Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

क्‍या मतलब है ‘उस नूतन ठाकुर’ का?

: जागरण के विधि संवाददाता ने लिखी खबर : लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट पेटिशन संख्या 11842/2011 दायर किया गया था. इस रिट पेटिशन के जरिये फेसबुक के खिलाफ पंजीकृत दो मुकदमे एसटीएफ या किसी विशेषज्ञ संस्था को दिये जाने की प्रार्थना की थी.

: जागरण के विधि संवाददाता ने लिखी खबर : लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट पेटिशन संख्या 11842/2011 दायर किया गया था. इस रिट पेटिशन के जरिये फेसबुक के खिलाफ पंजीकृत दो मुकदमे एसटीएफ या किसी विशेषज्ञ संस्था को दिये जाने की प्रार्थना की थी.

कल हाई कोर्ट इलाहबाद की लखनऊ बेंच में जस्टिस एस.एन. शुक्ला व जस्टिस सुरेन्द्र विक्रम सिंह राठौर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते समय प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश एवं डीजीपी यूपी को आदेश दिया कि वे राज्य सरकार द्वारा लखनऊ और आगरा में खोले गए दोनों साइबर पुलिस स्टेशन के लिए तत्काल पर्याप्त संख्या में स्टाफ उपलब्ध कराएं ताकि साइबर मामलों में तीव्रता से विवेचना की जा सके.

इस सम्बन्ध में कुछ अन्य समाचार पत्रों के साथ दैनिक जागरण के लखनऊ नगर संस्करण के आज दिनांक 14 दिसंबर 2011 के अखबार में पृष्ठ सात पर भी “प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को दिये निर्देश- जांच के लिए पर्यात स्टाफ दें” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई. लेकिन अन्य समाचार पत्रों की तुलना में दैनिक जागरण में यह खबर कुछ इस तरह प्रकाशित हुई कि कई जगह अर्थ का अनर्थ हो गया. खबर में लिखा था- “यह आदेश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला व न्यायमूर्ति एसवीएस राठौड की खंडपीठ ने उस नूतन ठाकुर की ओर से दायर याचिका पर दिये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं. राज्य सरकार की ओर से इस मामले में प्रतिशपथ पत्र दायर कर पीठ से बताया गया कि साइबर क्राइम की विवेचना के लिए विशेष जांच दल बनाया गया है, जो लखनऊ और आगरा में है. यह भी कहा गया कि इन दलों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है ऐसे में जांच शीघ्रता से नहीं हो पाती.”

मुख्य सवाल यह है कि यहाँ “उस नूतन ठाकुर” का क्या अर्थ हुआ जब इस शब्द के आगे उसे किसी अन्य तथ्य से जोड़ने वाली कोई अन्य बात नहीं लिखी हुई है. इससे तो कुछ ऐसा ही मालूम पड़ता है  जैसे संवाददाता द्वारा कोई बात कही जा रही थी और अचानक किसी भी कारण से उन्होंने अपनी बात नहीं कहीं. स्थिति जो भी हो पर इतना तय है कि यहाँ अनावश्यक रूप से नाम के आगे “उस” शब्द के प्रयोग से जिस व्यक्ति के नाम के आगे यह शब्द लगाया गया उनको और पाठकों को जरूर एक अजीब दुविधा में डाल दिया गया. वैसे इसके आगे वाली पंक्ति में भी गड़बड़ी है क्योंकि “राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं” वाक्य का भी कोई स्पष्ट अर्थ नहीं समझ में आ रहा है. अब यह तो इस समाचार के लेखक ही जानते होंगे कि “उस नूतन ठाकुर” और “राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर दिये हैं” जैसे पदों से उनका क्या आशय था.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...