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महेंद्र मोहन और संजय गुप्‍ता को सरकारी मकान खाली करने का अल्‍टीमेटम

लखनऊ से खबर है कि दैनिक जागरण से खफा सीएम के तेवर को देखते हुए आरएसए ने अखबार के नाम पर दिलकुशा कालोनी में सरकारी मकानों पर नियमों के विपरीत कब्‍जा जमाए महेंद्र मोहन, संजय गुप्‍त तथा शशांक शेखर त्रिपाठी को जल्‍द से जल्‍द मकान खाली कराने का अल्‍टीमेटम दे दिया है. सूत्र बताते हैं कि नोटिस में स्‍पष्‍ट किया गया है कि अगर ये लोग स्‍वेच्‍छा से मकान खाली नहीं करते हैं तो इन्‍हें पुलिस की मदद लेकर बलपूर्वक मकान से बाहर निकाला जाए. यानी अगर ये लोग मकान खाली नहीं करते हैं तो पुलिस इनको लठियाकर बाहर निकाले.

लखनऊ से खबर है कि दैनिक जागरण से खफा सीएम के तेवर को देखते हुए आरएसए ने अखबार के नाम पर दिलकुशा कालोनी में सरकारी मकानों पर नियमों के विपरीत कब्‍जा जमाए महेंद्र मोहन, संजय गुप्‍त तथा शशांक शेखर त्रिपाठी को जल्‍द से जल्‍द मकान खाली कराने का अल्‍टीमेटम दे दिया है. सूत्र बताते हैं कि नोटिस में स्‍पष्‍ट किया गया है कि अगर ये लोग स्‍वेच्‍छा से मकान खाली नहीं करते हैं तो इन्‍हें पुलिस की मदद लेकर बलपूर्वक मकान से बाहर निकाला जाए. यानी अगर ये लोग मकान खाली नहीं करते हैं तो पुलिस इनको लठियाकर बाहर निकाले.

गौरतलब है कि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक महेंद्र मोहन गुप्त के नाम से दिलकुशा कालोनी में बी-1 तथा समूह संपादक संजय गुप्‍ता के नाम से बी-2 बंगला आवंटित हैं. महेंद्र मोहन 7/51 पूर्ण निवास तिलक नगर कानपुर और संजय गुप्त डी 210-211, सेक्टर 63 नोएडा गौतमबुद्ध नगर के स्थायी निवासी हैं. सरकार ने इन दोनों को निजी आवास होने और मान्यता प्राप्त न होने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर बंगला आवंटित कर रखा था. महेंद्र मोहन गुप्त और सम्पादक संजय गुप्ता के नाम पर आवंटित बंगलों का उपयोग 'गेस्ट हाउस' की तरह किया जा रहा था.

महेंद्र मोहन राज्‍यसभा सांसद भी रह चुके हैं. बताया जा रहा है कि सीएम जागरण मालिकान के एक कार्यक्रम में नहीं गए और सपा ने महेंद्र मोहन को राज्‍यसभा का टिकट दुबारा नहीं दिया तो अखबार ने सरकार और मुख्‍यमंत्री के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था. इसके बाद ही सैफई के बारे में अखबार ने एक खबर प्रकाशित की, जिसके बाद सीएम नाराज हो गए. अपने आवास पर की गई पीसी में उन्‍होंने बाकायदा इसका खुलासा भी कर दिया. इसके बाद भन्‍नाए जागरण प्रबंधन ने सीएम और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सरकार के खिलाफ तमाम खबरें प्रकाशित हो रही हैं.

सरकार भी दैनिक जागरण अखबार और उसके प्रबंधन से किसी प्रकार की मुरौव्‍वत करने को तैयार नहीं है. सरकार ने अखबार को दिए जाने वाले सरकार विज्ञापन को बंद कर रखा है. अब मकान खाली कराए जाने की तैयारी है. दोनों के संबंधों में खटास का असर यह है कि अगर अवैध मकान जागरण मालिकान द्वारा खाली नहीं किए गए तो पुलिस भी इनकी ऐसी की तैसी करने से पीछे नहीं हटेगी. यानी जुआकांड के बाद एक बार फिर पुलिस जागरण वालों को लाठियों से स्‍वागत करके सरकारी घर से बाहर भगाएगी. 

इस संदर्भ में इसको भी पढ़ सकते हैं –  महेंद्र मोहन और संजय गुप्‍ता ने भी हथिया रखे हैं सरकारी बंगले!

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