आदरणीय महोदय, मैंने अपने एक पत्रकार मित्र से आपके पोर्टल के बारे में लगभग एक साल पहले सुना और तब से घर रहने पर प्रतिदिन मैं इस पोर्टल को जरुर देखता हूँ. इस पोर्टल पर विज्ञापित कई समाचार पत्रों और चैनलों में रिपोर्टर के लिए आवेदन भी किया, किन्तु कहीं से कोई जवाब नहीं आया. यहाँ तक कि मैंने अपना रिज्यूमे आपको भी भेज कर आपसे सहायता की अपील की थी.
महोदय, मुझे ऐसा लगता है कि आज के समय में मीडिया में जाने के लिए दो ही रास्ते हैं. एक यह क़ि आपका जुगाड़ हो या दूसरा यह क़ि मीडिया घरानों द्वारा अवैध ढंग से खुलेआम चलाये जा रहे मीडिया संस्थानों में प्रवेश लेकर फीस के रूप में मोटी रकम देकर. देश के तमाम विश्वविद्यालयों द्वारा चलाये जा रहे पत्रकारिता कोर्सों को करने के अलावा पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने का कोई मतलब नहीं रह गया है, यदि इन दोनों में से कोई एक आपके पास नहीं है. आश्चर्य है क़ि मीडिया घरानों द्वारा चलाये जा रहे प्रशिक्षण संस्थानों के कोई कोर्स मान्यता प्राप्त नहीं है फिर भी इनकी दुकानदारी धड़ल्ले से चल रही है, न तो सरकार क़ी हिम्मत है क़ि इनसे पूछ-ताछ कर सके. दूसरे समाचार पत्रों तथा चैनलों के लिए तो ये कोई खबर ही नहीं हो सकती क्योंकि यह तो बिरादरी क़ी बात है.
सुधीर कुमार
पडरौना






