समृद्ध जीवन परिवार की कई कंपनियां जनता को भरमाकर पैसे उगाहने के खेल में लिप्त हैं और इसके जरिए अरबों का साम्राज्य खड़ा कर चुकी हैं. इन कंपनियों के खिलाफ देश के कई हिस्सों से शिकायतें मिली हैं और कई एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं. पणजी (गोवा) में सीआईडी की इकानामिक आफेंसेज सेल की तरफ से सेबी को एक रिफरेंस पत्र भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि यहां कंपनी जनता को कई तरह के लालच देकर पैसे लगवा रही है.
समृद्ध जीवन परिवार के खिलाफ सीबीआई ने भी जांच की है. ये कंपनी जनता से भेड़, बकरी, भैंस आदि जानवरों की फार्मिंग कराने के नाम पर पैसे तो ले रही है पर वे ये पशु नहीं खरीद रही. कंपनी ने 6,48,406 कस्टमर्स से पैसे लिए लेकिन कंपनी के पास सिर्फ 16,876 के लिए ही लाइव स्टाक है. मतलब साफ है कि कंपनी प्रत्येक निवेश के लिए पशु नहीं खरीद रही.
कंपनी के वित्तीय दस्तावेज बताते हैं कि योजनाओं के नाम पर जनता से 331 करोड़ रुपये की रकम एडवांस में ली गई है, वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान. वित्तीय वर्ष 2010-2011 में यह रकम 163 करोड़ रुपये और 2009-10 में रकम 36 करोड़ रही. कंपनी ने दिखाया है कि उसने विज्ञापन और सेल्स प्रमोशन में वर्ष 2011-12 में 56 करोड़ रुपये खर्च किए. इसी मद में वर्ष 2010-2011 में 39.5 करोड़ और 2009-2010 में 22 करोड़ रुपये व्यय किए.
समृद्ध जीवन परिवार की कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर पैसे के ट्रांसफर हुए हैं. सेबी की जांच में पता चला है कि यह कंपनी अवैध निवेश योजना संचालित कर रही है. सेबी के मुताबिक उसका पहला मकसद निवेशकों के हित की सुरक्षा है. इसी के तहत सेबी ने समृद्ध जीवन की निवेश योजनाओं पर रोक लगाते हुए जनता से लिए गए पैसे को इधर-उधर न करने के आदेश दिए हैं.
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