राष्ट्रीय सहारा, पटना में डेस्क पर काम करने वाले तथा सिटी रिपोर्टर परेशान हैं. पिछले दो महीने से ऑफिस में चाय तो बंद ही थी अब पीने के लिए पानी मिलना भी बंद हो गया है. डेस्क वाले तो किसी तरह अपना काम चला रहे हैं पर दिन भर इधर-उधर से दौड़ कर के आने के बाद सिटी रिपोर्टरों को अब पानी भी नसीब नहीं हो रहा है. एसी भी काफी समय से खराब है, जिससे फजीहत और बढ़ गई है.
राष्ट्रीय सहारा के सिटी रिपोर्टर काम की अधिकता के बाद अब पानी को लेकर परेशान हैं. सिटी और ब्यूरो में काम बंटवारे को लेकर पूरी तरह से अंधेरगर्दी है. सिटी के चार से पांच पेजों को भरने की जिम्मेदारी मात्र छह रिपोर्टरों की है. इसमें भी लगभग हर दिन एक रिपोर्टर साप्ताहिक अवकाश के चलते छुट्टी पर होता है. यानी औसतन पांच रिपोर्टर ही इन पेजों के लिए काम पर होते हैं. वहीं ब्यूरो के पास एक पेज भरने की जिम्मेदारी होती है, पर इनके पास रिपोर्टरों की संख्या नौ है. इन मुश्किलों से जूझ रहे सिटी रिपोर्टरों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई हैं.
बिल्डिंग के सातवें तल पर स्थित राष्ट्रीय सहारा के आफिस के न्यूज रूम का एसी भी खराब है. बंदरों का आतंक अलग से है. कई लोगों को ये बंदर काट चुके हैं. बिल्डिंग के लिए पानी की जो टंकी बनाई गई है उसका मुंह खुला हुआ है. इसमें बंदरों के स्नान करने से लेकर चील-कौवों की बीट तक पड़ी रहती है, लिहाजा कोई भी इसे पीने में इस्तेमाल नहीं करता है. राष्ट्रीय सहारा में भी पीने के लिए अलग पानी का इंतजाम किया जाता था, पर चाय के बाद अब उसे भी बंद कर दिया गया है. राष्ट्रीय सहारा में काम करने वाले सिटी रिपोर्टर तो जल्द से जल्द यहां से पलायन करने की कोशिश में लगे हुए हैं.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





