दैनिक भास्कर पंजाब ने पंजाब से अपने फीचर पेज बंद कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में पंजाब से प्रकाशित होने वाला धार्मिक पेज 'सबरंग' बंद किया है। इससे पहले पंजाब में प्रकाशित होता बच्चों का पन्ना 'किड्स पेज' आधा कर दिया था। एक सर्वे के अनुसार इन दोनों पेजों की पंजाब में खासी रीडरशिप है। बच्चों के लिए तो 'भास्कर जूनियर एडिटर' जैसी प्रतियोगिताओं तक का आयोजन करता है। माना जा रहा है कि मैनेजमेंट ने यह कदम खर्चे बचाने के क्रम में किया है।
उल्लेखनीय है कि अपनी लॉचिंग के समय प्रबंधन ने सप्ताह में नौ फीचर पेज देने का वादा करके पाठकों को अपने साथ जोड़ने का प्रलोभन दिया था। तब यहां के पाठकों के लिए विशेष तौर पर अलग से मैगजीन सेक्शन बनाया गया था। इससे पहले केवल एक ही मैगजीन सेक्शन भोपाल में था। सारे एडीशनों के लिए यहीं से मैगजीन बनाए जाते थे। पंजाब और हरियाणा के पाठकों की अलग रुचि को देखते हुए ही अलग मैगजीन सेक्शन जालंधर में बनाया गया था।
इसके तहत सप्ताह में नौ मैग्जीन दिए भी गए थे। यहां से बनने वाले मैग्जीनों को पाठकों ने खूब पसंद किया था। यहां तक कहा जाने लगा था कि पंजाब में अखबार मैग्जीनों के कारण ही खड़ा हो पाया। बाद में धीरे धीरे प्रबंधन ने फीचर पेजों को तवज्जो देनी बंद कर दी। अंतत: मैग्जीन की 18 सदस्यों की टीम अब मात्र दो सदस्यों में सिमटकर रह गई है।
अंदरखाते ये बातें भी सामने आई हैं कि प्रबंधन में एमडी सुधीर अग्रवाल और पवन अग्रवाल की विचारधारा में अंतर भी पंजाब में भास्कर की स्थिति को खराब कर रहा है। पंजाब का एडीटोरियल और सारा बिजनेस पवन अग्रवाल देखते हैं। परंतु उन्हें पत्रकारिता की समझ नहीं है। वह मूलत: बिजनेस स्ट्रीम के हैं। अब हो यह रहा है कि उन्होंने पंजाब में अखबार चलाने के लिए मैनेजरों की नियुक्ति कर दी और साथ ही अच्छे संपादकों को दरकिनार कर दिया। अब मैनेजर ही संपादकों को पेज बंद और शुरू करने की सलाहें दे रहे हैं।
पंजाब से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





