मुंबई : टीवी18 और नेटवर्क18 में काम करने वालों के लिए नवंबर 2009 से भी बदतर हालात नजर आ रहे हैं। रामोजी राव से इनाडु टीवी के सौदे के समय यह माना जा रहा था कि देश के शीर्ष उद्योगपति मुकेश अंबानी का पैसा आने एवं राइट इश्यू से यह समूह तेजी से प्रगति करेगा। लेकिन हो रहा है उल्टा। अब तो लोग चर्चा करने लगे हैं कि एक जमाने में ऑर्ब्जवर अखबार को खरीदकर बंद कराने का श्रेय रिलायंस समूह को है कहीं वही कहानी टीवी18 समूह के साथ न दोहरा दी जाए।
टीवी18 की तरह नेटवर्क18 के हालात भी खराब हो रहे हैं। मुंबई के माटुंगा रोड पश्चिम में न्यू एरा हाउस स्थित किराये का आफिस खाले होने की तैयारी चल रही है। इस आफिस से नेटवर्क18 की अधिकतर वेबसाइटों का संचालन किया जाता है। कंपनी ने अपने इस आफिस को खालीकर टीवी 18 के लोअर परेल स्थित जाने का फैसला किया है। लेकिन यहां इससे पहले सफाई होगी ताकि लोअर परेल कम ही कर्मचारी जाएं।
नेटवर्क 18 की सबसे बड़ी वेबसाइट मनीकंट्रोल डॉट कॉम के अधिकतर कर्मचारियों को मौखिक रुप से बता दिया गया है कि जल्दी ही आफिस लोअर परेल शिफ्ट होगा। बहाना यह बताया जा रहा है कि वहां टीवी टीम के साथ को-ऑर्डिशन कर वेबसाइट को और दमदार बनाया जा सकता है। जबकि, सच्चाई यह है कि एक जमाने में यह वेबसाइट इसी पते पर थी और इसे माटुंगा रोड शिफ्ट किया गया था क्योंकि विस्तार करना था। मनीकंट्रोल में उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा जो वहां के दक्षिण भारतीय कर्ताधर्ताओं को पसंद नहीं हैं।
फर्स्टपोस्ट डॉट कॉम का भी ऑफिस लोअर परेल जाएगा। इस पूरी वेबसाइट में लगभग सारा स्टॉफ ही दक्षिण भारतीय है और चाबी जग्गी के हाथ में है। इस वेबसाइट में रहना है तो नेटवर्क18 के वेब और पब्लिशिंग के एडिटर इन चीफ आर जगन्नाथन (जग्गी) और सीईओ दुर्गा रघुनाथ का खास होना अथवा आपका दक्षिण भारतीय होना जरुरी है। बाकी किसी योग्यता की जरूरत नहीं है।
लेकिन, नेटवर्क 18 के इस आफिस में अन्य वेबसाइट भी हैं जिनमें जोश 18 हिंदी जो अब इन डॉट कॉम का हिस्सा है, टेक टू और कम्पेयर इंडिया एवं स्वयं इन डॉट कॉम (दुनिया का सबसे छोटा ईमेल पता)। इन वेबसाइटों पर कंपनी ताला लगाने का इरादा रखती है और यह चर्चा तीन महीने से चल रही है। इसके अलावा यहां वेबसाइट के कुछ छोटे-छोटे प्रोजेक्ट भी है जिनका बंद होना भी तय है। इस तरह मौजूदा स्टॉफ में से मनीकंट्रोल और फर्स्टपोस्ट का स्टॉफ ही लोअर परेल ऑफिस जाएगा लेकिन कईयों को रुलाकर, दुखीकर और सड़क पर लाकर।






