Sanjaya Kumar Singh : मसूरी में रेजडेंसी मनोर के उद्घाटन के मौके पर मैं उस समय की उत्तर प्रदेश सरकार के प्रायोजित दौरे पर गया था। उसी समय यूपी एयर का उद्घाटन हुआ था और पहली उड़ान लखनऊ से देहरादून की थी और फिर हमलोग सड़क मार्ग से मसूरी गए थे। दिल्ली से लखनऊ जाने से समय हमें बताया गया था कि शाम को वापस दिल्ली आ जाना है पर वहां पहुंचकर पता चला कि वहीं रुकने का कार्यक्रम था। नए पांच सितारा होटल में ठहरना किसे बुरा लगता। कोई आने को तैयार नहीं था। पर मैं रुकना नहीं चाहता था।
मैंने संबंधित लोगों से कहा कि मुझे वापस दिल्ली जाना है। बताया गया कि यह बंदोबस्त सिर्फ शशांक शेखर सिंह कर सकते हैं। मैंने उन्हें अपना परिचय दिया और दिल्ली आने की इच्छा जताई। पहले तो उन्होंने वहां के कार्यक्रमों की बात बताई और रुकने का आग्रह किया पर मेरे जोर देने पर मान गए और उस जमाने में मसूरी में वहीं बैठे हुए, जब मैं घर फोन नहीं कर पाने के कारण ही वापस आना चाह रहा था, उन्होंने हेलीकॉप्टर मंगा दिया और रेजीडेंसी मनोर से नीचे किसी क्लब से हमने उड़ान भरी और कुछ घंटे में दिल्ली पहुंच गए। शशांक शेखर सिंह की ताकत के कई किस्से सुने पर यह खुद देखा और भोगा हुआ है। उनके निधन की खबर पढ़कर सारी चीजें याद आ गईं।
वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.






