चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर आम लोगों को जागरूक करने तथा वोटर बनाने के लिए जोरदार अभियान चला चुका है वहीं उसकी खुद की गलती से प्रदेश के लाखों वोटर्स के मतदान से वंचित रहने की समस्या खड़ी हो गयी है। उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग की इस गलती अथवा लापरवाही का खुलासा वाराणसी में समाजवादी जनपरिषद के कैंट से उम्मीदवार अफलातून देसाई ने पत्रकारों से बातचीत में किया।
अफलातून के अनुसार 16 अक्टूबर 2011 के आसपास मतदाता पुनरीक्षण का कार्य कराया गया, इस क्रम में नये नाम जोड़ने तथा संशोधित और सुधारने का काम बीएलओ (बूथ इलेक्शन आफिसर) के माध्यम से कराया गया। इस नयी लिस्ट को 20 दिसम्बर तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर देना था। इसके लिए जिलास्तर पर कंसर्निंग आफिसर को एक पासवर्ड दिया गया था किन्तु तकनीकी कारणों से गत 5 दिसम्बर से ही आयोग की वेबसाइट डिस्टर्ब हो गयी। इससे संशोधित वोटर्सलिस्ट अपलोड नहीं की जा सकी। यह लापरवाही निश्चित रूप से चुनाव आयोग से हुई है।
आयोग की इस लापरवाही की लिखित जानकारी अफलातून ने चुनाव आयोग को भेजी है, जिसमें उन्होंने इलेक्शन नोटिफिकेशन जारी होने के पहले ही संशोधित वोटर्सलिस्ट को वेबसाइट पर अपलोड कराने की गुजारिश की थी लेकिन ऐसा हो नहीं सका। हकीकत यह है कि पुनरीक्षण परीक्रिया के दौरान मतदाता सूची की प्रविष्टियां जोड़ने, सुधारने तथा मतदाता फोटो परिचय पत्र हेतु लिए गये प्रारूप तथा चित्रों की पूरी तरह उपेक्षा की गयी है। इस संबंध में बूथ स्तरीय अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन कार्यालय में जमा किये गये दस्तावेजों के प्रमाण तो हैं लेकिन यह गत 2 जनवरी को जारी सूची में जोड़े अथवा सुधारे नहीं गये हैं। परिणामस्वरूप प्रदेश के लाखों मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने की आशंका को बल मिल रहा है।
वाराणसी से अजय कृष्ण त्रिपाठी की रिपोर्ट





