुप्‍ता पप्‍पू एवं समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी दादा ने वाराणसी परिक्षेत्र के अपर श्रमायुक्‍त को पत्र लिखकर कर्मचारियों के उत्‍पीड़न का आरोप लगाया है.

गौरतलब है कि बनारस में दैनिक जागरण एवं आई नेक्‍स्‍ट के पत्रकारों से उनकी इच्‍छा के विरुद्ध प्रबंधन के लोगों ने जबरिया हस्‍ताक्षर करा लिए. सूत्रों ने बताया कि शनिवार को अपकंट्री के कई पत्रकारों को कार्यालय बुलाकर उनके हस्‍ताक्षर कराए गए. कई जिलों में नियुक्‍त स्‍टाफरों को सख्‍त आदेश दिया गया था कि वो बनारस स्थित कार्यालय पहुंचकर प्रबंधन द्वारा तैयार प्रोफार्मा पर हस्‍ताक्षर कर दें अन्‍यथा उन्‍हें इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी. परेशान तमाम जिलों के पत्रकार कार्यालय पहुंचकर अपने हस्‍ताक्षर कर दिए.

इधर, बनारस के पत्रकारों के हितों के लिए लम्‍बी लड़ाई लड़ चुके तथा लड़ रहे योगेश गुप्‍ता पप्‍पू तथा अजय मुखर्जी दादा ने एक बार फिर जागरण प्रबंधन के खिलाफ लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है. नैतिकता को ताख पर रखने वाले इस संस्‍थान के पत्रकारों के हित में आवाज उठाते हुए दोनों ने कर्मच‍ारियों के उत्‍पीड़न की शिकायत करते हुए अपर श्रमायुक्‍त से उचित कार्रवाई की मांग की है. इन दोनों लोगों ने आरोप लगाया है कि जागरण प्रबंधन के कार्रवाई से औद्योगिक अशांति का माहौल बन रहा है.

गौरतलब है कि इन दोनों पत्रकार नेताओं द्वारा कई अखबारों के पत्रकारों एवं कर्मचारियों को तीस प्रतिशत अंतरिम देने की लड़ाई के मामले में दैनिक जागरण अपने पत्रकारों से जबरिया साइन करवा चुका है कि उनको अंतरिम नहीं चाहिए. आई नेक्‍स्‍ट के एक मामले में मैनेजर अंकुर चड्ढा को भी इन्‍हीं दोनों लोगों के चलते श्रमायुक्‍त के सामने गिड़गिड़ाना पड़ा था. अभी भी यह मामला पूरी तरह हल नहीं हुआ है. उसके बाद नए हस्‍ताक्षर अभियान ने आग में घी का काम किया है. साथ ही इस बार पत्रकार भी प्रबंधन के रवैये से अंदर ही अंदर कुपित हैं.

अमर उजाला में स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट बनेंगे बृजेश सिंह

: जीतेंद्र मौर्य टीवी से जुड़े : दैनिक जागरण, नोएडा से इस्‍तीफा देने वाले डीएनई बृजेश सिंह के बारे में खबर है कि वे अमर उजाला से जुड़ने जा रहे हैं. तेजतर्रार पत्रकारों में गिने जाने वाले बृजेश को अमर उजाला अपने नेशनल ब्‍यूरो में स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट बनाने जा रहा है. हालांकि इस खबर की पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं हो पा रही है, पर सूत्रों का कहना है कि बृजेश सिंह इसी पद पर अमर उजाला से जुड़ने वाले हैं. बृजेश सिंह काफी लम्‍बे समय से जागरण को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

देवघर(झारखण्ड) से खबर है कि देश लाइव के संथाल परगना प्रभारी जीतेन्द्र कुमार सिंह ने संस्थान को बाय-बाय बोल दिया है. जीतेन्द्र ने अपनी नई पारी प्रकाश झा के चैनल मौर्य टीवी  के साथ शुरू की है. वे इससे पहले ईटीवी बिहार-झारखण्ड एवं साधना न्यूज़ में भी काम कर चुके है. जीतेन्द्र पिछले आठ वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं.

यह जागरण का विज्ञापन दाता है, इसकी खबर लगनी चाहिए

कभी कभी लाख चालाकी के बावजूद व्‍यक्ति अथवा संस्‍था का असली चरित्र सामने आ ही जाता है. पेड न्‍यूज को लेकर सबसे ज्‍यादा बदनाम रहे दैनिक जागरण किस तरह की पत्रकारिता करता है, उसकी एक ऑन लाइन खबर से साफ नजर आ जाता है. अखबार में जनसरोकार से ज्‍यादा विज्ञापन देने वालों को कितना महत्‍व दिया जाता है इसका प्रमाण है चंदौली की एक खबर. बनारस यूनिट से जुड़े इस जिले से एक खबर भेजी गई है, जिसमें शायद हेडिंग के आगे विज्ञापनदाता लिखकर खबर को महत्‍व देने के बारे में पेज देखने वाले को बताया गया है, पर विडम्‍बना कि इस खबर को नेट पर डालने वाले ने कुछ नहीं देखा और जस का तस उसे वेबसाइट पर डाल दिया.

अब आप समझ सकते हैं कि बनारस में कैसे कैसे लोग जागरण अखबार को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. जागरण भले ही जनसरोकार की खबरों को छोड़ दे पर अपने विज्ञापनदाताओं को खबरों को छोड़ना पाप समझता है. पर इसी चक्‍कर में उससे यह पाप भी हो गया है. आप भी देखिए इस खबर और इसकी हेडिंग को और थू-थू करिए बनारस में जागरण की पम्‍पलेटी पत्रकारिता पर.  

आगरा में जागरण के हस्‍ताक्षर अभियान के खिलाफ भगत सिंह बने रवि प्रकाश मौर्य

: बनारस में भी कराया गया पत्रकारों से सिग्‍नेचर : आगरा से खबर है कि यहां पर भी मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर चलाए गए हस्‍ताक्षर अभियान का काम पूरा कर लिया गया है. पर यहां पर एक कर्मचारी ने जागरण प्रबंधकों के इस मंशा का विरोध कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि समाचार संपादक आनंद शर्मा लोगों को समझा बुझाकर हस्‍ताक्षर अभियान पूरा करवा लिए. उन्‍होंने आफ द रिकार्ड सहयोगियों से यह भी कहा कि इससे कुछ होना जाना नहीं है, कोई पत्रकार सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो हम सभी का भला हो जाएगा. मतलब जागरण के तमाम वरिष्‍ठ पत्रकार यह भी चाहते हैं कि उनको मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिले और वो प्रबंधन की नजर में भी हीरो बने रहें यानी भगत सिंह कोई और बने.

खैर, खबर है कि यहां काम करने वाले तेज तर्रार पत्रकार रवि प्रकाश मौर्य भगत सिंह बनने की राह पर चल पड़े हैं. उन्‍होंने हस्‍ताक्षर करने से इनकार कर दिया है. उनके विरोध से प्रबंधन घबराहट में है. संभावना जताई जा रही है कि अगर रवि ने हस्‍ताक्षर नहीं किया तो उन्‍हें निपटाने की रणनीति भी बनाई जा सकती है. आखिर इतने नपुंसक पत्रकारों की भीड़ में प्रबंधन भला एक दिलेर पत्रकार को कैसे बर्दाश्‍त कर सकता है, जो उसकी गलत हरकत का विरोध कर रहा हो. 

दूसरी तरफ बनारस से भी खबर है कि यहां भी पत्रकारों की मर्जी के खिलाफ हस्‍ताक्षर करवाया जा रहा है. यूनिट मैनेजर अंकुर चड्ढा तथा निशात अली पत्रकारों से हस्‍ताक्षर करा रहे हैं. पर इस यूनिट की विडम्‍बना यह रही कि यहां एक भी पत्रकार दिलेर नहीं निकला. सभी ने चुपचाप अपने अपने हस्‍ताक्षर निर्धारित प्रोफार्मा पर कर दिए. जबकि पत्रकारों का खून चूसने में यह यूनिट सबसे ऊपर है. ऐसा लग रहा है कि पत्रकारों का इतना खून चूस लिया गया है कि अब एक में भी प्रबंधन के गलत रवैये का विरोध करने की ताकत नहीं बची है.

चेतन शारदा, मुकेश टंडन, विजय झा एवं राजन मिश्र ने शुरू की नई पारी

दैनिक भास्‍कर से सूचना है कि हिमाचल के संपादक एवं वरिष्‍ठ पत्रकार चेतन शारदा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी पंजाब से जल्‍द लांच होने जा रहे अखबार नया सवेरा से शुरू करने जा रहे हैं. इन्‍हें कार्यकारी संपादक बनाया गया है. बताया जा रहा है कि चेतन शारदा के नेतृत्‍व में ही यह अखबार लांच किया जाएगा. चेतन शारदा इसके पहले दैनिक जागरण और पंजाब केसरी को भी वरिष्‍ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अमर उजाला, पंचकूला से खबर है कि वरिष्‍ठ पत्रकार मुकेश टंडन यहां से विदाई लेने वाले हैं. उन्‍होंने प्रबंधन को अपना नोटिस थमा दिया है. खबर है कि वे अपनी नई पारी की शुरुआत पंचकूला में ही टाइम्‍स ऑफ इंडिया के साथ करने जा रहे हैं. मुकेश कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अंग्रेजी वेबसाइट डेली भास्‍कर से खबर है कि संपादकीय प्रभारी विजय झा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अब एनडीटीवी से जुड़ गए हैं. बताया जा रहा है कि उन्‍हें एनडीटीवी के वेब डिविजन की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. विजय इसके पहले इंडियन एक्‍सप्रेस, हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, स्‍टेटसमैन, साकाल टाइम्‍स को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

देश लाइव न्‍यूज, पटना से खबर है कि एकाउंटस मैनेजर राजन मिश्र ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी दैनिक जागरण के साथ शुरू करने जा रहे हैं. संभावना है कि उन्‍हें गया से शीघ्र लांच होने जा रहे दैनिक जागरण से जोड़ा जाएगा. राजन की जागरण के साथ यह दूसरी पारी है. वे दैनिक जागरण, भागलपुर से ही देशलाइव में आए थे. वे सिलीगुड़ी में भी जागरण को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

विनय मिश्र और सूरज सनवाल नए ठिकानों पर पहुंचे

देश लाइव न्‍यूज, पटना से खबर है कि बिहार के ब्‍यूरो प्रमुख विनय मिश्र ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी दैनिक जागरण के साथ शुरू करने जा रहे हैं. देश लाइव आने से पहले विनय भुवनेश्‍वर में सन्‍मार्ग के संपादकीय प्रभारी थे तथा स्‍थानीय संपादक के रूप में कामकाज देख रहे थे. दैनिक जागरण से करियर शुरू करने वाले विनय की जागरण संग दूसरी पारी है. वे प्रभात खबर में सिटी इंचार्ज भी रहे. बांग्‍ला न्‍यूज चैनल 'चैनल टेन' से भी जुड़े रहे.

महुआ ग्रुप के प्रज्ञा चैनल से खबर है कि सूरज सनवाल ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर एंकर कम प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत थे. सूरज ने अपनी नई पारी ए2जेड न्‍यूज चैनल के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां भी एंकर कम प्रोड्यूसर बनाया गया है. सूरज इसके पहले इंडिया न्‍यूज को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

शैलेंद्रमणि का चौदह साल का राज खत्‍म, अब प्रिंट लाइन में सीकेटी का नाम

चौदह साल तक गोरखपुर में दैनिक जागरण की गद्दी संभालने वाले शैलेंद्र मणि को वनवास पर भेजे जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अखबार को गोरखपुर में नई उंचाई देने वाले शैलेंद्रमणि के वनवास की खबरें तभी से आनी शुरू हो गई थी, जब चंद्रकांत त्रिपाठी उर्फ सीकेटी से बरेली की गद्दी छीनकर गोरखपुर भेजा गया था. पहली बार शैलेंद्रमणि को संपादकीय से हटाकर केके शुक्‍ला को प्रभारी बनाकर वनवास पर भेजने की शुरुआत की गई थी. इसके बाद भी प्रकाशक के रूप में शैलेंद्रमणि का नाम दैनिक जागरण के प्रिंट लाइन में जा रहा था.

परन्‍तु फाइनली 24 नवम्‍बर 2011 को शैलेंद्र मणि पूर्ण रूप से पैदल कर दिए गए. अब उनकी जगह चंद्रकांत त्रिपाठी का नाम प्रकाशक के रूप में जाने लगा है. 1997 से गोरखपुर में दैनिक जागरण का काम देख रहे शैलेंद्र मणि को चौदह साल बाद यानी 2011 में जागरण ने प्रिंट लाइन से हटा दिया है. तमाम विवादों के बावजूद दैनिक जागरण को गोरखपुर में ऊंचाई पर पहुंचाने वाले शैलेंद्र मणि के भविष्‍य को लेकर अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. लोग जानना चाह रहे हैं कि क्‍या होगा शैलेंद्र मणि का? उन्‍हें संस्‍थान से विदा कर दिया जाएगा या फिर बिना राजपाट के ही गोरखपुर में रखा जाएगा. वैसे अभी तक स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि आगे शैलेंद्र मणि किस रोल में रहेंगे.

बनारस के बाद गोरखपुर में भी जागरण का हस्‍ताक्षर करो अभियान पूरा

वाह रे दैनिक जागरण! कितना फर्क है इस अखबार के कथनी और करनी में. कहने को तो अखबार अपने पन्‍नों पर सरोकार को लेकर लम्‍बी-चौड़ी बातें करता है. अपने सात सरोकार को लेकर अक्‍सर कहीं ना कहीं लम्‍बी चौड़ी भाषण झाड़ता है, जिसमें गरीबी उन्‍मूलन, बराबरी समेत तमाम बातें लिखी रहती हैं. पहल जैसी संस्‍था के बैनर तले तमाम सामाजिक सरोकार के आयोजन करता रहता है, पर हकीकत में यह अखबार और इसका प्रबंधन कितना गिरा हुआ है, इसे मजीठिया वेज बोर्ड की अधिसूचना लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद देखा जा सकता है.

प्रबंधन इस अधिसूचना के बाद से ही बदहवासी में है और सभी पत्रकारों से लिखवा लेना चाहता है कि उनको ज्‍यादा पैसा नहीं चाहिए. जागरण जितना पैसा दे रहा है उससे उनका तथा उनके परिवार का खर्च बड़े आराम से चल जा रहा है. विडम्‍बना देखिए कि कंपनी को खुद तो बहुत पैसे चाहिए पर पत्रकारों को देने के लिए धेला भी नहीं. इस तरह की दोगली मानसिकता रखने वाला यह अखबार ही पेड न्‍यूज के जरिए पत्रकारिता की मूल सोच, स्‍वरूप का भी गला घोंट चुका है. पर यह अखबार और इसके बड़े स्‍तर के कर्ताधर्ता बात हर बार सरोकार और सदाचार की करते रहते हैं. इनकी आंखों में इस दौरान तनिक भी शर्म नहीं दिखती. यानी पैसों के चलते इनके आंखों की शर्म और हया मर चुकी है. 

स्ट्रिंगरों की तो वैसे ही हालत पतली रहती है पर दैनिक जागरण अखबार अपने स्ट्रिंगरों का सबसे ज्‍यादा शोषण करता है. इन्‍हें धमकी दी जाती है कि न्‍यूज देना हो और विज्ञापन लाना हो तो काम करों नहीं तो जागरण ने कोई निमंत्रण देकर नहीं बुलाया है. कई स्‍थानों पर तो स्ट्रिंगरों को पांच सौ रुपये भी बमुश्किल मिलते हैं. पर उन्‍हें विज्ञापन का टार्गेट लाखों में दिया जाता है. इसे देखकर यही माना जा सकता है कि प्रबंधन को लगता है कि उसके लिए काम करने वाले स्ट्रिंगर और उनका परिवार हवा पीकर रहता है या फिर ये सारे स्ट्रिंगर भ्रष्‍ट होते हैं, जो ऊपर से अपने खाने कमाने का जुगाड़ कर लेते हैं. इस अखबार की स्थिति यह है कि बड़े पर्व-त्‍योहारों पर तो विज्ञापन चाहिए ही चाहिए तमाम पार्टियों और उनके नेताओं के जन्‍म दिन, मरण दिन, तरण दिन समेत तमाम दिनों पर भी विज्ञापन चाहिए. चाहे स्ट्रिंगर एवं पत्रकार नेताओं और तमाम लोगों के सामने नाक रगड़े या गिड़गिड़ाए इससे प्रबंधन को कोई सरोकार नहीं है. 

इस अखबार में बड़े पदों पर बैठे कुछ पत्रकार सेटर हो जाते हैं या सही-गलत तरीके से अखबार का लाभ लेते हुए दूसरे धंधे अपने परिवारों के नाम खोल लेते हैं. जबकि निचले स्‍तर पर काम करने वालों का कोई पुरसाहाल नहीं है. इस अखबार में काम करने वालों के लिए कोई एक रुल निर्धारित नहीं है. एक पद के लिए कोई समान वेतन प्रणाली भी नहीं है. अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत अखबार के लगभग हर यूनिट में विद्यमान रहती है. जागरण में सब एडिटर के रूप में काम करने वालों की सेलरी चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों से भी कम हैं. इस संस्‍थान को सेवा देने वाले अनेक सब एडिटर पद पर ज्‍वाइन करते हैं और इसी पद पर रिटायर हो जाते हैं. कोई खुली प्रक्रिया नहीं है कि पता किया जा सके कि कौन पत्रकार काबिल है और कौन नाकाबिल. बस जो जितना बड़ा सेटर वो उतना बड़ा पत्रकार. इस अखबार का कोई पत्रकार होटल खोल रहा है तो कोई गलत तरीके से डिग्रियां बटोर रहा है. धीरे-धीरे तमाम खुलासे किए जाएंगे.

खैर इतना सब लिखने का मतलब भाषण देना नहीं बल्कि यह बताना है कि यह अखबार मजीठिया बोर्ड का लाभ अपने पत्रकारों को किसी भी कीमत पर न देने के लिए कोई भी रास्‍ता अख्तियार करने को तैयार हो गया है. अन्‍य प्रतिद्वंद्वी अखबारों की तुलना में सबसे कम वेतन देने वाला यह अखबार नहीं चाहता कि उसके पत्रकारों की जीवन स्‍तर में कोई सुधार आए. बुधवार को इसी ग्रुप के आई नेक्‍स्‍ट में सभी से हस्‍ताक्षर करवाया गया तो गुरुवार को गोरखपुर में जागरण एवं आई नेक्‍स्‍ट के पत्रकारों से इस संदर्भ में हस्‍ताक्षर कराए गए. इसके अतिरिक्‍त भी कई यूनिटों में हस्‍ताक्षर कराए जा रहे हैं. हर यूनिट में एक प्रोफार्मा भेजकर उसपर कर्मचारियों के नाम, उनके इम्‍पलायी कोड लिख कर उनसे हस्‍ताक्षर कराए जा रहे हैं. भड़ास को भी ऐसा जागरण का ऐसा ही एक प्रोफार्मा हाथ लगा, जिस पर कई कर्मचारियों के नाम लिखे हुए हैं, परन्‍तु उनकी नौकरी पर आने वाली परेशानी को देखते हुए केवल प्रोफार्मा ही प्रकाशित किया जा रहा है. नाम नहीं दिए जा रहे हैं. इस प्रोफार्मा को ठीक ढंग से पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें.

जागरण का प्रोफार्मा

दैनिक जागरण से इस्‍तीफा देंगे डीएनई बृजेश सिंह

दैनिक जागरण, नोएडा में तैनात डीएनई बृजेश सिंह अब संस्‍थान से अलग होने जा रहे हैं. जागरण के तेजतर्रार पत्रकारों में‍ गिने जाने वाले बृजेश सिंह का जाना जागरण के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है. वे जागरण में प्रथम पेज की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. उन्‍होंने प्रबंधन को इस्‍तीफे का नोटिस थमा दिया है. खबर है कि वे अमर उजाला से जुड़ने वाले हैं. बृजेश सिंह जागरण को काफी लम्‍बे समय से जुड़े हुए थे. वे दिल्‍ली में भी जागरण को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पिछले दिनों प्रबंधन ने उनका तबादला कानपुर के लिए कर‍ दिया था, जिसके बाद उन्‍होंने वहां ज्‍वाइन करने की बजाय संस्‍थान को ही अलविदा कहने का मन बना लिया. 

एजीएम सरकुलेशन वीपीएस भदौरिया ने पत्रिका से दिया इस्तीफा

पत्रिका, भोपाल से खबर है कि एजीएम सर्कुलेशन वीपीएस भदौरिया ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे काफी समय से पत्रिका से जुड़े हुए थे. मध्‍य प्रदेश में पत्रिका को प्रसार के स्‍तर पर सफलता दिलाने में भदौरिया का काफी योगदान रहा है. बताया जा रहा है कि प्रबंधन के लगातार कुछ खास लोगों की ही सुनने से वीपीएस नाराज चल रहे थे. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करने जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. वीपीएस पत्रिका के पहले भी कई अखबारों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. खबर है कि प्रबंधन की एक खास प्रदेश के लोगों को ही तवज्‍जो देने के चलते संपादकीय से भी कुछ लोग इस्‍तीफा दे सकते हैं.

दैनिक जागरण, दिल्‍ली के रिपोर्टर अरशद फरीदी का तबादला डेस्‍क के लिए कर दिया गया है. अब वे डेस्‍क पर अपनी जिम्‍मेदारी निभाएंगे. इस संदर्भ में अरशद फरीदी से बात करने की कोशिश की गई परन्‍तु उनसे संपर्क नहीं हो पाया. अरशद काफी समय से जागरण से जुड़े हुए हैं.

अजय, अमित की नई पारी, अभिलाष का तबादला

नई दुनिया, दिल्‍ली से खबर है कि अजय पांडेय ने नई दुनिया से इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर रिपोर्टर थे तथा दिल्‍ली सरकार देखते थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दैनिक जागरण से शुरू की है. उन्‍हें यहां भी रिपोर्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. अजय प्रकाश मिश्रा को रिपोर्ट करेंगे. इसके पहले वे हिंदुस्‍तान को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

जागरण, चंडीगढ़ से खबर है कि सर्कुलेशन हेड अभिलाष का तबादला जमशेदपुर (झारंखड) के लिए कर दिया गया है. वे काफी समय से यहां का प्रभार संभाल रहे थे. वहीं आगरा से खबर है कि ललित शर्मा ने हिंदुस्‍तान से इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने कहा ज्‍वाइन किया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. आई-नेक्‍स्‍ट से इस्‍तीफा देकर अमित शिवहरे ने हिंदुस्‍तान ज्‍वाइन किया है.

पानीपत में जागरण के पत्रकारों पर हमला के मामले में दो गिरफ्तार

: पत्रकार संगठनों ने हमले की निंदा की : पानीपत : बुधवार की देर रात नांगलखेड़ी मोड़ पर दैनिक जागरण के पांच पत्रकारों के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों नांगलखेड़ी के रहने वाले हैं। इन दोनों की पहचान मनोज पुत्र पिरथी सिंह और बिट्टू पुत्र हरबीर के रूप में हुई है। इस बारे में पुलिस अधीक्षक पंकज नैन ने कहा है कि दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है अन्य आरोपियों को भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

गौरतलब है कि बुधवार की देर रात दैनिक जागरण के पत्रकारों के साथ नांगलखेड़ी पर छह बदमाशों ने मारपीट की थी। घटना के करीब आधे घंटे के बाद पुलिस के आठ जवान मौके पर पहुंचे, परन्‍तु आरोपियों को सेक्टर 29 पुलिस चौकी लाने के मेहमान की तरह बाइक से भेज दिया। इसके बाद पत्रकारों ने इसकी सूचना एसपी पंकज नैन को दी, जिसके बाद वे देर रात सेक्टर 29 पुलिस चौकी पहुंचे और आरोपियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। तब कहीं जाकर पुलिस ने तत्परता दिखाई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि अन्‍य भागने में सफल रहे। पुलिस ने तत्‍काल तेजी दिखाई होती तो सारे बदमाश पुलिस कस्‍टडी में होते।

दूसरी तरफ हरियाणा पत्रकार संघ ने भी जागरण के पत्रकारों के ऊपर हुए हमले की निंदा की है। संघ के पानीपत जिलाध्‍यक्ष विनोद पाचाल ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि शहर में कानून व्‍यवस्‍था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। वे संघ की आपात बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया पर भी बदमाश हमला करने लगे है। यह पहली बार नहीं हुआ बल्कि इससे पूर्व भी कई बार पत्रकारों पर हमला किया जा चुका है। संघ पत्रकारों पर हमला करने वाले बदमाशों की गिरफ्तारी की मांग करता है।

श्री पाचाल ने पुलिस को चेतावनी को दी कि अगर 24 घटे के अंदर-अंदर सभी हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो संघ अगली रणनीति तैयार कर पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलेगा। बैठक में राममेहर कौशिक, विजय गाहल्याण, बिजेन्द्र सिंह, तेलूराम प्रजापत, सलीम खान, सतीश शर्मा, राकेश जागड़ा, मोहन लाल, राजेंद्र फौर, जगदीश आहूजा व दीपक वर्मा आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे। वहीं, हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के जिलाध्यक्ष विनोद लाहोट और महासचिव संजय त्यागी ने संयुक्त रूप से इस घटना की निंदा की है। उन्‍होंने कहा कि यह समस्त मीडिया पर हमला है। आरोपियों को तत्‍काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए, साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कराई जानी चाहिए। 

पानीपत में दैनिक जागरण के पत्रकारों पर हमला

दैनिक जागरण, पानीपत के पांच पत्रकारों पर कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया. सभी बदमाश शराब के नशे में धुत थे. पत्रकारों से मारपीट करने की कोशिश की गई. किसी तरह पत्रकारों ने इधर उधर भाग कर अपनी जान बचाई. पत्रकारों की सूचना पर मौके पर जागरण कई और पत्रकार भी पहुंच गए. कई बार फोन करने के बाद भी क्षेत्रीय चौकी-थाने के इंचार्ज मौके पर नहीं पहुंचे, जिसके बाद पत्रकारों ने वरिष्‍ठ अधिकारियों को फोन किया. पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले का जायजा लिया. तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. 

जानकारी के अनुसार डेस्‍क पर काम करने वाले सीनियर जर्नलिस्‍ट सुधीर कुमार, समर बहादुर, ब्रजेश त्रिपाठी, संजय झा एवं योगेन्‍द्र शर्मा रात को काम निपटाकर घर जा रहे थे. ऑफिस की गाड़ी ने रोज की तरह इन लोगों को नांगल खेड़ी गांव के पास उतार दिया, जहां से ये लोग पैदल ही अपने अपने घर की तरफ जाने लगे. बीच रास्‍ते में आठ-दस की संख्‍या में मौजूद दबंग बदमाश इन लोगों से बिना बात गाली-ग्‍लौज करने लगे तथा हाथापाई करने लगे. सभी ने नशा कर रखा था. पत्रकारों ने इसकी सूचना अपने सहयोगियों को दी. जागरण के कई कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो ये बदमाश उनसे भी हाथापाई करने पर उतारू हो गए. 

पत्रकारों ने इसकी सूचना क्षेत्रीय चौकी और थाने को देनी चाही पर किसी भी पुलिसवाले ने फोन नहीं उठाया. अंत में एसपी समेत जिले के कई वरिष्‍ठ अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद कई आला अफसर मौके पर पहुंचे. पुलिस को देखकर कुछ बदमाश खिसक गए परन्‍तु तीन को पुलिस ने पकड़ लिया. इसके पहले भी जागरण के पत्रकारों के साथ इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, परन्‍तु शिकायत के बाद भी पुलिस लापरवाह बनी रहती है, जबकि पत्रकारों का काम हर रोज रात में ही खतम होता है.

विकास आज समाज पहुंचे, राजेश को छुट्टी पर भेजा गया

आज समाज, अंबाला से विकास उप्रेती ने अपनी नई पारी ने अपनी नई पारी शुरू की है. उन्‍होंने एचआर डिपार्टमेंट में सीनियर एक्‍जीक्‍यूटिव के पद पर ज्‍वाइन किया है. इसके पहले वे अमर उजाला में असिस्‍टेंट एचआर के पद पर कार्यरत थे. वे पिछले पांच सालों से इस फील्‍ड में कार्यरत हैं. 

दैनिक जागरण, शाहजहांपुर से खबर है कि फोटोग्राफर राजेश राठौर को एक सप्‍ताह की छुट्टी पर भेज दिया गया है. राजेश बीस साल से जागरण को अपनी सेवाएं दे रहे थे. कभी जागरण के स्‍टाफर रहे राजेश दो साल पहले तबादला होने के बाद इस्‍तीफा दे दिया था. बाद में प्रबंधन ने उन्‍हें वापस बुला लिया था तथा स्‍टाफर बनाने का आश्‍वासन दे रखा था. बताया जा रहा है कि संपादकीय के लोगों के इगो प्राब्‍लम के चलते राजेश को सात दिन की जबरिया छुट्टी पर भेजा गया है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि राजेश को जागरण के अलावा एक और अखबार के लिए काम करने के चलते फोर्स लीव पर भेजा गया है. राजेश ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने की पुष्टि की परन्‍तु ब्‍यूरोचीफ आरआरएस सोलंकी ने ऐसी किसी बात से इनकार किया.

आगरा में दैनिक जागरण के पच्‍चीस वर्ष पूरे

आगरा में रविवार को दैनिक जागरण ने पच्‍चीस साल पूरे किये. नरेंद्र मोहन गुप्‍त ने 30 अक्‍टूबर 1986 को दैनिक जागरण की नींव यहां रखी थी. जागरण यूनिट में इस दौरान हवन पूजन का कार्यक्रम हुआ. जागरण के रजत जयंती के अवसर पर डाक विभाग ने एक विशेष आवरण और डाक टिकट जारी किया. इस मौके पर अखबार ने अपने इंटरनेट सेक्‍शन में यहां से प्रकाशित पहले दिन के अखबार को पहले पन्‍ने पर जगह दी है. नीचे जागरण में इस मौके पर प्रकाशित खबरें. जागरण ने अपने पाठकों का भी आभार जताया है.  

आगरा। ताज नगरी में दैनिक जागरण ने रविवार को पच्चीस बरस पूरे कर लिए हैं। रविवार को सफलता के इस पड़ाव रजत जयंती पर आयोजित समारोह में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-यज्ञ में आहुति दी गई। निदेशक धीरेंद्र मोहन गुप्ता और तरुण गुप्ता ने संस्थापक स्व. पूर्णचंद गुप्त और पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन गुप्त के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह का शुभारंभ किया।30 अक्टूबर 1986 को दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन गुप्त ने ताज नगरी को दैनिक जागरण की सौगात दी थी।

निदेशक धीरेंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि सफलता के इस पड़ाव पर पहुंचने में निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ पाठकों के प्रेम और सहयोग की महती भूमिका रही है। संस्थान के कर्मचारियों में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि इसी जज्बे के साथ प्रकाश फैलाते रहें। निदेशक तरुण गुप्ता ने कहा कि ताज नगरी में ये पच्चीस बरस बहुत चुनौतियों भरे थे, फिर भी हमने कामयाबी की नई रेखाएं खीचीं। जागरण परिवार के सदस्यों की इसी मेहनत और लगन से भविष्य में भी हम सफलता के नये मुकाम हासिल करेंगे।

समारोह में 25 बरस से जुड़े रहने वाले जागरण परिवार सदस्यों को निदेशक धीरेंद्र मोहन गुप्ता ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान समाचार संपादक आनंद शर्मा, यूनिट मैनेजर सीएस शुक्ला, क्षेत्रीय विज्ञापन प्रबंधक मुकेश मैनी, विज्ञापन प्रबंधक जुगल किशोर, प्रसार प्रबंधक सौरभ मित्तल मुख्य रूप से मौजूद थे।

आभार

मय का चक्र तेजी से घूमता है। आपके बीच हमें 25 बरस हो गए और अब हम 26वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। 25 वर्ष पहले आज ही के दिन जब दैनिक जागरण ने ब्रज की इस धरा को नमन करते हुए कदम रखा था तो पाठकों ने हमें हाथों हाथ लिया। गंगा-जमुनी संस्कृति को हमने आत्मसात किया और ब्रजवासियों ने दैनिक जागरण को। रजत जयंती वर्ष पूरा करते समय हमें बरबस यह स्मरण हो आता है कि इस भूमि के कण-कण में किस तरह भारतीय संस्कृति की परंपराओं के साथ-साथ सद्भाव की विरासत और भक्ति भावना समाहित है। यहां बांके बिहारी की कृपा का रस बरसता है, तो सम्राट अकबर के दीन ए इलाही के पैगाम का असर भी दिखता है। श्रृंगी ऋषि ने इसी पवित्र भूमि पर अपना आश्रम बनाया। महर्षि परशुराम की ननिहाल भी यहीं थी और उनकी मां रेणुका के नाम पर ही रुनकता है। यहां उनका प्राचीन मंदिर भी है। यहां सूर साधना स्थली भी है, जहां उनकी अपने गुरू बल्लभाचार्य से मुलाकात हुई। बटेश्वर शहर का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां 108 शिव मंदिर यमुना के किनारे बने हुए हैं। यहीं जैन तीर्थंकर नेमिनाथ की तीर्थस्थली है। नाथ संप्रदाय का भी यह प्रमुख नगर है, जहां नामदेव, उदयनाथ और लालनाथ ने विभिन्न मंदिरों की स्थापना की। मुगलिया सल्तनत ने यहां ताजमहल के रूप में बेमिसाल इमारत पेश की, जिसे दुनिया प्रेम के अनोखे उपहार के रूप में जानती है। यह एक ऐसा उपहार है जो आगरा ही नहीं, भारत की भी पहचान है। इस शहर से संविधान निर्माता डा.भीमराव अंबेडकर का भी लगाव रहा। 1956 में उन्होंने यहां चक्कीपाट पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा का लोकार्पण किया। पूरे देश में सबसे ज्यादा अग्रवंशी आगरा में ही हैं। इसीलिए एक समय यह शहर अग्रवन के नाम से भी जाना जाता था। आगरा की एक पहचान साहित्य और संस्कृति के स्थल के रूप में भी है और उद्योग नगरी के रूप में भी। 25 बरस का यह कालखंड अपने को साबित करने की यात्रा तो है ही, आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने और आपका विश्वास जीतने का अनुभव भी है। आपके स्नेह, विश्वास और सहयोग के संबल के चलते ही हम शहर के क्षितिज पर छाए और अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने में कामयाब रहे। यह हमारी लगन में आपके अविस्मरणीय सहयोग की ही परिणति है कि दैनिक जागरण शहर की पहचान ही नहीं, धड़कन भी बन गया है। शून्य से शिखर की इस यात्रा में 26वां बरस हमारे लिए एक पड़ाव भर है। मंजिल अभी और आगे है। आप सब हमारे हमराही भी हैं और मार्गदर्शक भी। हमारे इस गर्व में आपकी सक्रिय-सक्षम भागीदारी है कि शहर की दशा-दिशा तय करने में हम एक सशक्त आवाज हैं। हमारे इस गर्व में समाहित है आप सब शहरवासियों का प्यार, जिसने 25 बरस पहले नवांकुरित हमारे इस प्रयास को अपने आशीष से सींचकर वृक्ष बनाया। इस सफर के साक्षी आगरा शहर का हृदय से आभार। इस कामयाब सफर के साथ हम एक बार फिर उन मूल्यों-मान्यताओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं, जिनके लिए दैनिक जागरण जाना जाता है और जो उसकी पहचान हैं। दैनिक जागरण न केवल भारतीय मूल्यों का संवाहक है, बल्कि उसके प्रति समर्पित भी है। समरसता और सद्भावना के साथ राष्ट्रभाव का जागरण हमारा मूल मंत्र है और हम इसी से पे्ररित होते रहेंगे। हम इसके प्रति भी संकल्पबद्ध हैं कि आने वाले समय में दैनिक जागरण आगरा का समग्र रूप से नेतृत्व कर सके। हमारी आकांक्षा है कि जैसे दैनिक जागरण ने डिजिटल युग में प्रवेश कर अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ अपनी अलग पहचान बनाई है वैसे ही आगरा भी अपनी पूरी ऊर्जा और आभा के साथ चहुंमुखी प्रगति कर सके। धन्यवाद। साभार : जागरण

आलोक शुक्‍ला बने दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी के संपादक

: दिनेश ने जनवाणी ज्‍वाइन किया : दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी से खबर है कि आलोक शुक्‍ला यहां के नए स्‍थानीय संपादक बना दिए गए हैं. अब तक इस पद पर जिम्‍मेदारी निभा रहे राजीव शुक्‍ला को असिस्‍टेंट संपादक बना दिया गया है. गौरतलब है कि आलोक शुक्‍ला इसके पहले हल्‍द्वानी में ही अमर उजाला के संपादक के पद पर कार्यरत थे. प्रबंधन ने उनकी जगह मेरठ में तैनात सुनील शाह को संपादकीय प्रभारी बनाकर हल्‍द्वानी भेज दिया था तथा आलोक शुक्‍ला को नोएडा स्थित कारपोरेट ऑफिस से अटैच कर दिया था. इसके बाद उन्‍होंने अमर उजाला से इस्‍तीफा दे दिया. इस संदर्भ में और जानकारी के लिए जब आलोक शुक्‍ला को फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा.  जब दैनिक जागरण, बरेली के सीजीएम एएन सिंह से संपर्क किया गया तो उन्‍होंने आलोक शुक्‍ला को हल्‍द्वानी का संपादक बनाए जाने की पुष्टि की.

हिंदुस्‍तान, रुद्रपुर से खबर है कि दिनेश अवस्‍थी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां स्ट्रिंगर के पद पर कार्यरत थे. वे अपनी नई पारी जनवाणी, देहरादून से करने जा रहे हैं. उन्‍हें यहां रिपोर्टर बनाया जा रहा है. दिनेश काफी समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं तथा कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दी हैं.

लुटेरों ने जागरण के दो कर्मचारियों को लूटा

खबर है कि दैनिक जागरण, जालंधर के पत्रकार व एक आपरेटर को अज्ञात लुटेरों ने लूट लिया। लुटने वालों में दैनिक जागरण के सब एडिटर संत लाल व आपरेटर रमेश चंद डोगरा हैं। कुछ महीनों के भीतर यह आठवीं घटना है, जब जागरण के स्टाफ का कोई व्यक्ति लूटा गया हो। दोनों रात को अपनी ड्यूटी खत्म करके घर जा रहे थे कि सोढल नामक स्थान पर इनको लुटेरों ने घेर लिया तथा दोनों की गर्दनों पर तलवारें लगा दीं। दोनों के मोबाइल सेट व पर्स निकाल कर ले गए।

यहां पर हास्यास्पद तो यह है कि जागरण के स्टाफ मेंबरों के लगातार लुटने के बावजूद प्रबंधन मौन साधे बैठा हुआ है। यहां तक कि संपादकीय प्रभारी ने भी अपने लोगों का साथ देने की बजाए अपनी नकारात्मक सोच को दर्शाते हुए टका सा जबाव दे दिया कि गेट के बाहर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। गौरतलब है कि जागरण के दो स्टाफ मेंबरों को तो लुटेरे तेजधार हथियारों से निशाना भी बना चुके हैं तथा अभी एक मेंबर सिर पर लुटेरों द्वारा किए गए वार के जख्म झेल रहा है। प्रबंधकों व संपादकीय प्रभारी की ऐसी सोच के कारण स्टाफ दहशत व सकते में हैं।

दैनिक जागरण के पत्रकार को पितृशोक

चंदौली : दैनिक जागरण के पत्रकार बद्री प्रसाद केशरी के पिता काशी प्रसाद केशरी का 95 वर्ष की अवस्था में शुक्रवार को निधन हो गया. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे तथा उनका इलाज चकिया स्थित उनके आवास पर चल रहा था. वे अपने पीछे चार पुत्र एवं चार पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं. कल देर शाम उनका अंतिम संस्‍कार कर दिया गया. काशी प्रसाद के निधन के शोक में व्‍यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं. उपजा की बैठक में भी बद्री केशरी के पिता के निधन पर शोक जताया गया.

मोहन राजपूत गए थे चीन, पहुंचा दिए गए हल्‍द्वानी

दैनिक जागरण, उधमसिंह नगर के ब्यूरो चीफ मोहन राजपूत चीन के पांच दिवसीय दौरे से लौट आए हैं। वह प्रमुख औद्योगिक संगठन कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के शिष्‍टमंडल के साथ चीन गए थे। शिष्टमंडल वहां के सुप्रसिद्ध कैंटन फेयर में हिस्सा लेने गया था। इसका मकसद वहां से आधुनिक मशीनरी, उत्पाद व तकनीक का आयात करना था, जिससे  चैंबर से जुड़े उद्यमी अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ा सकें।

चीन का कैंटन फेयर आयात निर्यात मेले के नाम से जाना जाता है तथा विश्व भर के व्यवसायी यहां आते हैं। श्री राजपूत की यह आफिशियल विजिट थी। इस दौरे के लिए जागरण के टॉप मैनजमैंट ने उन्हें चीन जाने और वहां से कवरेज की अनुमति दी थी। यह पहला मौका है कि जागरण के किसी ब्यूरो से किसी पत्रकार को मैनेजमेंट ने विदेश यात्रा पर भेजा हो। श्री राजपूत ने अपना दायित्व बखूबी निभाया। तेजतर्रार, समर्पित पत्रकार होने के साथ उन्‍हें कई विषयों पर कलम चलाने में महारत भी हासिल है। अंग्रेजी का ज्ञान भी ठीक ठाक है।

श्री राजपूत इस विदेश यात्रा से खुश भी थे लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई क्योंकि उनके आते ही स्थानीय प्रबंधन ने उनका तबादला हल्द्वानी कर दिया। सूत्रों का कहना है कि उनकी विदेश यात्रा व टॉप मैनेजमैंट से मिली अनुमति स्‍थानीय प्रबंधन को नागवार गुजरी। अब बेचारे मोहन राजपूत हल्‍द्वानी का चक्‍कर काटने को मजबूर हैं। वैसे चुटकी लेकर कहा जा रहा है कि स्‍थानीय प्रबंधन ने यह तबादला जलन के चलते किया है। बड़े लोगों को पूछे जाने की बजाय ब्‍यूरोचीफ को पूछा गया तो तकलीफ तो होनी ही थी।

कोलकाता के हिंदी पत्रकारों की स्थिति खराब, खून पी रहा दैनिक जागरण

कोलकाता में हिंदी पत्रकारिता वैसे ही दुर्दिन में चल रही है, उस पर खुद को देश का नंबर एक अखबार बताने वाले दैनिक जागरण की हालत भी खराब हो गई है. जनसेवा के नाम पर पत्रकारिता की दुकानदारी चलाने वाला जागरण अब अपने पत्रकारों को ठीक से वेतन भी नहीं दे रहा है. पहले ही यहां के पत्रकारों से कम वेतन पर काम करवाया जा रहा है. दूसरे कुछ पत्रकारों को अपना तनख्‍वाह बाजार से ही उठाने का निर्देश दे दिया गया है. यानी विज्ञापन से लाओ चाहे मार्केट से किसी को ब्‍लैकमेल करके के उठाओ इससे जागरण को कोई मतलब नहीं है. 

कोलकाता में दैनिक जागरण समेत हिंदी के पत्रकारों की इस दशा को देखने वाला कोई नहीं रह गया है. कोलकाता प्रेस क्‍लब में भी हिंदी के पत्रकारों को वैसे ही दूसरे दर्जे की मान्‍यता प्राप्‍त है. बड़े-बड़े हौसले और आश्‍वासन देने वाले यहां आते जरूर हैं, मगर हिंदी की गर्दन पर कुर्सी रखकर बैठे कुछ दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं, जिसके कारण हिंदी के पत्रकारों को न तो ढंग के पैसे मिल पाते हैं और ना ही वो सम्‍मान, जिसके वे हकदार होते हैं. यहां सिर्फ कुछ मठाधीश अपनी दुकानदारी चलाए जा रहे हैं. कोलकाता में जन्‍मी पत्रकारिता कब मर गई पता ही नहीं चला! अब तो हिंदी के पत्रकारों की दशा बहुत बुरी है, खासकर दैनिक जागरण के पत्रकारों की. पत्रकार भुखमरी के कगार पर हैं, अगर कोई बचा सकता है तो बचा ले. हालांकि इसके आसार दूर दूर तक नजर नहीं आ रहे. यहां संवाददाताओं और बंधुआ मजदूरों में कोई ज्‍यादा अंतर नहीं है. नाम स्ट्रिंगर, काम पूरा और वेतन, मत पूछिए हुजूर यह अंदर की बात है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गये पत्र पर आधारित.