उन्होंने कहा है कि भारत सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिये और ऐसे लोगों का लाइसेंस रद्द करना चाहिये. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्रकारों का शोषण रोकने के लिये नयी नीति का निर्माण करना चाहिये. इस मुद्दे पर प्रेस काउंसिल के चेयरमैन जस्टिस काटजू को हस्तक्षेप करना चाहिये जो हमेशा बोलते रहते हैं लेकिन पत्रकारों के उत्पीड़न पर चुप हो जाते हैं.
उन्होंने कहा कि बहुत सारे मीडिया हाउस वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू नहीं कर रहे हैं, वे वेज बोर्ड की सिफारिशों को शीघ्र लागू करें. सभी पत्रकारों से इस मुद्दे पर आगे आकर इस तरह से शोषण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है तथा इस लड़ाई को आगे ले जाने के लिये रणनीति बनाने की बात कही है.
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