लखनऊ। यूपी की अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान सांप्रदायिक दंगों और नेपाल में आईएसआई के गुर्गा रहे माफिया मिर्जा दिलशाद बेग से संबंधों के आरोपी 1978 बैच के आईपीएस रिजवान अहमद को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक घोषित किया है। अखिलेश के शासनकाल के पौने दो साल के दौरान हुए दंगों के धब्बों से गुजर रही सरकार ने ऐसे समय पर रिजवान अहमद की तैनाती कर मुस्लिम वोट बैंक ठीक करने की कोशिश की है, लेकिन फरवरी में उनके सेवानिवृत्त होने के पहले ही डीजीपी की कुर्सी हथियाने की दौड़ भी आज से ही शुरु हो गई है।
रिजवान अहमद की तैनाती पर भाजपा सांसद व गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने सामना को बताया कि 1996 में गोरखपुर तैनाती के दौरान रिजवान अहमद पर नेपाल में आईएसआई के मोहरे के रुप में काम रहे नेपाली सांसद मिर्जा दिलशाद बेग से संबंधों के आरोप लगे थे, जिसके चलते रिजवान अहमद को 1996 से 2003 तक कोई भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। 2003 में जब मुलायम सिंह यादव फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री हुए तो उन्होंने रिजवान अहमद को कानपुर का आईजी बनाया। इन्हीं के कार्यकाल में अलीगढ़ में सांप्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें चार हिंदू व बाद में पुलिस मुठभेड़ में चार मुस्लिम भी मारे गए थे। 2005 में भाजपा के एक दलित विधायक के बेटे को कब्रिस्तान में दफन कराने का आरोप भी इन पर लगा था।
इस संदर्भ में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा कि जब राज्य सरकार से प्रदेश का सांप्रदायिक माहौल संभाले नहीं संभल रहा है, मुजफ्फरनगर दंगे के पीड़ित आज भी राहत शिविर में रात काट रहे हैं, ऐसे में इतने विवादित व्यक्ति को राज्य का पुलिस प्रमुख बनाकर सरकार ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है, मेरी भगवान से प्रार्थना है कि प्रदेश की जनता के लिए 2014 सुख, शांति एवं समृद्वि लेकर आए। जनता के ऊपर किसी ऐसी राजनीतिक नियुक्ति या बुरी घटनाओं का असर न पड़े। साभार : सामना





