Tejendra Sharma : बी.बी.सी. लन्दन के भूतपूर्व संपादक विजय राणा का कहना है कि आमतौर पर सांप्रदायिक दंगों को कवर करते हुए मीडिया के लिये एक आचरण कोड स्थापित किया गया है कि समुदायों की पहचान नहीं बताई जाती। जब मैंने श्रीनिवासन जैन की रिपोर्ट देखी तो मैंने पाया कि इस वरिष्ठ पत्रकार ने इस कोड की सिरे से परवाह नहीं की। वे अपनी रिपोर्ट में कहते हैं कि मुसलमानों ने दो जाट लड़कों को मार डाला और उसके बाद से जाट मुसलमानों की हत्या कर रहे हैं और मुसलमानों के घर जलाए जा रहे हैं।
श्रीनिवासन जैन आगे यह भी कहते हैं कि मुसलमान अपने घरों से पलायन कर रहे हैं। उन्होंने शरणार्थी शिविर जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया। विजय राणा के अनुसार यह रिपोर्ट उत्तेजना पैदा करने वाली है और प्रशासन के कार्य को और अधिक कठिन बनाएगी क्योंकि इससे आम आदमी में अधिक आक्रोश उत्पन्न होगा। श्रीनिवासन जैन एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और उन्हें समझना चाहिये कि ऐसे संवेदनशील समय में हमें लोगों के ग़ुस्से को ठण्डा करना होगा ना कि आग में घी डाल कर उसे भड़काया जाए। श्रीनिवासन जैन की रिपोर्ट का मक़सद क्या है समझ में नहीं आता। यह रिपोर्ट मैनें भी देखी है और मैं विजय राणा से पूरी तरह सहमत हूं।
तेजेंद्र शर्मा के फेसबुक वॉल से






