Abhishek Srivastava : आम आदमी पार्टी की राजनीतिक-आर्थिक विचारधारा को लेकर जिन्हें भ्रम है, उसे दूर करने के लिए उन्हें अरविंद का यह भाषण ज़रूर सुनना चाहिए। अरविंद कहते हैं कि उन्हें पूंजीवाद से कोई विरोध नहीं है, बस पूंजीवाद में ''क्रोनी'' वाला तत्व वे खत्म करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इसी ''क्रोनी'' पूंजीवाद से बेरोज़गारी, महंगाई, गरीबी आदि पैदा होती है। अगर दुकानदार दुकान चलाए और राजकाज का काम सरकार करे, तो कहीं कोई दिक्कत ही नहीं पैदा होगी।
उनके कहने का अर्थ ये है कि राव-सिंह के नेतृत्व में जिस उदारीकरण को 90 के बाद लाया गया, उसे अब विशुद्ध ''साम्राज्य'' के स्तर तक पहुंचाने की ज़रूरत है जहां सरकार और कारोबार दो परस्पर स्वायत्त इकाइयां हों, बाकी सारी पहचानें मिट जाएं और सिर्फ एक पहचान बची रह जाए जिसे ''गरीब'' कहते हैं। ऐसा लगता है कि अरविंद का यह पूरा भाषण सन् 2000 में आई हार्ट और नेग्री की बहुचचर्चित पुस्तक ''एम्पायर'' की भारतीय प्रस्तावना है, जिसमें पूंजीवाद को घर्षणरहित बनाने का प्रोजेक्ट उकेरा गया है। संयोग से अरविंद की सामाजिक-राजनीतिक पैदाइश और इस पुस्तक की पैदाइश समकालीन है। दिलचस्प!
बहरहाल, अब, जबकि सीधे घोड़े के मुंह से (अंग्रेज़ी मुहावरा) उसका राजनीतिक दर्शन ज़ाहिर हो ही गया है, तो कम से कम समाजवादियों और मार्क्सवादियों की ओर से 'आप' के समर्थन / सहानुभूति में अब कोई भी थेथरई नहीं टिक पाएगी। या तो आप पूंजीवाद के साथ हैं या उसके खिलाफ़- यानी या तो आप 'आप' के साथ हैं या उसके खिलाफ़! बात खत्तम!
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युवा पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.






